भारत में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि जल्द ही देश में ‘ग्रेड आधारित ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली’ लागू की जाएगी. इस नयी व्यवस्था का मकसद है कि लोग जिम्मेदारी से वाहन चलाएं और बार-बार यातायात नियम तोड़ने वालों पर सख्ती की जाए.
क्या है ग्रेडेड लाइसेंस सिस्टम?
इस प्रणाली के तहत हर ड्राइवर को कुछ अंक दिए जाएंगे. यदि कोई व्यक्ति यातायात नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके अंक काटे जाएंगे. लगातार गंभीर उल्लंघन करने पर लाइसेंस छह महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है और बार-बार अपराध करने पर लाइसेंस रद्द भी हो सकता है.
सड़क दुर्घटनाओं की भयावह तस्वीर
गडकरी ने बताया कि भारत में हर साल करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत होती है. इनमें से 72%पीड़ित 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं. तेज रफ्तार, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, नशे में ड्राइविंग और मोबाइल फोन का इस्तेमाल इसके प्रमुख कारण हैं.
हेलमेट और सीट बेल्ट की अहमियत
आंकड़ों के अनुसार, हेलमेट न पहनने से 54,122 लोगों की जान गई, जबकि सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करने से 14,466 मौतें हुईं. तेज रफ्तार अकेले ही 1.2 लाख लोगों की जान ले चुकी है. यह साफ दिखाता है कि छोटे-छोटे सुरक्षा उपाय भी जीवन बचा सकते हैं.
दुर्घटना पीड़ितों के लिए राहत योजना
गडकरी ने लोगों से अपील की कि वे सड़क हादसे के शिकार लोगों की मदद करने से पीछे न हटें. सरकार ने पीएम राहत योजना (रोड एक्सिडेंट विक्टिमहॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट) शुरू की है, जिसके तहत किसी भी सड़क पर दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को सात दिन तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा.
सड़क सुरक्षा को मिलेगी नयी दिशा
ग्रेड आधारित लाइसेंस प्रणाली से उम्मीद है कि लोग नियमों का पालन करेंगे और सड़क पर जिम्मेदारी से वाहन चलाएंगे. यह कदम भारत में सड़क सुरक्षा को नयी दिशा देने वाला साबित हो सकता है.
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