नामांकन के समय गिरफ्तारी, जेल में रहकर जीते चुनाव, दरौली में सत्यदेव राम की बेबाक राजनीति की कहानी

Bihar Election 2025: सीवान जिले की दरौली विधानसभा सीट से विधायक सत्यदेव राम बिहार की राजनीति में एक संघर्षशील और जमीनी नेता के रूप में जाने जाते हैं. वामपंथी विचारधारा से जुड़ाव रखने वाले सत्यदेव राम ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत आंदोलनों से की थी और जेल में रहते हुए भी चुनाव जीतकर मिसाल कायम की. तीन बार मैरवा और दो बार दरौली से विधायक रह चुके सत्यदेव राम की राजनीति मुद्दों और जनसंघर्षों पर केंद्रित रही है.

Bihar Election 2025: सीवान जिले की राजनीति में सत्यदेव राम एक ऐसा नाम हैं जो सिर्फ चुनावी आंकड़ों से नहीं, बल्कि आंदोलनों और संघर्षों की मिसाल के तौर पर जाने जाते हैं. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन यानी CPI(ML) के वरिष्ठ नेता सत्यदेव राम ने राजनीति की शुरुआत जमीन और किसान आंदोलन से की थी, लेकिन आज वो खुद एक मजबूत जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित हैं.

उनका सफर जेल, आंदोलन, जनसभा और फिर विधानसभा तक का रहा है और ये सफर अब भी जारी है. 2015 के विधानसभा चुनाव में नामांकन करते समय ही सत्यदेव राम को गिरफ्तार कर लिया गया. वे जेल में रहते हुए चुनाव लड़े और जीत भी दर्ज की. 2020 चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के रामायण मांझी को लगभग 12 हजार वोट से हराया.

तीन बार मैरवा से विधायक, फिर दरौली से कमान

सत्यदेव राम ने पहली बार 1988 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा था. उन्होंने लेफ्ट राजनीति को अपनी ज़मीन और पहचान बनाई. वे तीन बार मैरवा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए, और बाद में दरौली विधानसभा क्षेत्र से जीतकर सीवान की राजनीति में नए समीकरण गढ़े.

CPI(ML) के प्रमुख चेहरों में शामिल सत्यदेव राम सिर्फ पार्टी के भीतर ही नहीं, जनता के बीच भी एक जमीनी नेता के रूप में पहचाने जाते हैं. खासकर सीवान, मैरवा और दरौली जैसे इलाकों में उन्होंने गरीबों, दलितों और मजदूरों के मुद्दों को लगातार उठाया.

संघर्षशील छवि और जेल की सजा

सत्यदेव राम की राजनीतिक छवि जितनी स्पष्ट रही, उनका जीवन उतना ही संघर्षपूर्ण रहा है. उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज हुए, जिनमें सबसे प्रमुख चिल्हमरवा दोहरा हत्याकांड है. इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा.

उनका एक बड़ा राजनीतिक पड़ाव तब आया जब वे जेल में रहते हुए भी चुनाव मैदान में उतरे और जनता ने उन्हें भारी मतों से जिताकर विधानसभा भेजा. यह घटना उनके जनाधार और राजनीतिक पकड़ को दर्शाती है. विरोधियों के लिए यह एक संदेश था कि वाम राजनीति सिर्फ विचारधारा नहीं, ज़मीनी समर्थन से चलती है.

मुद्दों की राजनीति

सत्यदेव राम की राजनीति जाति या धर्म के बजाय मुद्दों पर आधारित रही है. चाहे भूमि सुधार की बात हो, दलितों के अधिकार, मजदूरों की मजदूरी या महिलाओं की सुरक्षा. सत्यदेव राम ने हमेशा आंदोलनात्मक शैली में राजनीति की. CPI(ML) के मंच से उन्होंने शोषित वर्ग की आवाज़ को विधानसभा तक पहुंचाने का काम किया. वे सरकार की नीतियों पर अक्सर मुखर विरोध करते रहे हैं, और ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त असमानता, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर आवाज उठाते रहे हैं.

विपक्ष की चुनौती और जनता का भरोसा

राजनीति में लंबे समय तक टिके रहना जितना कठिन होता है, उतना ही कठिन होता है विश्वास बनाए रखना. सत्यदेव राम ने न सिर्फ विपक्ष के हमलों का सामना किया, बल्कि संगठन के भीतर भी अनुशासन और विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया.

हाल के वर्षों में जब बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण और धनबल ने भारी असर डाला, सत्यदेव राम का एक सादा जीवन और ईमानदार छवि उन्हें भीड़ से अलग बनाता रहा है. वे अब भी साधारण वेशभूषा में दिखते हैं और जनता से सीधे जुड़ाव रखते हैं.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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