आपके इलेक्ट्रिक स्कूटर में छिपे हैं ये 5 कमाल के फीचर्स, काफी राइडर्स नहीं करते इस्तेमाल

देश में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. डेली यूज के लिए यह एक बढ़िया साधन है. यदि आपके पास भी एक ई-स्कूटर है, तो जानें 5 छिपे हुए फीचर्स जो आपकी राइड को आसान और मजेदार बना देंगे.

देश में इलेक्ट्रिक स्कूटर का क्रेज काफी बढ़ गया है. क्या आप जानते हैं कि आपका नया इलेक्ट्रिक स्कूटर सिर्फ एक व्हीकल नहीं, बल्कि व्हील्स पर चलता हुआ एक स्मॉल कंप्यूटर है? ज्यादातर लोग इसे सिर्फ स्टार्ट करते हैं, एक्सीलेटर घुमाते हैं और अपनी मंजिल तक पहुंच जाते हैं, लेकिन अगर आपको लगे कि आप अपनी गाड़ी के पूरे फीचर्स का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे हैं, तो कैसा लगेगा? आइए इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं इलेक्ट्रिक स्कूटर के 5 ऐसे छिपे हुए फीचर्स के बारे में, जो आपकी राइड को पहले से ज्यादा आसान और मजेदार बना देंगे.

रिवर्स मोड का इस्तेमाल 

बड़ी कारों में बैक गियर होना आम बात है, लेकिन इलेक्ट्रिक स्कूटर में यह फीचर किसी जादू से कम नहीं है. भारी स्कूटर को ढलान पर पीछे की तरफ खींचना या हेवी पार्किंग से बाहर निकालना काफी परेशान कर देने वाला काम होता है. रिवर्स मोड ऑन करते ही आपका स्कूटर बिना किसी मेहनत के धीरे-धीरे पीछे जाने लगता है. अगर आपकी गाड़ी में यह फीचर्स है और आपने अभी तक इसका इस्तेमाल नहीं किया है, तो अगली बार पार्किंग में इसे जरूर ट्राई करें.

री-जेनरेटिव ब्रेकिंग से बैटरी चार्जिंग

री-जेनरेटिव ब्रेकिंग यह एक ऐसा स्मार्ट फीचर है, जो आपकी जेब के पैसे बचाता है. जब आप ढलान पर नीचे आ रहे हों या लाल बत्ती को देखकर एक्सीलेटर को उल्टा घुमाते हैं, तो स्कूटर की मोटर रिवर्स घूमने लगती है. इससे गाड़ी की स्पीड तो धीमी होती ही है, साथ ही जो एनर्जी बनती है, वह सीधे आपकी बैटरी में जाकर उसे चार्ज कर देती है. यानी बिना प्लग लगाए भी आपकी बैटरी थोड़ी बहुत चार्ज होती रहती है.

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क्रूज कंट्रोल 

लंबे रास्तों या खाली सड़कों पर लगातार एक्सीलेटर पकड़ कर रखने से कलाई में दर्द होने लगता है. ऐसे में क्रूज कंट्रोल बहुत काम आता है. अपनी पसंद की स्पीड पर जाकर बस एक बटन दबाएं और एक्सीलेटर से हाथ हटा लें. आपका स्कूटर बिना रुके उसी स्पीड पर चलता रहेगा. ब्रेक दबाते ही यह फीचर अपने आप बंद हो जाता है, जिससे सुरक्षा भी बनी रहती है. यदि आपके स्कूटर में यह फीचर है तो इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. 

मोबाइल ऐप से जियो फेंसिंग और लोकेशन ट्रैकिंग

आजकल के मॉडर्न स्कूटर आपके स्मार्टफोन से कनेक्ट हो जाते हैं. इसके ऐप में एक बहुत ही काम का फीचर होता है जिसे जियो फेंसिंग कहते हैं. आप इसमें एक इलाका तय कर सकते हैं, जैसे कि 5 किलोमीटर का एरिया. अगर आपका स्कूटर उस तय इलाके से बाहर जाता है, तो तुरंत आपके फोन पर अलर्ट आ जाएगा. इसके अलावा, भीड़-भाड़ वाली पार्किंग में अपनी गाड़ी ढूंढने के लिए भी ऐप का लोकेशन ट्रैकिंग फीचर बहुत मददगार साबित होता है.

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बिना चाबी के स्टार्ट और फॉलो-मी-होम लाइट्स

फॉलो मी होम लाइट इलेक्ट्रिक स्कूटर में मिलने वाला एक जबरदस्त फीचर है. स्मार्ट चाबी या मोबाइल ऐप की मदद से अब आपको चाबी लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती. आपके पास पहुंचते ही स्कूटर अनलॉक हो जाता है. इसके अलावा, रात के समय जब आप स्कूटर को डार्क पार्किंग में पार्क करते हैं, तो इसकी हेडलाइट्स 10 से 15 सेकंड तक जलती रहती हैं ताकि आप आराम से अपने घर के दरवाजे तक पहुंच सकें. 

ई-स्कूटर का हिडन फीचर्स कैसे देखें?

इलेक्ट्रिक स्कूटर के ये छोटे-छोटे फीचर्स आपकी रोजाना की राइड को बहुत आसान बना देते हैं. अपनी गाड़ी की मैनुअल बुक देखें या ऐप सेटिंग्स चेक करें और आज ही इन फीचर्स को इस्तेमाल करना शुरू करें.


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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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