10 मिनट में तय की 40 KM... उत्तराखंड के एक युवा ने बनाई उड़ने वाली कार, पहली उड़ान का देखें वीडियो

उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रवि टम्टा ने बनाई एक अनोखी 1-सीट वाली इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार, HAPIDA SKYNeX. यह कार 40 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 10-15 मिनट में तय कर सकती है. पहाड़ी इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है यह तकनीक. देखें पहली उड़ान का वीडियो.

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के काफलिखान गांव के एक इनोवेटर रवि टम्टा ने अपने स्टार्टअप हैपिडा स्काइड (HAPIDA SKYNeX) के तहत विकसित एक सीट वाले इलेक्ट्रिक फ्लाइंग कार के प्रोटोटाइप का परीक्षण किया है. हैपिडा स्काईनेक्स नाम वाली यही मशीन मोडीफाइड टेक्निक पर बेस्ड है और सोशल मीडिया पर इसकी पहली उड़ान का वीडियो आने के बाद से ही चर्चा शुरू हो गई है. आइए इस उड़ने वाली कार के बारे में हम आपको इस आर्टिकल में विस्तार से जानकारी देते हैं.

माउन्टेन कनेक्टिविटी बढ़ाने की तरफ जोर 

स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फ्लाइंग कार को बनाने वाले तामता का कहना है कि मेरे अंदर यह आइडिया पहाड़ों में रहने वाले कई लोगों की एक आम समस्या के बाद आया है. उनके गांव से घर तक के बीच लगभग 40 किलोमीटर की सड़क यात्रा में करीब डेढ़ घंटे यानि 90 मिनट का समय लग जाता है. ऐसे में उनके इस आइडिया से इतनी ही दूरी सिर्फ 10 से 15 मिनट में तय की जा सकती है. 

अल्मोड़ा के खुले मैदान में इस फ्लाइंग कार का सफल टेस्ट किया गया, जिसमें टम्टा और उसकी टीम ने अर्ली एवोल्यूशन किया. वे कई सालों की मेहनत और एक्सपेरीमेंट्स के बाद ऐसा करने में सफल हुए, जिसने मौजूदा ड्रोन टेक्निक को डेवलप करके एक व्यक्ति को ले जाने में कैपेबल शामिल है. 

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रवि टम्टा ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि उनके लिए यह बहुत बड़ा दिन है.  हैपिडा स्काईनेक्स की पहली सबसे सफल उड़ान लंबे समय के एक्सपेरीमेंट्स, मेहनत और लगातार किए गए प्रयासों का रिजल्ट है. इसके लिए कई स्तरों पर प्रयोग किए गए और तकनीक को बेहतर बनाने के बाद इस प्रोटोटाइप को तैयार किया गया. 

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इलेक्ट्रिक पावरट्रेन और डिजाइन 

HAPIDA SKYNeX को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन के रूप में डिजाइन किया गया है. हालांकि, बैटरी क्षमता, उड़ान का समय, स्पीड, वजन और चार्जिंग टाइम सहित डेवलप टेक्निक की जानकारी अभी तक रिविल नहीं हुई है. ऐसा माना जा रहा है कि प्रोटोटाइप में ड्रोन टेक्निक से इंस्पायर्ड एक कॉम्पैक्ट मल्टी-रोटर व्यवस्था का उपयोग किया गया है. इसकी सिंगल सीट लेआउट टीम को अधिक लिफ्ट का भार और बैलेंस की बेसिक जरूरतों पर ध्यान खींचती है.

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HAPIDA SKYNeX का आगे क्या होगा?

यह पहली उड़ान टम्टा और हापिडा स्काई के लिए एक इंपोर्टेंट डेवलपमेंट है, लेकिन प्रोटोटाइप अभी भी शुरुआती चरण में है. अलग-अलग परिस्थितियों में इसकी स्थिरता, रिलायबिलिटी, सेफ्टी और परफॉर्मेंस के लिए आगे टेस्टिंग की जरूरत है. निजी हवाई वाहन को नियमित पथ के लिए उपयोग करने से पहले नियामक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.




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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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