बार-बार रिजर्व मोड में चलाते हैं बाइक? इंजन से लेकर माइलेज तक पर पड़ सकता है असर, जानें नुकसान

क्या आप भी अपनी बाइक को अक्सर पेट्रोल खत्म होने पर ही पेट्रोल पंप ले जाते हैं? यह छोटी-सी लापरवाही आपके बाइक के फ्यूल सिस्टम और इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है. इस आर्टिकल में जानें कि बार-बार रिजर्व मोड पर बाइक चलाने से आपको किस तरह के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.

मोटरसाइकिल का इस्तेमाल लोग डेली कम्यूट के लिए करते हैं. ऑफिस, कॉलेज से लेकर की कामों में इस दोपहिया वाहन का यूज होता है. लेकिन कई बार लोग बाइक के साथ गलत करते हैं. अक्सर लोग पेट्रोल खत्म होने पर ही पेट्रोल पंप का रुख करते हैं और बाइक को लगातार रिजर्व मोड पर चलाते रहते हैं. यह छोटी-सी लापरवाही आपकी बाइक के फ्यूल सिस्टम और इंजन को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. अगर आप भी बार-बार रिजर्व में गाड़ी चलाते हैं, तो आपको कि तरह के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.

फ्यूल पंप का जलना या खराब होना

आधुनिक बीएस6 (BS6) बाइकों में फ्यूल इंजेक्शन (FI) सिस्टम होता है, जिसका फ्यूल पंप पेट्रोल टैंक के अंदर ही लगा होता है. यह पंप पेट्रोल में डूबा रहकर ही ठंडा रहता है. जब टैंक में पेट्रोल बहुत कम होता है, तो पंप ओवरहीट होने लगता है. लगातार रिजर्व में चलाने से फ्यूल पंप जल सकता है, जिसे बदलने में बड़ा खर्च आता है.

कारब्यूरेटर और फ्यूल इंजेक्टर में कचरा फंसना

पेट्रोल टैंक के निचले हिस्से में धीरे-धीरे गंदगी, धूल और नमी जमा हो जाती है. जब बाइक रिजर्व में चलती है, तो फ्यूल लाइन टैंक के सबसे निचले हिस्से से पेट्रोल खींचती है. इसके साथ जमी हुई गंदगी भी कारब्यूरेटर या इंजेक्टर तक पहुंच जाती है, जिससे नोजल ब्लॉक हो जाता है और बाइक मिसिंग करने लगती है.

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इंजन की परफॉर्मेंस और माइलेज में गिरावट

कचरा और हवा मिलने के कारण इंजन को सही मात्रा में साफ फ्यूल नहीं मिल पाता. इससे फ्यूल और एयर का मिक्सचर बिगड़ जाता है. स्पार्क प्लग पर असर पड़ता है, जिससे बाइक बार-बार बंद होने लगती है, पिकअप कम हो जाता है और माइलेज में भी गिरावट आती है.

टैंक के अंदर जंग लगना

टैंक खाली रहने पर उसमें खाली जगह बनती है, जहां हवा की नमी जमा होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है. यह नमी लोहे के टैंक में अंदर से जंग लगाना शुरू कर देती है. यह जंग पेट्रोल में मिलकर पूरे फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचाती है और टैंक को भी गला सकती है.

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इस बात का रखें ध्यान 

बाइक को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने के लिए टैंक में हमेशा कम से कम 20 से 30 प्रतिशत पेट्रोल जरूर बनाए रखें. इससे टैंक सूखेगा नहीं और फिर आपको ऐसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. 


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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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