मैकेनिक नहीं बताएगा ये बातें... सिर्फ इतने दिनों पर बदलें इंजन ऑयल, बढ़ जाएगा बाइक का माइलेज

क्या आपका मैकेनिक बार-बार इंजन ऑयल बदलने को कहता है? यह आर्टिकल आपको बताएगा कि असली में बाइक का मोबिल कब बदलना चाहिए. सही समय पर मोबिल बदलवाकर आप अपने पैसे बचा सकते हैं और अपनी बाइक का माइलेज और इंजन की उम्र भी बढ़ा सकते हैं.

क्या आपकी बाइक भी हर 1500 या 2000 किलोमीटर चलने के बाद भारी लगने लगती है. जब भी आप लोकल मैकेनिक के पास जाते हैं, तो वह सीधा एक ही बात कहता है - "भैया, इंजन ऑयल (मोबिल) पुराना हो गया है, इसे तुरंत बदलवा लो वरना इंजन सीज हो जाएगा." क्या सच में इतनी जल्दी मोबिल बदलने की जरूरत होती है. जवाब है - बिल्कुल नहीं. कई बार मैकेनिक अक्सर अपने मुनाफे के लिए आपको जल्दी-जल्दी ऑयल बदलने की सलाह देते हैं. अगर आप सही समय पर इंजन ऑयल बदलेंगे, तो न सिर्फ आपके पैसे बचेंगे, बल्कि आपकी बाइक का माइलेज और इंजन की उम्र भी बढ़ जाएगी.

मोबिल कब और कितने दिनों में बदलना चाहिए?

बाइक का मोबिल बदलने का कोई एक फिक्स नियम नहीं होता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी बाइक कितनी चली है और आप उसमें किस क्वालिटी का इंजन ऑयल इस्तेमाल कर रहे हैं.

मिनरल ऑयल (सस्ता और नॉर्मल तेल): अगर आपकी बाइक में साधारण मिनरल ऑयल पड़ता है, तो इसे 2500 से 3000 किलोमीटर चलाने के बाद बदलें.

सेमी-सिंथेटिक ऑयल (मध्यम रेंज): इस तेल की लाइफ थोड़ी बेहतर होती है. इसे 4000 से 5000 किलोमीटर के बीच बदलना चाहिए.

फुल्ली-सिंथेटिक ऑयल (प्रीमियम तेल): यह सबसे बेस्ट क्वालिटी का तेल होता है. इसे आप 7000 से 10,000 किलोमीटर तक आराम से चला सकते हैं.

दिनों के हिसाब से देखें, तो अगर आपकी बाइक बहुत कम चलती है, तब भी साल में कम से कम 2 बार (हर 6 महीने पर) मोबिल जरूर बदलवा लेना चाहिए.

इंजन ऑयल, किलोमीटर और माइलेज का गणित

ऑयल का प्रकार (Engine Oil Type)कितने KM पर बदलेंकितने दिनों में बदलेंमाइलेज और इंजन पर असर
मिनरल ऑयल2,500 - 3,000 km3 से 4 महीनेरोजाना छोटी दूरी की राइड के लिए सही
सेमी-सिंथेटिक4,000 - 5,000 km5 से 6 महीनेस्मूथ पिकअप और बेहतर माइलेज
फुल्ली-सिंथेटिक7,000 - 10,000 km8 से 12 महीनेटॉप परफॉर्मेंस, लंबा इंजन लाइफ

सही समय पर मोबिल बदलने से माइलेज कैसे बढ़ता है?

इंजन ऑयल आपकी बाइक के इंजन के लिए खून की तरह काम करता है. जब आप सही समय पर तेल बदलते हैं, तो इंजन के अंदरूनी पार्ट्स (पिस्टन और गियर) बिना किसी घर्षण के आसानी से घूमते हैं. इससे इंजन को कम ताकत लगानी पड़ती है और पेट्रोल की खपत अपने आप घट जाती है.

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पुराना या जला हुआ मोबिल इंजन में गाढ़ा हो जाता है, जिससे इंजन गरम होने लगता है और बाइक का माइलेज 20% तक गिर जाता है.

मैकेनिक के बहकावे में न आएं, खुद ऐसे चेक करें मोबिल

गेज स्टिक से चेक करें: बाइक के इंजन में लगी तेल की डंडी निकालें और उसे साफ कपड़े से पोंछें. फिर वापस डालकर देखें. अगर तेल काले रंग का हो गया है और उसमें चिपचिपाहट खत्म हो गई है, तभी उसे बदलें.

इंजन की आवाज सुनें: जब मोबिल खराब होता है, तो इंजन से अजीब सी भारी आवाज आने लगती है और बाइक स्टार्ट होने में नखरे करती है.

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मोबिल फिल्टर (Mobil Filter) बदलना भी है बेहद जरूरी

बहुत से लोग बाइक सर्विस कराते समय सिर्फ इंजन ऑयल बदलवा लेते हैं और ऑयल फिल्टर को नजरअंदाज कर देते हैं. यह सबसे बड़ी गलती है. पुराना ऑयल फिल्टर गंदगियों और बारीक धातु के कणों से भरा होता है. जब आप नया मोबिल डालते हैं, तो पुराने फिल्टर में जमा कचरा नए तेल में मिलकर उसे तुरंत गंदा कर देता है. 

इससे नए तेल की लाइफ आधी हो जाती है और इंजन को पूरी तरह से सेफ्टी नहीं मिल पाती. इसलिए हर बार मोबिल बदलते समय या हर दूसरी सर्विस पर 40 से 50 रुपये का नया ऑयल फिल्टर जरूर लगवाएं. इससे नया इंजन ऑयल लंबे समय तक साफ रहेगा, बाइक की चाल मक्खन जैसी स्मूथ होगी और माइलेज में भी सीधा सुधार देखने को मिलेगा.

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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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