क्यों कुछ कारों में बाएं तो कुछ में दाएं साइड पर होता है फ्यूल टैंक? जानें वजह

Car Fuel Tank Position: क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ कारों में फ्यूल टैंक बाएं और कुछ में दाएं ओर होता है? दरअसल इसके पीछे वजह डिजाइन, सेफ्टी और ट्रैफिक नियमों से जुड़ी हैं. आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं.

Car Fuel Tank Position: अगर आपने कभी अलग-अलग कारें चलाई हैं या बस ध्यान से देखा है, तो एक बात जरूर नोटिस की होगी कि हर गाड़ी में फ्यूल टैंक एक ही साइड पर नहीं होता. कहीं पेट्रोल भरने की जगह दाईं तरफ होती है, तो कहीं बाईं तरफ. ऐसे में मन में एक बार ये सवाल आना बिल्कुल लाजमी है कि आखिर इसका कोई तय नियम क्यों नहीं है? क्या कंपनियां इसे यूं ही तय करती हैं? दरअसल, इसके पीछे गाड़ी की डिजाइन, सेफ्टी प्लानिंग और अलग-अलग देशों में होने वाली मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कई वजहें होती हैं. आइए, इसे डिटेल में समझते हैं.

डिजाइन करती है मैटर 

फ्यूल भरने वाली ढक्कन (fuel filler) की जगह असल में गाड़ी के डिजाइन पर डिपेंड करती है. जब कंपनी नई कार बनाती है, तो शुरुआत से ही तय कर लिया जाता है कि फ्यूल टैंक कहां रखा जाएगा. इंजीनियर इस दौरान कई बातों का ध्यान रखते हैं. जैसे एग्जॉस्ट सिस्टम कहां है, सस्पेंशन कैसे लगा है, गाड़ी के नीचे का लेआउट कैसा है और कितनी खाली जगह बची है. इन सब चीजों को देखकर ही फाइनल किया जाता है कि फ्यूल फिलर किस साइड रहेगा.

आजकल की कारें ऐसे प्लेटफॉर्म पर बनाई जाती हैं जो कई मॉडल्स और कभी-कभी अलग-अलग देशों में भी इस्तेमाल होते हैं. एक बार प्लेटफॉर्म के लिए फ्यूल टैंक की जगह तय हो जाए, तो आम तौर पर वही जगह सभी मॉडल्स में रहती है. इसे बदलना मतलब कुछ जरूरी पार्ट्स को दोबारा डिजाइन करना. इससे खर्च और काम की जटिलता दोनों बढ़ जाते हैं.

सेफ्टी और स्ट्रक्चरल प्लानिंग

सेफ्टी भी बहुत जरूरी है. इंजीनियर इस बात का खास ध्यान रखते हैं कि फ्यूल टैंक और फिल्लर पाइप कहां रखा जाए ताकि किसी भी क्रैश में खतरा कम से कम हो. आमतौर पर टैंक को ऐसे जगह रखा जाता है जहां सीधे ठोकर या ज्यादा गर्मी जैसे एग्जॉस्ट सिस्टम से दूर हो.

साइड-इम्पैक्ट यानी साइड से लगने वाली टक्कर में गाड़ी की स्ट्रक्चरल स्ट्रेंथ यानी मजबूती सबसे ज्यादा मायने रखती है. इसलिए फिल्लर पाइप और टैंक की जगह इस हिसाब से तय होती है कि क्रैश सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पूरी हों. यानी ये डिसीजन ड्राइवर की पसंद से ज्यादा, सेफ्टी और इंजीनियरिंग बैलेंस पर बेस्ड होता है.

ट्रैफिक के तरीके और सुविधा

ट्रैफिक और कंफर्ट की बात करें तो अलग-अलग देशों के ट्रैफिक नियम कारों के डिजाइन को भी असर करते हैं. जैसे कि भारत, यूके और जापान में गाड़ी सड़क के बाएं तरफ चलती है, जबकि अमेरिका और ज्यादातर यूरोप में दाईं तरफ. कुछ कंपनियां पेट्रोल भरने की आसानी को ध्यान में रखकर फ्यूल टैंक की साइड चुनती हैं, लेकिन कोई तय नियम नहीं है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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