भारत में हाईवे यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में रुकने या बैरियर खुलने का इंतजार करने की जरूरत धीरे-धीरे खत्म हो सकती है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हरियाणा के घरौंडा टोल प्लाजा पर नई तकनीक आधारित मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोल प्रणाली शुरू कर दी है. इस सिस्टम में वाहन बिना रुके और बिना किसी भौतिक अवरोध के टोल पार कर सकेंगे, जबकि शुल्क अपने आप फास्टैग से कट जाएगा. यह पहल देश में स्मार्ट और डिजिटल हाईवे नेटवर्क की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
अब टोल पर नहीं लगेगी लंबी लाइन
नई एमएलएफएफ प्रणाली पारंपरिक टोल प्लाजा मॉडल से पूरी तरह अलग है. अभी तक टोल भुगतान के लिए वाहनों को निर्धारित लेन में आकर रुकना या धीमा होना पड़ता था. लेकिन नई व्यवस्था में वाहन सामान्य गति से आगे बढ़ सकेंगे. सड़क के ऊपर लगाए गए विशेष गैन्ट्री, कैमरे और सेंसर वाहन की पहचान करेंगे और टोल राशि स्वतः फास्टैग खाते से कट जाएगी.
इससे न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा बल्कि व्यस्त समय में टोल प्लाजा पर होने वाली भीड़ भी काफी हद तक घट सकती है.
कैसे काम करेगी नई तकनीक?
एमएलएफएफ सिस्टम में एडवांस इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन तकनीक का उपयोग किया गया है. हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और स्मार्ट सेंसर वाहनों की पहचान करते हैं. वाहन के फास्टैग और रजिस्ट्रेशन डिटेल्स को सिस्टम पढ़ता है और संबंधित शुल्क सीधे खाते से काट लिया जाता है.
पूरी प्रक्रिया कुछ सेकंड में पूरी हो जाती है और चालक को किसी तरह की अतिरिक्त कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं होती. इससे यात्रा अधिक सहज और समय बचाने वाली बन जाती है.
पहले भी कई जगह लागू हो चुकी है व्यवस्था
घरौंडा टोल प्लाजा इस तकनीक को अपनाने वाला पहला केंद्र नहीं है. इससे पहले गुजरात के चोरयासी, दिल्ली के मुंडका और राजस्थान के दौलतपुरा टोल प्लाजा पर भी मल्टी लेन फ्री फ्लो प्रणाली लागू की जा चुकी है.
इन परियोजनाओं से मिले अनुभव के आधार पर भविष्य में अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है. सरकार का लक्ष्य टोल भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और बाधारहित बनाना है.
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
नई टोल प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत के रूप में सामने आएगा. वाहन बिना रुके आगे बढ़ेंगे, जिससे ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है. इसके अलावा अचानक ब्रेक लगाने और लेन बदलने जैसी स्थितियां कम होने से सड़क सुरक्षा में भी सुधार होने की उम्मीद है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू किया गया तो देशभर में हाईवे यात्रा का अनुभव काफी बेहतर हो सकता है.
इन बातों का रखें ध्यान
एनएचएआई ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि उनका फास्टैग सक्रिय हो और उसमें पर्याप्त बैलेंस मौजूद रहे. साथ ही फास्टैग को वाहन की विंडशील्ड पर सही स्थान पर लगाया जाए. हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) का उपयोग भी जरूरी है, ताकि कैमरे और सेंसर वाहन की पहचान सही तरीके से कर सकें.
डिजिटल टोलिंग की यह नई व्यवस्था आने वाले वर्षों में भारत के हाईवे नेटवर्क को और अधिक स्मार्ट, तेज और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है.
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