कई बार एक ही कार का कलर सालों तक देखने के बाद बोरियत होने लगती है. हो सकता है आपने सफेद कार ली हो और अब आपको कोई बोल्ड या नया शेड चाहिए, या बस गाड़ी को एक फ्रेश लुक देना चाहते हों. अच्छी बात ये है कि भारत में आप अपनी कार का रंग कानूनी रूप से बदल सकते हैं. लेकिन इसके लिए सही प्रोसेस फॉलो करना जरूरी है. अगर आपने बिना अपडेट किए रंग बदल दिया, तो परेशानी में पड़ सकते हैं.
असल नियम ये है कि कार का नया रंग RC (Registration Certificate) में अपडेट होना चाहिए. अगर RC में दर्ज रंग और आपकी गाड़ी का असली रंग अलग पाया गया, तो यह ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और चालान भी कट सकता है. इसलिए आइए जानते हैं आखिर सही प्रोसेस क्या है.
पहला स्टेप: अपने RTO ऑफिस में एप्लिकेशन दें
सबसे पहले आपको अपने उस RTO ऑफिस में जाना होगा जहां आपकी कार रजिस्टर्ड है. वहां जाकर आपको कार का कलर बदलने की परमिशन के लिए एक एप्लिकेशन देना होगा और अगर कोई फीस लगती है तो उसे भी जमा करना होगा. इसके साथ अपने जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे RC (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट), कार इंश्योरेंस, PUCC (पॉल्यूशन सर्टिफिकेट) और एक वैलिड ID प्रूफ जरूर साथ लेकर जाएं. फॉर्म भरते समय आपको साफ-साफ बताना होगा कि आप अपनी कार को किस नए रंग में पेंट करवाना चाहते हैं.
दूसरा स्टेप: RTO इंस्पेक्शन और अप्रूवल
इसके बाद RTO आपकी गाड़ी का इंस्पेक्शन करेगा. इस दौरान आपकी गाड़ी का मौजूदा रंग और बाकी डिटेल्स चेक की जाएंगी, ताकि सब कुछ सही तरीके से वेरिफाई हो सके. जब जांच पूरी हो जाती है, तो RTO आपकी कलर चेंज की रिक्वेस्ट को मंजूरी दे देता है.
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तीसरा स्टेप: वर्कशॉप से री-पेंट कराएं और बिल-डॉक्यूमेंट संभालकर रखें
इसके बाद आप अपनी कार को किसी अच्छे और प्रोफेशनल वर्कशॉप में जाकर अप्रूव्ड कलर में री-पेंट करा सकते हैं. पेंटिंग करवाने के बाद उसका बिल और पेंटर से जुड़ा सारा डॉक्यूमेंट संभालकर जरूर रख लें.
चौथा स्टेप: पेंटिंग के बाद RTO में जमा करें जरूरी डॉक्यूमेंट्स
पेंटिंग के बाद आपको अपने सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स लेकर RTO में जमा करने होंगे, ताकि आपकी RC में नया रंग अपडेट हो सके. इसके बाद RTO अधिकारी आपकी गाड़ी का खुद आकर फिजिकल वेरिफिकेशन करेंगे और नया कलर चेक करेंगे.
पांचवा स्टेप: बैंक या फाइनेंसर से पहले बात करें
एक और जरूरी बात जो आपको जरूर ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर आपकी गाड़ी लोन पर है, तो किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले अपने बैंक या फाइनेंसर से एक बार जरूर बात कर लें. कई बार लोन देने वाली कंपनियां बड़ी मॉडिफिकेशन को लेकर कुछ शर्तें रखती हैं. इसलिए पहले कन्फर्म करना ही सही रहता है.
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