मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे (5 जून) से पहले देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार पेश कर दी है. ये WagonR पर बेस्ड है. इस नए वर्जन में WagonR अब E85 फ्यूल पर चल सकती है. यानी ऐसा पेट्रोल जिसमें 85% तक इथेनॉल मिला होता है. यह कदम भारत को ट्रेडिशनल फ्यूल से हटकर ज्यादा साफ और एनवायरनमेंट-फ्रेंडली ऑप्शन की ओर ले जाने की दिशा में काफी जरूरी माना जा रहा है. इस लॉन्च इवेंट में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद रहे.
WagonR Flex-Fuel का एक्सटीरियर
WagonR Flex-Fuel का एक्सटीरियर लगभग E20 वर्जन जैसा ही दिखता है. बस पीछे की तरफ एक छोटा सा ‘Flex-Fuel’ बैज इसे अलग पहचान देता है. इसका वही पुराना और भरोसेमंद टॉल-बॉय डिजाइन मिलता है. फ्रंट में चौड़ी ग्रिल के साथ शार्प साइड की हेडलाइट्स दी गई हैं. वहीं नीचे का बंपर और बड़ा एयर इनटेक इसे थोड़ा मस्कुलर फील देते हैं.
साइड से देखें तो इसकी बॉक्सी शेप साफ दिखती है, जो खास तौर पर ज्यादा केबिन स्पेस और आसान एंट्री-एग्जिट के लिए बनाई गई है. लंबी रूफलाइन, बड़े विंडो एरिया और सिंपल बॉडी लाइन्स इसे काफी खुला और एरियल लुक देते हैं. कुछ वेरिएंट्स में ब्लैक्ड-आउट पिलर्स फ्लोटिंग रूफ का इफेक्ट भी देते हैं. पीछे की तरफ वर्टिकल टेललाइट्स और सीधा सा टेलगेट देखने को मिल जाते हैं. वहीं बड़ा खुलने वाला डिक्की डेली यूज को और भी आसान बना देता है.
WagonR Flex-Fuel का इंटीरियर
जैसे बाहर से, वैसे ही अंदर से भी flex-fuel WagonR में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. केबिन के अंदर डुअल-टोन थीम दी गई है. इसमें 7-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम मिलता है. साथ में चार स्पीकर वाला ऑडियो सेटअप भी दिया गया है. ड्राइविंग को और आसान बनाने के लिए स्टीयरिंग-माउंटेड कंट्रोल्स भी मिलते हैं. इससे जरूरी फंक्शन्स को बिना हाथ हटाए कंट्रोल किया जा सकता है. जहां तक प्रैक्टिकलिटी की बात है, तो इसका 355 लीटर का बड़ा बूट स्पेस इसे रोजमर्रा की जरूरतों के लिए और भी काम का बना देता है.
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Flex-Fuel कार क्या है?
फ्लेक्स-फ्यूल कार को आप एक स्मार्ट और भविष्य के लिए तैयार टेक्नोलॉजी वाली गाड़ी समझ सकते हैं. इसमें ऐसा इंजन होता है जो सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिक्सचर पर भी आसानी से चल सकता है. भारत में ज्यादातर गाड़ियां अभी E20 फ्यूल यानी 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल के हिसाब से तैयार की जाती हैं. लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी इससे एक कदम आगे है. इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह ज्यादा हाई इथेनॉल ब्लेंड पर भी काम कर सके. यहां तक कि E100 यानी पूरी तरह शुद्ध इथेनॉल पर भी चलने की कैपेबिलिटी रखती है.
फ्लेक्स-फ्यूल कार को प्रैक्टिकल बनाने के लिए इसके इंटरनल सिस्टम में बड़े बदलाव करने पड़ते हैं. वजह यह है कि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में ज्यादा जंग लगाने वाला होता है और हवा से नमी भी जल्दी सोख लेता है. इससे नॉर्मल फ्यूल टैंक और पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मारुति के फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप में नए डिजाइन के फ्यूल इंजेक्टर, ज्यादा मजबूत फ्यूल लाइनें और टिकाऊ सील्स का यूज किया गया है. इसके साथ ही इंजन मैनेजमेंट सिस्टम को भी खास तरीके से ट्यून किया गया है, ताकि यह इथेनॉल के अलग गुणों को बिना किसी परेशानी के आसानी से संभाल सके.
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