गाड़ी कम चलती है, फिर भी पेट्रोल जल्दी खत्म हो रहा है? ये छोटी गलती हो सकती है जिम्मेदार

पेट्रोल जल्दी खत्म होने की वजह हमेशा इंजन ही नहीं होता, बल्कि कई बार टायर प्रेशर की छोटी गलती भी जिम्मेदार होती है. कम हवा वाले टायर घर्षण बढ़ाकर इंजन पर ज्यादा लोड डालते हैं. इससे माइलेज घट जाता है और फ्यूल ज्यादा खर्च होता है. आइए इसे डिटेल में समझते हैं.

Tyre Pressure: आजकल जब पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, तो हर ड्राइवर यही चाहता है कि गाड़ी ज्यादा माइलेज दे. लोग आमतौर पर इंजन या ड्राइविंग स्टाइल पर ध्यान देते हैं, लेकिन एक छोटी-सी चीज अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. हम बात कर रहे हैं टायर प्रेशर की. कॉन्टिनेंटल टायर के मुताबिक, अगर टायर सही तरीके से फुलाए रखें, तो बिना एक रुपया खर्च किए ही माइलेज करीब 3% तक बढ़ सकता है.

टायर का प्रेशर माइलेज पर कैसे असर डालता है?

आपकी गाड़ी के टायर ही वो एकमात्र पार्ट होते हैं जो सीधे रोड से कनेक्ट होते हैं. जब टायर में हवा कम हो जाती है, तो वो ज्यादा फैल जाते हैं और रोड से ज्यादा चिपकने लगते हैं. इससे घर्षण (Friction) बढ़ जाता है, जिसे रोलिंग रेजिस्टेंस कहते हैं. अब गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, और सीधा असर पड़ता है आपके फ्यूल पर.

चौंकाने वाली बात ये है कि थोड़ा सा प्रेशर कम होना भी मायने रखता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हर 1 PSI कम होने पर माइलेज करीब 0.2% से 0.4% तक गिर सकता है. कई बार लोग बिना जाने ही 5-10 PSI कम प्रेशर में गाड़ी चलाते रहते हैं, जिससे माइलेज में करीब 3% तक की कमी आ सकती है.

सही टायर प्रेशर माइलेज को कैसे बेहतर बनाता है?

जब आपके टायर सही तरीके से भरे होते हैं, तो गाड़ी रोड पर स्मूद चलती है और इंजन को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. इसका सीधा मतलब है कि कम मेहनत और फ्यूल खर्च में आपको बेहतर माइलेज मिलेगा.

लेकिन अगर टायर कम हवा वाले हों, तो मामला उल्टा हो जाता है. गाड़ी भारी लगती है, ड्रैग बढ़ता है और हर बार एक्सीलेरेशन में इंजन को ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है. नतीजा यह होता है कि फ्यूल ज्यादा जलता है और माइलेज गिर जाता है.

शहर बनाम हाईवे ड्राइविंग का असर

शहर में गाड़ी चलाते समय बार-बार ब्रेक और एक्सीलरेशन करना पड़ता है. ऐसे में अगर टायर का प्रेशर कम हो तो इंजन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और पेट्रोल जल्दी खत्म होता है. वहीं हाईवे पर असर थोड़ा कम दिखता है, लेकिन सही टायर प्रेशर रखने से गाड़ी स्मूद चलती है और लंबी दूरी में भी बेहतर माइलेज मिलता है.

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Published by: Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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