भारत के तीन महाशक्तिशाली ड्रोन हार्पी, हेरॉन और रूस्तम, जानें कैसे करेगा दुश्मनों का सर्वनाश

Powerful Drones of India: भारत ने पाकिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू कर दिया है. जिससे पाकिस्तान बौखला उठा है. उसने आनन-फानन में भारत पर ड्रोन से हमला करना शुरू कर दिया है. जिसके जवाबी कार्रवाई में भारत भी अपने ड्रोन के जरिए पाकिस्तानी सेना को निशाना बना रहा है. आइए जानते हैं भारत के तीन महाशक्तिशाली ड्रोन के बारे में.

Powerful Drones of India: भारत के पहलगाम में 22 अप्रैल को पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए भारत ने 6 और 7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादियों के 9 ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था. जिससे पाकिस्तान बौखला गया और उसने आनन-फानन में भारत पर ड्रोन से हमला करना शुरू कर दिया. जिसका जबाव देते हुए भारत ने भी अपने महाशक्तिशाली ड्रोन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के होश फ़ाकता कर दिए हैं. आइए जानते हैं भारत के तीन महाशक्तिशाली ड्रोन के बारे में.

लड़ाकू ड्रोन क्या होता है

लड़ाकू ड्रोन मानव रहित हवाई वाहन (UAV) होते हैं. जिसे रिमोट के जरीये कंट्रोल किया जाता है. इसे कई सौ किमी की दूरी से भी ऑपरेट किया जा सकता है. आधुनिक समय के युद्ध में ड्रोन अहम भूमिका निभाता है. लड़ाकू ड्रोन में सेंसर और पेलोड होता है. जिसे कैमरा, रडार और हथियारों से लैस कर युद्ध के मैदान में इस्तेमाल किया जाता है.

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हार्पी ड्रोन बवाल है

हार्पी ड्रोन को इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है. जिसका इस्तेमाल भारत दुश्मनों पर हमले करने के साथ-साथ निगरानी के लिए कर रहा है. इस ड्रोन को खासकर दुश्मन के रडार सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम को नेस्तनाबूद करने के लिए बनाया गया है. हार्पी एंटी रेडिएशन सीकर से लैस है, जिसकी मदद से रेडिएशन के स्रोतों का आसानी से पता लगता है. यह ड्रोन 500 से 1000 किमी तक की दूरी तय कर सकता है और 185 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने भरने में सक्षम है.

इतना शक्तिशाली है हेरॉन

इजराइल निर्मित हेरॉन ड्रोन को हासिल कर भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है. यह इतना शक्तिशाली है कि इसका इस्तेमाल सर्जिकल स्ट्राइक तक में किया जा सकता है. अभी भारत से पास हेरॉन मार्क-2 है और यह करीब 32 हजार फुट की ऊंचाई पर एक बार में लगातार 24 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भर सकता है. इसकी अधिकतम  रेंज लगभग 3 हजार किमी है और यह अधिकतम 250 किलो तक वजन का ढ़ो सकता है.

रुस्तम ड्रोन का अलग ही जलवा है

भारतीय अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने फरवरी 2018 में रुस्तम ड्रोन का पहला सफल परीक्षण किया था. इसे टोही जैसे भूमिका के लिए बनाया गया है. अब इससे भी उन्नत लड़ाकू ड्रोन रुस्तम-2 ड्रोन को भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा है. यह 24 घंटे निगरानी और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. रुस्तम ड्रोन में पहिये लगें हुए हैं जिसके कारण इसे थल सेना, वायु सेना और नेवी तीनों को उपलब्ध कराया गया है.

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Published by: Rajveer singh

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