Petrol vs Electric: हीरो स्पलेंडर या ओला इलेक्ट्रिक, डेली यूज में कौन करवाएगा हजारों रुपये की बचत?

रोजाना आने-जाने के लिए पेट्रोल पर चलने वाली हीरो स्पलेंडर प्लस या ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर में से कौन बेहतर है? जानें कीमत, माइलेज, रनिंग कॉस्ट और मेंटेनेंस के आधार पर कौन आपके लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगी.

रोजाना आने-जाने के लिए नया टू-व्हीलर खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि पेट्रोल गाड़ी ली जाए या इलेक्ट्रिक स्कूटर. भारतीय बाजार में हीरो स्पलेंडर प्लस लंबे समय से लोगों की पहली पसंद बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ ओला इलेक्ट्रिक अपने S1 सीरीज के साथ इलेक्ट्रिक सेगमेंट में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. दोनों ही गाड़ियां अपनी-अपनी जगह पर बेस्ट हैं, लेकिन डेली यूज के लिए कौन-सी गाड़ी ज्यादा वैल्यू फॉर मनी साबित होगी, इसे समझना जरूरी है.

हीरो स्पलेंडर vs ओला: कीमत और वेरिएंट्स का अंतर

हीरो स्पलेंडर प्लस की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत लगभग 77,777 रुपये से शुरू होती है. यह बाइक अपनी कम शुरुआती कीमत और लंबे समय तक चलने के लिए जानी जाती है.

दूसरी तरफ, ओला के किफायती मॉडल Ola S1 X Gen 3 की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 89,999 रुपये से शुरू होकर वेरिएंट के आधार पर आगे बढ़ती है. यानी शुरुआती खरीदारी के बजट में दोनों के बीच ज्यादा बड़ा अंतर नहीं है.

हीरो स्पलेंडर vs ओला: रनिंग कॉस्ट

हीरो स्पलेंडर प्लस: यह पेट्रोल बाइक लगभग 60 से 70 किमी प्रति लीटर का माइलेज देती है. आज के पेट्रोल के दामों के हिसाब से इसे चलाने का खर्च लगभग 1.5 रुपये से 1.8 रुपये प्रति किलोमीटर आता है.

ओला इलेक्ट्रिक: इलेक्ट्रिक स्कूटर को घर पर चार्ज करने में बहुत कम बिजली खर्च होती है. इसे चलाने का खर्च लगभग 20 से 30 पैसे प्रति किलोमीटर आता है.

अगर आप रोज 30 से 40 किलोमीटर सफर करते हैं, तो ओला इलेक्ट्रिक से हर महीने फ्यूल के खर्च पर अच्छी बचत की जा सकती है.

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हीरो स्पलेंडर vs ओला: मेंटेनेंस और सर्विसिंग का फर्क

हीरो स्पलेंडर में पेट्रोल इंजन होता है, जिसमें स्पार्क प्लग, इंजन ऑयल, फिल्टर और चेन जैसे पार्ट्स होते हैं. इनकी समय-समय पर सर्विसिंग करानी पड़ती है. हालांकि स्पलेंडर के स्पेयर पार्ट्स काफी सस्ते मिलते हैं और किसी भी लोकल मेकैनिक से इसे ठीक कराया जा सकता है.

ओला इलेक्ट्रिक में इंजन ऑयल या गियर बदलने का झंझट नहीं होता, जिससे नॉर्मल मेंटेनेंस का खर्च बहुत कम रहता है. लेकिन इसके इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स या बैटरी में समस्या आने पर आपको कंपनी के सर्विस सेंटर पर ही निर्भर रहना पड़ता है.

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हीरो स्पलेंडर vs ओला: रेंज और चार्जिंग की सुविधा

हीरो स्पलेंडर में 9.8 लीटर का फ्यूल टैंक मिलता है. एक बार टैंक फुल कराने पर यह बाइक आसानी से 500 से 600 किलोमीटर तक चल सकती है. पेट्रोल खत्म होने पर 2 मिनट में दोबारा फ्यूल भरवाया जा सकता है.

वहीं, ओला इलेक्ट्रिक स्कूटर एक बार फुल चार्ज होने पर मॉडल के हिसाब से 100 से 150 किलोमीटर की रेंज देता है. इसे फुल चार्ज करने में 4 से 6 घंटे का समय लगता है. अगर आपको रोज बहुत लंबी दूरी तय करनी होती है या आपके पास चार्जिंग का सही इंतजाम नहीं है, तो इलेक्ट्रिक में थोड़ी परेशानी हो सकती है.

डेली यूज के लिए कौन-सा है बेस्ट?

अगर आपका डेली ट्रैवल 30 से 50 किलोमीटर के बीच है और आप अपने हर महीने के पेट्रोल का खर्च बचाना चाहते हैं, तो ओला इलेक्ट्रिक आपके लिए एक वैल्यू फॉर मनी ऑप्शन है.

लेकिन, अगर आपका काम ऐसा है जिसमें आपको रोजाना काफी लंबी दूरी तय करनी पडती है, चार्जिंग की जगह की कमी है, और आप एक ऐसी गाड़ी चाहते हैं जिसे सालों-साल बिना किसी बैटरी की चिंता के चलाया जा सके, तो हीरो स्पलेंडर प्लस आज भी सबसे भरोसेमंद और सही फैसला है.

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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