1993 में लॉन्च हुई थी इंडिया की पहली इलेक्ट्रिक कार, नाम ऐसा कि सुनते ही चेहरे पर आ जाएगी मुस्कान

90s में जब EV का नाम भी नया था, तब Lovebird ने भारत में इलेक्ट्रिक कार की शुरुआत की थी. लिमिटेड रेंज, स्लो चार्जिंग और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते ये ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई. लेकिन इस कार ने भविष्य की EV क्रांति की नींव रख दी. आइए जानते हैं इसके बारे में.

India’s first electric car Lovebird: आज के समय में भारत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का एक बड़ा मार्केट बन चुका है. Tata Motors, Mahindra, Hyundai, Kia और MG Motor जैसी कंपनियां कई शानदार EV मॉडल्स पेश कर रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, जब लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों के बारे में ज्यादा जानकारी भी नहीं थी, तब भारत में एक छोटी-सी दो सीटर कार ‘Lovebird’ ने चुपचाप इस सफर की शुरुआत कर दी थी. यही कार भारत की पहली इलेक्ट्रिक कार मानी जाती है. यह कार ऐसे समय पर आई थी, जब बैटरी से चलने वाली गाड़ियों का कॉन्सेप्ट ज्यादातर लोगों के लिए बिल्कुल नया और अनजान था.

कब लॉन्च हुई थी Lovebird? 

Lovebird को साल 1993 में पेश किया गया था. इसे Eddy Current Controls (India) ने जापान की Yaskawa Electric के साथ मिलकर तैयार किया था. उस समय के हिसाब से ये काफी एडवांस कॉन्सेप्ट था. इस कार का प्रोडक्शन केरल के चालाकुडी (Chalakudy) और तमिलनाडु के कोयंबटूर (Coimbatore) में किया गया था. जब इस कार को पहली बार दिल्ली के Auto Expo में शोकेस किया गया, तो इसने लोगों का ध्यान तुरंत खींच लिया. खास बात ये रही कि भारत सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया और इसे मंजूरी दी. उस समय इसे साफ और बेहतर मोबिलिटी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था.

Lovebird के फीचर्स

अगर इसके फीचर्स की बात करें, तो ये एक छोटा सा टू-सीटर इलेक्ट्रिक कार थी. इसमें DC मोटर और रिचार्जेबल लीड-एसिड बैटरी दी गई थी. उस समय (1990s) बैटरी टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस नहीं थी, इसलिए इसमें आज की तरह लिथियम-आयन बैटरी नहीं मिलती थी.

फुल चार्ज होने पर ये कार करीब 60 किलोमीटर तक चल सकती थी, जो शहर के छोटे-मोटे सफर के लिए ठीक-ठाक माना जाता था. हालांकि, इसे चार्ज होने में लगभग 8 घंटे का समय लगता था. इसमें 4-स्पीड गियरबॉक्स, रिवर्स गियर और एक खास इलेक्ट्रॉनिक चॉपर सिस्टम दिया गया था, जो स्पीड को स्मूथ तरीके से कंट्रोल करता था. लेकिन एक कमी भी थी. ये कार 15 डिग्री से ज्यादा की ढलान पर चढ़ने में सक्षम नहीं थी. इससे पहाड़ी इलाकों में इसकी लिमिटेशन साफ नजर आती थी.

क्यों फेल हो गई Lovebird?

इतनी इनोवेशन के बावजूद Lovebird मार्केट में टिक नहीं पाई. हालत ये थी कि इसकी बिक्री तीन अंकों तक भी नहीं पहुंच सकी. उस समय सबसे बड़ी दिक्कत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी. ऊपर से बार-बार बिजली कटने की समस्या ने लोगों का भरोसा और कम कर दिया. साथ ही, 1990 के दशक में इलेक्ट्रिक कार खरीदना काफी महंगा सौदा था, जिसे आम लोग अपनाने के लिए तैयार नहीं थे. उस दौर में लोगों की पसंद बड़ी गाड़ियों की तरफ ज्यादा थी.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

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