टेस्ला साइबरट्रक का वेड मोड बना मुसीबत, झील में फंसी लाखों की EV, अब फीचर पर उठ रहे सवाल

टेस्ला साइबरट्रक का चर्चित वेड मोड फीचर टेक्सास में फिर विवादों में आ गया. झील में फंसी लाखों की EV के बाद अब लोग इसकी असली क्षमता और सुरक्षा सीमाओं पर सवाल उठा रहे हैं.

इलेक्ट्रिक पिकअप ट्रक की दुनिया में टेस्ला साइबरट्रक को भविष्य की गाड़ी माना जाता है, लेकिन हाल ही में अमेरिका के टेक्सास में हुई एक घटना ने इसके चर्चित ‘वेड मोड’ फीचर पर बहस छेड़ दी है. एक ड्राइवर ने साइबरट्रक को झील में उतारकर उसकी पानी में चलने की क्षमता टेस्ट करने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही देर में ट्रक बंद हो गया और रेस्क्यू टीम बुलानी पड़ी. यह पहली बार नहीं है जब साइबरट्रक पानी में फंसने की वजह से खबरों में आया हो. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ‘वेड मोड’ वास्तव में कितना सुरक्षित है और क्या लोग इस फीचर को गलत तरीके से समझ रहे हैं.

क्या है साइबरट्रक का ‘वेड मोड’ फीचर?

टेस्ला ने साइबरट्रक में ‘वेड मोड’ नाम का खास ऑफ-रोड फीचर दिया है. इसका मकसद गाड़ी को उथले पानी, छोटे नदी-नालों या जलभराव वाले रास्तों से निकालने में मदद करना है. इस मोड को ऑन करने पर ट्रक की राइड हाइट बढ़ जाती है और बैटरी पैक को प्रेसराइज किया जाता है ताकि पानी अंदर न जा सके.

हालांकि कंपनी की आधिकारिक गाइडलाइन के मुताबिक यह फीचर केवल सीमित गहराई तक ही सुरक्षित माना गया है. टेस्ला ने अधिकतम करीब 32 इंच यानी 815 मिमी तक पानी में इस्तेमाल की सलाह दी है. इससे ज्यादा गहराई या खराब सतह वाली जगह पर वाहन फंस सकता है.

टेस्ला साइबरट्रक पानी में फंसा / फोटो ग्रेपवाइन पुलिस के एक्स हैंडल से

टेक्सास में क्या हुआ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक टेक्सास के ग्रेपवाइन लेक में एक ड्राइवर ने साइबरट्रक का वेड मोड टेस्ट करने के लिए गाड़ी को पानी में उतार दिया. शुरुआत में ट्रक आगे बढ़ता दिखा, लेकिन कुछ देर बाद वाहन पानी में फंस गया और बंद हो गया. हालात ऐसे बने कि फायर डिपार्टमेंट की मदद से ट्रक को बाहर निकालना पड़ा.

दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले कैलिफोर्निया में भी इसी तरह का मामला सामने आ चुका है. वहां भी साइबरट्रक पानी में फंस गया था और पुलिस टीम को रेस्क्यू करना पड़ा था. लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सोशल मीडिया पर इस फीचर की विश्वसनीयता को लेकर बहस तेज कर दी है.

फीचर से ज्यादा उम्मीदें बन रही हैं समस्या?

टेस्ला और एलन मस्क के पुराने दावों की वजह से कई लोग साइबरट्रक को लगभग “पानी में चलने वाली गाड़ी” मान बैठे हैं. लॉन्च से पहले एलन मस्क ने कहा था कि साइबरट्रक थोड़े समय के लिए नाव जैसी क्षमता दिखा सकता है. यही बात कई ग्राहकों की उम्मीदें बढ़ाने का कारण बनी.

लेकिन असलियत यह है कि वेड मोड कोई एम्फीबियस सिस्टम नहीं है. किसी वाहन को सच में पानी में चलाने के लिए सील्ड ड्राइवट्रेन, फ्लोटेशन डिजाइन और पूरी तरह वाटरप्रूफ इलेक्ट्रॉनिक्स की जरूरत होती है. साइबरट्रक में ऐसा कोई सिस्टम नहीं दिया गया है.

वारंटी में भी नहीं मिलेगा फायदा

सबसे अहम बात यह है कि टेस्ला की वारंटी पॉलिसी पानी से होने वाले नुकसान को कवर नहीं करती. यानी अगर ड्राइवर गलत अंदाजे में गाड़ी को गहरे पानी में ले जाता है और नुकसान होता है, तो उसका खर्च खुद उठाना पड़ सकता है.

कंपनी की गाइडलाइन में यह भी साफ लिखा गया है कि पानी की गहराई और नीचे की सतह का अंदाजा लगाना पूरी तरह ड्राइवर की जिम्मेदारी है. कीचड़ या नरम जमीन की वजह से वाहन नीचे धंस सकता है, जिससे पानी का स्तर अचानक बढ़ जाता है.

ऑफ-रोड फीचर या मार्केटिंग हाइप?

ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि वेड मोड अपने तय दायरे में उपयोगी फीचर है, लेकिन इसे लेकर बनी “सुपर EV” वाली इमेज कई बार ग्राहकों को जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर रही है. यही वजह है कि लोग सोशल मीडिया वीडियो और वायरल पोस्ट देखकर ऐसी परिस्थितियों में ट्रक ले जा रहे हैं जहां सामान्य SUV भी नहीं जाती.

भारत समेत दुनियाभर में इलेक्ट्रिक ऑफ-रोड व्हीकल्स का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन यह घटना दिखाती है कि किसी भी एडवांस फीचर की असली सीमा समझना उतना ही जरूरी है जितना उसका इस्तेमाल करना.

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Published by: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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