भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटर्स अब सिर्फ ट्रेंड नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत बनते जा रहे हैं. बढ़ती पेट्रोल कीमतों और कम रनिंग कॉस्ट की वजह से बड़ी संख्या में लोग ई-स्कूटर की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं. लेकिन ज्यादातर यूजर्स की सबसे बड़ी चिंता एक ही रहती है- एक बार चार्ज करने पर स्कूटर कितनी दूर चलेगा. कई बार बैटरी क्षमता से ज्यादा फर्क राइडिंग स्टाइल और छोटी-छोटी आदतों से पड़ता है. सही तरीके से स्कूटर चलाकर और कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखकर आप अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं.
तेज एक्सेलरेशन बैटरी जल्दी खत्म करता है
इलेक्ट्रिक स्कूटर में अचानक तेज एक्सेलरेशन देने से मोटर पर ज्यादा दबाव पड़ता है और बैटरी तेजी से डिस्चार्ज होती है. अगर आप स्मूद तरीके से धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाते हैं, तो स्कूटर कम ऊर्जा खर्च करता है. शहर के ट्रैफिक में ईको मोड का इस्तेमाल करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. ज्यादातर ई-स्कूटर्स में ईको, नॉर्मल और स्पोर्ट मोड मिलते हैं, जिनमें ईको मोड बैटरी बचाने में सबसे ज्यादा मदद करता है.
टायर प्रेशर सही रखना बेहद जरूरी
कम हवा वाले टायर सड़क पर ज्यादा घर्षण पैदा करते हैं, जिससे मोटर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसका सीधा असर बैटरी रेंज पर पड़ता है. अगर आप चाहते हैं कि आपका स्कूटर हर चार्ज पर ज्यादा दूरी तय करे, तो टायर प्रेशर नियमित रूप से चेक करना जरूरी है. सही प्रेशर न सिर्फ रेंज बढ़ाता है बल्कि स्कूटर की स्टेबिलिटी भी बेहतर बनाता है.
ज्यादा वजन मोटर पर डालता है दबाव
हर इलेक्ट्रिक स्कूटर की एक तय वजन क्षमता होती है. जरूरत से ज्यादा वजन या लगातार डबल राइडिंग करने से बैटरी जल्दी खत्म होती है. भारी बैग या अतिरिक्त सामान भी मोटर की एफिशिएंसी कम कर सकता है. इसलिए कोशिश करें कि स्कूटर पर सिर्फ जरूरी सामान ही रखें. कम वजन होने पर स्कूटर ज्यादा स्मूद चलता है और बेहतर रेंज देता है.
रीजेनरेटिव ब्रेकिंग का सही इस्तेमाल करें
कई नये इलेक्ट्रिक स्कूटर्स में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग फीचर दिया जाता है. इसमें ब्रेक लगाने के दौरान थोड़ी ऊर्जा वापस बैटरी में भेजी जाती है. हालांकि इससे बहुत ज्यादा चार्ज नहीं बढ़ता, लेकिन लंबे समय में यह मददगार साबित होता है. अचानक ब्रेक लगाने के बजाय धीरे-धीरे स्पीड कम करने से यह सिस्टम ज्यादा बेहतर तरीके से काम करता है.
बैटरी चार्जिंग की गलत आदतें घटा सकती हैं रेंज
बैटरी हेल्थ का सीधा असर स्कूटर की रेंज पर पड़ता है. बैटरी को बार-बार पूरी तरह खत्म होने देना सही नहीं माना जाता. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रोजमर्रा के इस्तेमाल में बैटरी को 20% से 80% के बीच रखना बेहतर होता है. जरूरत पड़ने पर 100% चार्ज किया जा सकता है, लेकिन हर बार फुल चार्ज करने से लंबी अवधि में बैटरी पर असर पड़ सकता है. हमेशा कंपनी का ओरिजिनल चार्जर इस्तेमाल करना चाहिए.
रास्ते की प्लानिंग भी बचा सकती है बैटरी
अगर आप पहले से अपना रूट तय कर लें, तो बैटरी की काफी बचत हो सकती है. ज्यादा ट्रैफिक, खराब सड़कें और लगातार चढ़ाई वाले रास्ते बैटरी जल्दी खत्म करते हैं. कोशिश करें कि स्मूद और कम ट्रैफिक वाले रास्तों का इस्तेमाल करें. कई नेविगेशन ऐप अब ट्रैफिक और सड़क की स्थिति की जानकारी भी देते हैं, जिससे बैटरी बचाने में मदद मिल सकती है.
स्कूटर की सर्विस और सॉफ्टवेयर अपडेट भी जरूरी
सिर्फ बैटरी ही नहीं, पूरे स्कूटर की अच्छी कंडीशन रेंज को प्रभावित करती है. समय-समय पर सर्विस कराने, ब्रेक्स साफ रखने और ढीले पार्ट्स को ठीक कराने से स्कूटर बेहतर प्रदर्शन करता है. कई कंपनियां सॉफ्टवेयर अपडेट भी देती हैं, जिनसे बैटरी मैनेजमेंट और एफिशिएंसी बेहतर हो सकती है. इसलिए स्कूटर के ऐप या सर्विस सेंटर के जरिये अपडेट चेक करते रहना चाहिए.
छोटी आदतें बढ़ा सकती हैं बड़ा फायदा
दिन में जरूरत न होने पर हेडलाइट, ब्लूटूथ या मोबाइल चार्जिंग जैसे फीचर्स बंद रखने से भी थोड़ी बैटरी बचाई जा सकती है. लगातार तेज रफ्तार और हार्ड ब्रेकिंग से बचना भी जरूरी है. स्मूद राइडिंग स्टाइल अपनाकर आप हर चार्ज पर ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं.
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