दुनिया से वसूले 175 अरब डॉलर टैरिफ लौटाएगा US! सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश? ट्रंप ने कहीं ये बातें

Donald Trump Tariff Will US Refund: अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया पर IEEPA के तहत भारी टैरिफ थोपे और उनसे अरबों डॉलर वसूले. लेकिन US सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की बेंच ने ट्रंप के इस आदेश को 6-3 से रद्द कर दिया. ऐसे में अब सवाल उठता है कि क्या ट्रंप अब तक इकट्ठा किए गए पैसों को वापस करेंगे?

Donald Trump Tariff Will US Refund: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अधिकांश टैरिफ उपायों को रद्द कर दिया.  US Supreme Court ने ट्रंप की टैरिफ नीति को बड़ा झटका देते हुए फैसला सुनाया कि उनकी सरकार द्वारा 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत वैश्विक टैरिफ वैधानिक अधिकार के बिना लगाए गए थे. इसके जरिए उन्होंने दुनिया भर के देशों पर अमेरिका के साथ व्याापार करने पर टैरिफ लगाया था. इस फैसले के बाद ट्रंप जजों के ऊपर काफी गुस्से में नजर आए. उन्होंने काफी तीखी टिप्पणियां भी कीं.  लेकिन सवाल है कि जिन देशों ने अब अप्रैल 2025 से अब तक जो टैरिफ दिए हैं, उस पैसे का क्या होगा? 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के टैरिफ का साथ देने वाले एक जज ने कहा कि इस फैसले के तात्कालिक प्रभाव काफी बड़े हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि अब अमेरिका को संभावित रूप से कई अरब डॉलर की राशि रिफंड करनी पड़ सकती है. हालांकि, उन्होंने इस पर स्पष्ट रूप से कोई फैसला नहीं दिया है. इस फैसले से अमेरिकी सरकार पर अरबों डॉलर के रिफंड दावों का खतरा पैदा हो सकता है.

U.S. Supreme Court में 6-3 के बहुमत का फैसला जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा. इस फैसले से जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावानॉ ने असहमति जताई. अपने असहमति वाले मत में जस्टिस ब्रेट कैवनॉ ने लिखा, ‘हालांकि इस बीच, अदालत के फैसले के अंतरिम प्रभाव काफी बड़े हो सकते हैं. अमेरिका को उन आयातकों को अरबों डॉलर लौटाने पड़ सकते हैं, जिन्होंने IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ का भुगतान किया था. भले ही कुछ आयातकों ने यह लागत पहले ही उपभोक्ताओं या अन्य लोगों पर डाल दी हो.’

कैवनॉ की असहमति: राष्ट्रपति के पास अब भी व्यापक टैरिफ शक्तियां

जस्टिस कैवनॉ ने अपनी असहमति में यह भी कहा कि कई संघीय कानून अब भी राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ शक्तियां देते हैं. उन्होंने ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट, 1962 (सेक्शन 232), ट्रेड एक्ट, 1974 (सेक्शन 122, 201 और 301) और टैरिफ एक्ट, 1930 (सेक्शन 338) जैसे कानूनों का हवाला दिया. उन्होंने लिखा, ‘न तो वादियों ने और न ही अदालत ने यह सुझाव दिया है कि राष्ट्रपति को टैरिफ शक्ति देने वाले ये अनेक कानून संविधान के शक्तियों के पृथक्करण (सेपरेशन ऑफ पावर्स) का उल्लंघन करते हैं.’ ट्रंप ने जस्टिस कैवनॉ की काफी तारीफ की.

दुनिया पर लगाएंगे 10% टैरिफ

सुप्रीम कोर्ट में हार के तुरंत बाद नाराज ट्रंप ने कहा कि वह एक कार्यकारी आदेश (एग्जीक्यूटिव ऑर्डर) पर हस्ताक्षर करेंगे. इसके तहत सेक्शन 122 नामक संघीय कानून के अंतर्गत मौजूदा शुल्कों के ऊपर 10% का वैश्विक टैरिफ लगाया जाएगा. ट्रंप ने भारत के विषय पर भी अपनी विशेष टिप्पणी की.

IEEPA के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

अदालत के बहुमत के फैसले में कहा गया कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों से आने वाले सामान पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है. यह अधिकार केवल यूएस कांग्रेस के पास है, जो टैक्स और टैरिफ लगा सकता है. 

मुख्य न्यायाधीश रॉबर्ट्स ने अपने मत में लिखा, ‘IEEPA द्वारा ‘आयात को विनियमित’ करने का जो अधिकार दिया गया है, वह पर्याप्त नहीं है. IEEPA में कहीं भी टैरिफ या शुल्क का उल्लेख नहीं है. सरकार किसी ऐसे कानून की ओर इशारा नहीं कर पाई जिसमें कांग्रेस ने ‘विनियमित’ शब्द का उपयोग कर कराधान (टैक्सेशन) को अधिकृत किया हो. अब तक किसी भी राष्ट्रपति ने IEEPA को ऐसा अधिकार देने वाला नहीं माना.’

उन्होंने आगे जोड़ा, ‘हम यह दावा नहीं करते कि हमें अर्थशास्त्र या विदेश नीति के मामलों में कोई विशेष विशेषज्ञता है. हम केवल वही सीमित भूमिका निभाने का दावा करते हैं, जो संविधान के अनुच्छेद III ने हमें सौंपी है. उस भूमिका का निर्वहन करते हुए, हम यह निर्णय देते हैं कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता.’

पैसे लौटाने पर ट्रंप का पूरा बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर निराशा जताई. ट्रंप ने कहा कि फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बीते एक साल में इन टैरिफ के जरिए जो पैसा वसूला गया, उसका क्या होगा. व्हाइट हाउस में एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, ‘हमने सैकड़ों अरब डॉलर इकट्ठा किए हैं, और इसलिए मैं कहता हूं, ‘हमने जो पैसा लिया, उसका क्या होगा?’ इस पर कोई चर्चा नहीं हुई.’ उन्होंने आगे कहा, ‘क्या आपको नहीं लगता कि वे इसमें एक वाक्य जोड़ सकते थे कि पैसा रखा जाए या न रखा जाए? लगता है अब अगले दो साल तक इस पर मुकदमे चलेंगे. उन्होंने इतना खराब, दोषपूर्ण फैसला लिखा है. यह ऐसा लगता है जैसे बहुत समझदार लोगों ने नहीं लिखा हो.’ उन्होंने फिर दोहराया कि रिफंड (वापसी) के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई. ट्रंप ने कहा, ‘आखिरकार हम पांच साल तक कोर्ट में ही फंसे रहेंगे.’

टैरिफ से वसूली गई रकम कितनी है?

अनुमानों के मुताबिक, 175 अरब डॉलर से अधिक की टैरिफ आय संभावित रूप से रिफंड दावों के दायरे में आ सकती है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने कहा है कि अगर रिफंड देना पड़ा तो ट्रेजरी विभाग उसके लिए सक्षम स्थिति में होगा, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने खुद माना कि यह प्रक्रिया जटिल हो सकती है. यूनाइटेड स्टेट कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के डेटा और एजेंसी द्वारा US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दाखिल आधिकारिक दस्तावेजों के एक आंकड़े के मुताबिक, बीते वर्ष 14 दिसंबर तक, अमेरिका की संघीय सरकार ने टैरिफ की बदौलत 3,01,000 से अधिक अलग-अलग इंपोर्टर्स से कुल 134 अरब डॉलर की राशि वसूली.

रिफंड में गड़बड़ी की भी आशंका

जहां अधिकांश डेमोक्रेट्स ने इस फैसले का स्वागत किया, वहीं सीनेट बैंकिंग कमेटी की शीर्ष डेमोक्रेट नेता एलिजाबेथ वारेन ने चेतावनी दी कि उपभोक्ताओं और कई छोटे व्यवसायों के पास ‘वह पैसा वापस पाने के लिए कोई कानूनी तंत्र नहीं है, जो वे पहले ही चुका चुके हैं.’ जब सुप्रीम कोर्ट ने पैसे को लौटाने की कोई रूलिंग नहीं दी है, तो माना जा रहा है कि सारे विवाद निचली अदालतों में ही सुलझाए जाएंगे. जस्टिस ब्रेट कैवनॉ का मानना है कि इससे रिफंड में गड़बड़ी हो सकती है. 

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