लाल-पीली, हरी-काली सब भूल जाइए! इस रंग की कार खरीदने से मिलेगा तगड़ा मुनाफा, कइयों को नहीं पता यह बात

Car Color: कार लेने की बारी जब आती है तब दिमाग घूम जाता है. मॉडल, फीचर्स, कंपनी सब देखना पड़ता है. अंत में मामला अटक जाता है रंग पर. रंगों की कमी भी नहीं है, ऑप्शन भर-भर के मिलते हैं. लेकिन आपके लिए कौन सा कलर सही रहेगा, ये तय करने में हम आपकी थोड़ी मदद कर सकते हैं.

Car Color: कार खरीदने से पहले की जो हालत होती है उससे कई लोग वाकिफ होंगे. दिमाग एकदम से घूम जाता है. पहले तो सोचना पड़ता है कि पेट्रोल लेंगे या डीजल, बजट के हिसाब से CNG ठीक रहेगी या हाइब्रिड और अब तो मार्किट में इलेक्ट्रिक कारें भी है. तब आते हैं फीचर्स पर कि सनरूफ चाहिए या नहीं, 360 डिग्री कैमरा वाला वेरिएंट लेना है या नहीं.

यह सब एक बार को फैसला हो भी जाए तब भी मामला अटक जाता है कि रंग (Car Color) कौन सी होगी. इसमें सिर्फ आप ही नहीं, परिवार वाले, रिश्तेदार और पड़ोसी भी राय देने लगते हैं. बाजार में ऑप्शन तो बहुत हैं, लेकिन कौन सा रंग आपके लिए सबसे सही रहेगा, इसमें हम आपकी आज मदद कर सकते हैं. आइए जरा आपको विस्तार बताते हैं.

कौन-सी रंग की कार लेना है फायदेमंद

अगर कार के कलर (Car Color) की बात करें तो सफेद रंग सबसे बढ़िया रहता है. यह रंग हम आपको अपने मन से नहीं बता रहे. चाहे बात करें साइंस की, मेंटेनेंस की या फिर लोगों की पसंद और बाद में बेचने की, सफेद रंग में आप निराश नहीं होंगे. इसके कुछ फायदे हम आपको बताने वाले हैं.

गर्मियों में ज्यादा गर्म नहीं होती सफेद गाड़ी

गर्मी के मौसम में लोग हल्के रंग के कपड़े पहनते हैं ताकि ज्यादा गर्मी न लगे. वही बात गाड़ियों पर भी लागू होती है. काली, नीली, लाल या किसी भी गहरे रंग की गाड़ी के अंदर सफेद गाड़ी की तुलना में ज्यादा गर्मी हो जाती है. इसका कारण थर्मोडायनेमिक्स है. काला रंग सूर्य की रोशनी को ज्यादा खींचता है, जिससे गाड़ी का तापमान बढ़ जाता है. वहीं, सफेद रंग सूर्य की रोशनी को रिफ्लेक्ट करता है, इसलिए गाड़ी ज्यादा गर्म नहीं होती.

Carparts की रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग रंग की गाड़ियों में तापमान चेक करने पर पता चला कि ब्लैक कार का तापमान एक घंटे में 70 डिग्री तक पहुंच गया. सिल्वर कार में यह 63 डिग्री और सफेद कार में सिर्फ 44 डिग्री ही रहा. अगर इसे हमारे देश की गर्मी के लिहाज से देखें, तो समझ सकते हैं कि ब्लैक और गहरे रंग की गाड़ियां कितनी जल्दी गरम हो जाती हैं.

फीका नहीं पड़ता सफेद रंग

अगर आपकी गाड़ी ज्यादा देर तक सीधी धूप में खड़ी रहती है तेज धूप की वजह से गाड़ी का रंग (Car Color) हल्का पड़ने लगता है. कई बार तो किसी एक हिस्से का रंग उड़कर धब्बे जैसा दिखने लगता है, जो देखने में बहुत खराब लगता है. वहीं अगर गाड़ी सफेद रंग की हो तो ये समस्या काफी कम होती है. यहां तक कि अगर रंग थोड़ा उड़े भी, तो दूर से आसानी से नजर नहीं आता.

आसानी से स्क्रैच नजर नहीं आता 

जब गाड़ी में खरोंच लगती है तो रंग के हिसाब से फर्क दिखता है. काली या गहरे रंग की गाड़ियों में हल्की-सी स्क्रैच भी साफ नजर आ जाती है. लेकिन सफेद रंग की गाड़ियों में ये उतना ज्यादा दिखाई नहीं देता. छोटे-मोटे स्क्रैच तो आप आराम से इग्नोर कर सकते हैं अगर गाड़ी सफेद हो तो.

पेंटिंग में भी बचत

सफेद गाड़ी रखना जेब पर भारी नहीं पड़ता. अगर आपको कभी पेंट करवाना पड़े, तो इसका खर्च भी कम आता है. वजह ये है कि सफेद एक कॉमन कलर है, जो हर जगह आसानी से मिल जाता है. लेकिन अगर गाड़ी का रंग (Car Color) कुछ अलग हो, जैसे बेज या कोई स्पेशल शेड जो कंपनी से बनवाया गया हो, तो उसे पेंट करवाना काफी झंझट वाला काम बन जाता है. हां, अगर आपने मैट व्हाइट गाड़ी हो, तो उसका पेंट करवाना महंगा और थोड़ा मुश्किल जरूर होगा. लेकिन नॉर्मल सफेद गाड़ी के साथ ये टेंशन नहीं रहती.

रीसेल वैल्यू भी बढ़िया मिलेगी

अगर आप किसी भी चौराहे पर खड़े होकर गाड़ियों पर नजर डालेंगे, तो 10 में से 7 गाड़ियां आपको सफेद रंग की ही दिखेंगी. इसकी वजह है कि व्हाइट कलर की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है. इसलिए जब भी आप अपनी सफेद गाड़ी बेचने निकलेंगे, तो उसकी कीमत भी आपको अच्छे से मिल जाएगी. क्योंकि ये रंग लोगों को खूब पसंद आता है. वहीं, अगर आपकी गाड़ी काले या किसी और रंग की है, तो सही खरीदार ढूंढने में थोड़ा टाइम लग सकता है. वजह ये है कि गर्मी और बाकी कारणों से डार्क कलर हर किसी को नहीं भाता.

अब आंकड़े भी यही बताते हैं कि सफेद रंग नंबर वन चॉइस है. BASF Colour Report 2024 के हिसाब से 2024 में 49% लोगों ने सफेद गाड़ी खरीदी, यानी लगभग आधी गाड़ियां. दूसरी तरफ ब्लैक रंग सिर्फ 18% लोगों ने चुना. फायदे-नुकसान दोनों साफ हैं. आखिर में फैसला आपको करना है कि कॉमन लेकिन डिमांडेड सफेद गाड़ी लेनी है या फिर कोई अलग-सा यूनिक कलर.

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Published by: Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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