चिराग- मांझी और कुशवाहा के लिए क्या है BJP-JDU का प्लान, ऐसा होगा सीट शेयरिंग का फार्मूला!

Bihar Elections 2025: बिहार में इस साल होने वाले चुनाव से पहले दोनों गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर घमासान मचा हुआ है. महागठबंधन और एनडीए के बड़े दल छोटे दलों को कम सीट पर चुनाव लड़ने के लिए मनाने के प्रयास में जुटे हैं.

Bihar Elections 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी महागठबंधन के बीच तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है. दोनों ही खेमों में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत तेज है. एनडीए में अंदरूनी खींचतान चल रही है और सभी दल ज्यादा सीटों के लिए जोर लगा रहे हैं. एनडीए की बड़ी पार्टियां जैसे बीजेपी और जेडीयू के बीच मुख्य बातचीत हो रही है.

चिराग पासवान की एलजेपी (रा), जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम जैसी छोटी पार्टियां बीजेपी से संपर्क में हैं.बीजेपी इनकी बातों को जेडीयू के साथ मिलकर सुलझाने की कोशिश कर रही है. कई सीटों पर जब दो से ज्यादा दलों का दावा है ऐसे स्थिति में जातीय समीकरणों और पुराने प्रदर्शन को आधार बनाकर बातचीत चल रही है.

क्या फार्मूला हो सकता है

सूत्रों के मुताबिक, एनडीए की योजना है कि 243 सीटों में से 201 से 205 सीटें बीजेपी और जेडीयू मिलकर लड़ें और बाकी 38 से 42 सीटें छोटी पार्टियों को दे. 2020 में जेडीयू ने 115 और बीजेपी ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था. अब मांझी पहले से मजबूत माने जा रहे हैं और एनडीए के काफी करीब हैं. चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को कम से कम 25–30 सीटें देने की जरूरत होगी.

चिराग की शर्तें और बीजेपी की मंशा

चिराग पासवान 30 सीटों के साथ राज्यसभा की एक सीट और एक बड़ा पद चाहते हैं. ऐसी चर्चा है कि वे अपनी मां रीना पासवान को राज्यसभा भेजना चाहते हैं. बीजेपी उन्हें 18 से 22 सीटें देने के मूड में है और राज्यसभा सीट देने पर कुछ कम सीटों के लिए राजी करने की कोशिश कर रही है. डिप्टी सीएम पद की मांग भी चिराग के एजेंडे में है, जिसके लिए वे अरुण भारती का नाम आगे कर सकते हैं. चिराग खुद को सीएम पद से नीचे किसी पद पर मानने को तैयार नहीं हैं.

मांझी और कुशवाहा की रणनीति

मांझी इन दिनों चिराग के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं और अपनी मुसहर जाति के वोट ट्रांसफर की ताकत को मुद्दा बना रहे हैं और एनडीए को याद दिला रहे हैं कि उनका जनाधार ज्यादा भरोसेमंद है. 2020 में चिराग के अकेले चुनाव लड़ने से जेडीयू को नुकसान हुआ था. हालांकि इस बार उनके अकेले लड़ने की संभावना कम है. लेकिन उनकी प्रशांत किशोर से नजदीकियां एनडीए को चिंतित कर रही है.

मांझी भी इस बार 2020 से ज्यादा सीटें मांग रहे हैं, लेकिन बीजेपी उन्हें 7 से 9 सीटों का ऑफर दे रही है. जीतन मांझी खुद कम सीट के बावजूद केंद्रीय मंत्री हैं. पीएम मोदी और अमित शाह से लगातार मिलते रहते हैं. ऐसे में बेटे संतोष सुमन को फिर से मंत्री बनाने की बात से उन्हें मनाया जा सकता है.

उपेंद्र कुशवाहा को भी बीजेपी 7 से 9 सीटों का प्रस्ताव दे रही है. चुनाव से पहले उन्हें केंद्र में मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, जिससे वे कोई मुश्किल खड़ी न करें. बीजेपी की कोशिश है कि शाहाबाद क्षेत्र को खासतौर पर मजबूत किया जाए, जहां पिछली बार प्रदर्शन कमजोर रहा था.

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मुकेश सहनी पर नजर

वहीं मुकेश सहनी पर भी सबकी नजरें टिकी है. 2020 में वह विपक्ष से एनडीए में ऐन मौके पर आ गए थे. इस बार भी अगर महागठबंधन से सीटें नहीं मिलीं तो उनके फिर से एनडीए की तरफ लौटने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसलिए बीजेपी-जेडीयू अब तक अंतिम सीट बंटवारे को टाल रहे हैं. अगर सहनी फिर से एनडीए में आते हैं तो बीजेपी-जेडीयू को बाकी दलों की सीटों में और कटौती करनी पड़ सकती है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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