Pure Petrol, E10 या E20? जानें आपकी कार के लिए कौन-सा पेट्रोल सही और सरकार तीनों विकल्प क्यों नहीं दे सकती

E10 और E20 पेट्रोल का आपकी कार के माइलेज, इंजन और खर्च पर क्या असर पड़ता है? जानिए सरकार क्यों E20 को बढ़ावा दे रही है और पेट्रोल पंप तीनों ग्रेड एक साथ क्यों नहीं रख सकते.

अगर आपने हाल ही में पेट्रोल पंप पर E10 और E20 लिखा देखा है और समझ नहीं पाए हैं कि कौन-सा पेट्रोल आपकी गाड़ी के लिए सही है, तो आप अकेले नहीं हैं. भारत में ईंधन नीति तेजी से बदल रही है और इसका असर कार, बाइक और स्कूटर चलाने वाले हर व्यक्ति पर पड़ने वाला है. सवाल यह नहीं है कि E20 बेहतर है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या देश एक साथ Pure Petrol, E10 और E20 तीनों विकल्प उपलब्ध करा सकता है. सरकार का जवाब है- नहीं.

दरअसल, यह बदलाव सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है. इसके पीछे ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय, कच्चे तेल के आयात में कमी और प्रदूषण नियंत्रण जैसी बड़ी नीतियां जुड़ी हुई हैं. इसलिए आने वाले समय में वाहन मालिकों के लिए यह समझना जरूरी होगा कि E10 और E20 का मतलब क्या है और इनका उनकी गाड़ी पर क्या असर पड़ेगा.

E10 और E20 आखिर हैं क्या?

E10 में 10% एथेनॉल और 90% पेट्रोल होता है, जबकि E20 में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है. एथेनॉल गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है और सरकार इसे पेट्रोल में मिलाकर आयातित तेल पर निर्भरता कम करना चाहती है.

नई पीढ़ी की अधिकांश गाड़ियां E20 के अनुरूप डिजाइन की जा रही हैं, लेकिन अप्रैल 2023 से पहले बिके कई वाहन मूल रूप से E10 के लिए बने थे. यही वजह है कि कई वाहन मालिकों के मन में चिंता है कि क्या E20 उनके इंजन के लिए सुरक्षित रहेगा.

क्या E20 से माइलेज कम होगा?

सरकार मानती है कि कुछ वाहनों में 3-5% तक माइलेज कम हो सकता है. एथेनॉल की ऊर्जा घनत्व पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, इसलिए समान दूरी तय करने के लिए थोड़ा अधिक ईंधन लग सकता है. हालांकि सरकार का कहना है कि माइलेज ही प्रदर्शन का एकमात्र पैमाना नहीं है.

E20 के संभावित फायदे

सरकारी दावा

  • उच्च ऑक्टेन स्तर
  • बेहतर एंटी-नॉक क्षमता
  • तेज और स्मूद एक्सेलरेशन
  • कम उत्सर्जन
  • इंजन का अधिक स्थिर संचालन

फिर तीनों तरह का पेट्रोल क्यों नहीं मिलेगा?

यही सबसे बड़ा सवाल है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत में 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप, रिफाइनरी, डिपो, पाइपलाइन और टर्मिनल जुड़े हुए हैं. अगर हर जगह Pure Petrol, E10 और E20 अलग-अलग स्टॉक किया जाए, तो:

सप्लाई चेन बेहद जटिल हो जाएगी स्टोरेज और हैंडलिंग लागत बढ़ जाएगी इन्वेंटरी मैनेजमेंट मुश्किल हो जाएगा ऑपरेशनल दक्षता घट जाएगी

सरकार का तर्क है कि इतने बड़े नेटवर्क में कई ग्रेड का पेट्रोल एक साथ बनाए रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है.

सरकार E20 पर इतना जोर क्यों दे रही है?

एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम में अब तक करीब 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है. यह पैसा एथेनॉल उत्पादन, डिस्टिलरी और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च हुआ है. अगर देश फिर से कम एथेनॉल मिश्रण की ओर लौटता है, तो यह निवेश प्रभावित हो सकता है.

इसके अलावा सरकार का कहना है कि E20 से:

कच्चे तेल का आयात घटेगा कार्बन उत्सर्जन कम होगा गन्ना किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी.

पुरानी गाड़ियों के मालिक क्या करें?

अगर आपकी कार या बाइक अप्रैल 2023 से पहले की है, तो सबसे पहले ओनर मैनुअल देखें. कई निर्माता E20 के उपयोग के बारे में स्पष्ट जानकारी दे रहे हैं.

ये सावधानियां रखें

सर्विस शेड्यूल नियमित रखें फ्यूल फिल्टर समय पर बदलें अगर निर्माता ने E20 को मंजूरी दी है, तो अलग से चिंता की जरूरत नहीं माइलेज में मामूली बदलाव सामान्य हो सकता है.

अंत में जानिए आपके लिए सही विकल्प क्या है?

अगर आपकी गाड़ी नई है और निर्माता ने E20 को सपोर्ट किया है, तो E20 इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जा रहा है. पुरानी गाड़ियों के लिए ओनर मैनुअल और कंपनी की सलाह देखना सबसे बेहतर रहेगा. फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि भारत का ईंधन बाजार अब धीरे-धीरे E20 आधारित भविष्य की ओर बढ़ रहा है, और आने वाले वर्षों में यही मुख्य पेट्रोल ग्रेड बनने की संभावना है.


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लेखक के बारे में

Published by: Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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