अगर आप Mahindra की कोई नई SUV जैसे, Scorpio-N या Thar खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी. कंपनी की वेबसाइट पर एक्स-शोरूम (Ex-showroom) कीमत पूरे देश में एक ही दिखती है, लेकिन जब आप इसे खरीदने शोरूम जाते हैं, तो दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई या उत्तर प्रदेश में इसकी ऑन-रोड (On-Road) कीमत में लाखों रुपये का अंतर आ जाता है. आखिर एक ही गाड़ी, एक ही मॉडल और एक ही कंपनी होने के बावजूद अलग-अलग राज्यों में यह फर्क क्यों आता है? आइए इसके बारे में समझते हैं.
ऑन-रोड कीमत क्या होती है?
जब कोई कार कंपनी किसी गाड़ी का रेट बताती है, तो वह एक्स-शोरूम प्राइस होता है. इसमें कार की अपनी लागत और केंद्र सरकार का टैक्स (GST) शामिल होता है, लेकिन गाड़ी को सड़क पर चलाने के लिए कई अन्य खर्च जोड़ने पड़ते हैं, जिसे ऑन-रोड प्राइस कहा जाता है. इसमें ये मुख्य चीजें शामिल होती हैं.
- RTO (रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन): राज्य सरकार द्वारा लिया जाने वाला टैक्स.
- इंश्योरेंस (बीमा): गाड़ी का थर्ड पार्टी और ओन-डैमेज कवर.
- फास्टैग और अन्य चार्ज: छोटे-मोटे रजिस्ट्रेशन और हैंडलिंग फीस.
- MCD / स्थानीय टैक्स: कुछ शहरों में लगने वाला पार्किंग या इंफ्रास्ट्रक्चर सेस.
- राज्यों में फर्क की असली वजह: रोड टैक्स (RTO)
कीमत में सबसे बड़ा अंतर RTO यानी रोड टैक्स की वजह से आता है. भारत के संविधान के मुताबिक, वाहनों पर रोड टैक्स तय करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है.
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हर राज्य अपने हिसाब से रोड टैक्स का प्रतिशत करता है तय
कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य: यहां RTO टैक्स दरें देश में सबसे ज्यादा मानी जाती हैं. महिंद्रा की 15 से 20 लाख रुपये वाली SUV पर यहां 15% से 18% या उससे भी ज्यादा रोड टैक्स लग जाता है.
दिल्ली और उत्तर प्रदेश: दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश या पड़ोसी राज्यों में रोड टैक्स कर्नाटक की तुलना में थोड़ा कम (करीब 8% से 12%) होता है.
गुजरात और हिमाचल प्रदेश: इन राज्यों में रोड टैक्स का स्लैब काफी किफायती रहता है.
इसी वजह से, महिंद्रा की 20 लाख रुपये वाली SUV पर दिल्ली और बेंगलुरु के ऑन-रोड प्राइस में 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये तक का बड़ा अंतर आ जाता है.
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फ्यूल का भी पड़ता है असर
कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल गाड़ियों के लिए रोड टैक्स का नियम अलग-अलग है. डीजल इंजन वाली महिंद्रा SUV पर कई राज्य 2% से 4% तक extra RTO टैक्स वसूलते हैं. इसके अलावा, 2000cc से बड़े इंजन वाली SUV पर कुछ राज्यों में अतिरिक्त सेस भी लगाया जाता है.
कंपनी vs पर्सनल रजिस्ट्रेशन
अगर आप SUV को अपने निजी नाम पर रजिस्टर कराते हैं, तो नॉर्मल टैक्स लगता है, लेकिन यदि कोई कंपनी या बिजनेस के नाम पर गाड़ी खरीदता है, तो कई राज्यों में RTO टैक्स लगभग दोगुना तक हो जाता है.
ग्राहकों के लिए काम की बात
अगर आपका ट्रांसफर अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में होता है, तो आप BH Series (भारत सीरीज) रजिस्ट्रेशन का विकल्प चुन सकते हैं. इसमें एक बार में 15 साल का भारी-भरकम RTO टैक्स देने के बजाय हर 2 साल में किश्तों में टैक्स चुकाना होता है, जिससे शुरुआती ऑन-रोड खर्च काफी कम हो जाता है.
इन बातों का ध्यान रखना जरूरी
अगली बार जब आप किसी विज्ञापन में Mahindra SUV की कीमत देखें, तो ध्यान रखें कि वह एक्स-शोरूम कीमत है. आपके राज्य के RTO नियम ही यह तय करेंगे कि गाड़ी आपकी जेब पर कितनी भारी पड़ेगी.
