पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और विदेशी तेल पर निर्भरता के बीच भारत अब एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E100 Fuel के लिए नियमों को मंजूरी दे दी है. सरकार का मानना है कि E100 फ्यूल से भारत की कच्चे तेल (Crude Oil) पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी फायदा मिलेगा. ऐसे में अब Maruti Suzuki, Toyota, MG और Hyundai जैसी कई ऑटो कंपनियां ऐसी गाड़ियों पर काम कर रही हैं, जो 100 फीसदी इथेनॉल पर चल सकें. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर E100 फ्यूल क्या है और क्या यह भविष्य में पेट्रोल का विकल्प बन सकता है?
E100 फ्यूल क्या है?
E100 एक ऐसा फ्यूल है, जिसमें लगभग 100% इथेनॉल होता है और इसमें पेट्रोल की मात्रा नहीं होती. इथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का, खराब खाद्यान्न और कृषि अपशिष्ट (Agricultural Waste) जैसी चीजों से बनाया जाता है. अभी भारत में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल शुरू हो चुका है, जिसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है. वहीं E100 फ्यूल पूरी तरह इथेनॉल आधारित ईंधन है.
भारत E100 फ्यूल को क्यों बढ़ावा दे रहा है?
भारत अपनी जरूरत का काफी तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर भारत पर भी पड़ता है और पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाते हैं. इसी वजह से सरकार इथेनॉल जैसे देश में बनने वाले ईंधन को बढ़ावा दे रही है. इससे तेल आयात कम होगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी. साथ ही इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना और मक्का जैसी फसलों की जरूरत होती है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ सकती है.
क्या E100 पेट्रोल की जगह ले सकता है?
देखा जाए, तो E100 पेट्रोल की जगह ले सकता है, लेकिन इसमें समय लगेगा. फिलहाल भारत की ज्यादातर कारें, बाइक और स्कूटर पेट्रोल या E20 फ्यूल के हिसाब से बनाए गए हैं, इसलिए वे सीधे E100 पर नहीं चल सकते. ऐसे में आने वाले कई सालों तक पेट्रोल और E100 दोनों का इस्तेमाल साथ-साथ होता रहेगा. जैसे-जैसे फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां बाजार में आएंगी, वैसे-वैसे E100 फ्यूल का इस्तेमाल भी बढ़ता जाएगा.
कौन सी गाड़ियां E100 पर चल सकते हैं?
E100 फ्यूल के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की जरूरत होती है. इथेनॉल की प्रकृति पेट्रोल से अलग होती है, इसलिए इंजन, फ्यूल लाइन, इंजेक्टर और फ्यूल पंप में बदलाव करने पड़ते हैं. Maruti Suzuki ने अपनी WagonR Flex Fuel का प्रोटोटाइप पेश किया है, जो E100 जैसे हाई इथेनॉल ब्लेंड पर चल सकती है. इसके अलावा Toyota, MG, Hyundai और Suzuki भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक पर काम कर रही हैं. वहीं टू-व्हीलर सेगमेंट में Hero MotoCorp ने Splendor और HF Deluxe के फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल पेश किए हैं.
E100 फ्यूल के फायदे
- अगर E100 का इस्तेमाल बढ़ता है, तो भारत को कम कच्चा तेल आयात करना पड़ेगा.
- इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ेगी, जिससे किसानों की आय बढ़ सकती है.
- इथेनॉल पेट्रोल के मुकाबले ज्यादा साफ तरीके से जलता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम हो सकता है.
E100 फ्यूल के नुकसान
- इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले में कम ऊर्जा होती है. इसलिए E100 पर चलने वाली गाड़ियां समान दूरी तय करने के लिए ज्यादा फ्यूल खपत कर सकती हैं.
- मौजूदा पेट्रोल गाड़ियों में सीधे E100 का इस्तेमाल नहीं कर सकते. इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक जरूरी है.
- देशभर के पेट्रोल पंपों पर E100 फ्यूल की स्टोरेज और सप्लाई के लिए नई सुविधाएं विकसित करनी होंगी.
आगे क्या हैं चुनौतियां?
E100 फ्यूल को भविष्य का ईंधन माना जा रहा है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर अपनाने में अभी कुछ चुनौतियां हैं. सबसे बड़ी चुनौती पूरे देश में इथेनॉल फ्यूल स्टेशनों का नेटवर्क तैयार करना है. इसके अलावा ऑटो कंपनियों को बड़ी संख्या में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च करनी होगी. साथ ही सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा, कि इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के दौरान खाद्य सुरक्षा और कृषि जरूरतों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.
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