Why Dont Scooters Have Gears: इंडिया में स्कूटर को आमतौर पर लोग ‘स्कूटी’ ही कहते हैं. शहरों की सड़कों पर सबसे ज्यादा दिखने वाले टू-व्हीलर्स में से एक हैं. स्टूडेंट्स हों या ऑफिस जाने वाले लोग, रोजमर्रा के सफर के लिए बहुत से लोग इन्हें ही चुनते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि स्कूटी में बाइक की तरह गियर क्यों नहीं होते? आखिर इसकी वजह क्या है? इसका जवाब स्कूटी के डिजाइन, टेक्नोलॉजी और उसके इस्तेमाल के मकसद में छिपा है. आइए आपको डिटेल में बताते हैं.
CVT है बड़ी वजह
आजकल ज्यादातर मॉडर्न स्कूटर्स में Continuously Variable Transmission (CVT) सिस्टम दिया जाता है. अब ये सुनने में थोड़ा टेक्निकल लग सकता है, लेकिन असल में काम बहुत आसान है. नॉर्मल मोटरसाइकिल की तरह इसमें आपको क्लच दबाकर गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. बाइक में जहां पैर से गियर शिफ्ट करना पड़ता है, वहीं CVT अपने आप स्पीड और एक्सीलरेटर के हिसाब से गियर रेशियो एडजस्ट कर लेता है. यानि राइडर को सिर्फ एक्सीलरेटर देना है और ब्रेक लगाना है.
CVT सिस्टम बेल्ट और पुली मैकेनिज्म पर काम करता है, जो स्कूटर के स्पीड बढ़ाने या कम करने पर अपने आप स्मूद तरीके से एडजस्ट हो जाता है. इसी वजह से स्कूटर चलाना बेहद आसान हो जाता है.
शहर में चलाने में आसान होती है स्कूटी
स्कूटर असल में शहर की छोटी-छोटी दूरी के सफर को आसान बनाने के लिए ही बनाए जाते हैं. कंपनियां इनमें आराम, आसान राइडिंग और रोजमर्रा की जरूरतों का खास ध्यान रखती हैं. अब जब इनमें मैनुअल गियर नहीं होते, तो इन्हें चलाना काफी आसान हो जाता है. खासकर नए राइडर्स के लिए या उन लोगों के लिए जो क्लच और गियर के झंझट में नहीं पड़ना चाहते.
गियरलेस सिस्टम का एक बड़ा फायदा यह भी है कि ट्रैफिक में थकान कम होती है. बार-बार गियर बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए आपका ध्यान सड़क पर ज्यादा रहता है.
स्कूटी का मेकानिज्म होता है सिंपल
ज्यादातर स्कूटर्स में बाइक के मुकाबले छोटा इंजन दिया जाता है, जो आमतौर पर 100cc से 125cc के बीच ही होता है. ये इंजन हाई-स्पीड हाईवे राइड के लिए नहीं, बल्कि शहर में आरामदायक और स्मूथ चलाने के लिए बनाए जाते हैं. इसलिए इनके साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ज्यादा बेहतर बैठता है.
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