अमेरिका से डरे हूती? बोले- लाल सागर में US जहाजों पर हमला नहीं करेंगे, सऊदी अरब को ही बनाएंगे निशाना

यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमला न करने का बयान दिया है. हालांकि, उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने की बात कही है. यह बयान ओमान के ज़रिए अप्रत्यक्ष बातचीत के बाद आया है.

ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने अमेरिका को लेकर अहम बयान दिया है. हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) से बातचीत में कहा कि उनका संगठन लाल सागर में अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेगा. हालांकि, सऊदी अरब के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने की बात कही गई है.

अमेरिका से अप्रत्यक्ष संपर्क का दावा

अल-बुखैती के मुताबिक, यमन के पश्चिमी तट से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर हूतियों की तेज बढ़त के बाद अमेरिका ने उनसे संपर्क किया था. उन्होंने कहा कि हूतियों ने स्पष्ट किया है कि वे जलडमरूमध्य में अमेरिका या किसी अन्य देश को निशाना नहीं बना रहे हैं. उनका संघर्ष सऊदी अरब के खिलाफ है.

दूसरे देशों को भी दी चेतावनी

हूती नेता ने चेतावनी दी कि अगर दूसरे देश यमन में सऊदी अरब के साथ सैन्य अभियान में शामिल होते हैं तो संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है. उनके मुताबिक, यमन अब केवल आंतरिक संघर्ष तक सीमित लड़ाई नहीं लड़ रहा है. बल्कि ज़रूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी युद्ध करने में सक्षम है.

ओमान के जरिए बातचीत की बात

AP के अनुसार, पिछले सप्ताहांत ओमान में अमेरिकी और हूती प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी. हालांकि, अल-बुखैती ने सीधे बैठक की पुष्टि नहीं की. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच ओमान की मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष संपर्क हुआ है.

बाब-अल-मंदेब को बंद करने का इरादा नहीं

हूतियों ने रणनीतिक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की योजना से इनकार किया है. अल-बुखैती ने कहा कि उनके सैन्य अभियानों का उद्देश्य जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं है. बल्कि यहां सभी के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है. बाब-अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है.

सऊदी अरब पर हमले क्यों जारी रहेंगे?

अल-बुखैती ने कहा कि सऊदी अरब के खिलाफ हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक रियाद हूती नियंत्रण वाले इलाकों पर करीब एक दशक से जारी नाकाबंदी हटाने और लाल सागर के हूती-नियंत्रित बंदरगाहों तक जहाजों की पहुंच की अनुमति देने पर सहमत नहीं होता. उनका कहना है कि इसके बाद हूती बातचीत के लिए तैयार होंगे.

24 घंटे में 28 सऊदी हवाई हमलों का दावा

हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में सऊदी वायुसेना ने यमन के अलग-अलग इलाकों में 28 हवाई हमले किए. उनके मुताबिक, ताइज, अल-जौफ और मारिब प्रांतों को निशाना बनाया गया. सरी ने यह भी दावा किया कि हालिया तनाव बढ़ने के बाद से सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कम से कम 760 हवाई हमले किए हैं.

हूतियों ने सऊदी अरब को बताया तनाव बढ़ने का जिम्मेदार

अल-बुखैती ने हालिया संघर्ष के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने दावा किया कि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन से जुड़े एक हवाई हमले में सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया था. इससे ईरान से हूती प्रतिनिधिमंडल को लेकर आ रहा विमान वहां नहीं उतर सका. हूतियों के अनुसार, यह विमान सऊदी नेतृत्व वाले हवाई और समुद्री नाकाबंदी को चुनौती देने के लिए भेजा गया था.

2022 का युद्धविराम पड़ा कमजोर

हालिया सैन्य escalation ने 2022 के युद्धविराम को प्रभावी तौर पर खत्म कर दिया है. इस युद्धविराम के बाद यमन का गृहयुद्ध काफी हद तक थम गया था. इससे पहले हूती लड़ाकों ने यमन के उत्तरी और मध्य हिस्सों के बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है.

लाल सागर के अहम बंदरगाह पर कब्जे से बढ़ी ताकत

हालिया घटनाक्रम में हूती बलों ने महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर में कई रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा किया है. इससे बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर नज़र रखने की उनकी क्षमता बढ़ी है. यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के करीब 12 फ़ीसदी हिस्से के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.

यमन में 12 साल से जारी है संघर्ष

यमन का संघर्ष करीब 12 साल से जारी है. हूतियों के बड़े इलाकों पर कब्जे के बाद सऊदी अरब और उसके सहयोगियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था. संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, युद्ध में कम से कम 1.5 लाख लोगों की मौत हुई है और इस संघर्ष ने यमन को गंभीर मानवीय एवं खाद्य संकट के कगार पर पहुंचा दिया है.

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By सत्येन्द्र गिरि

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पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

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