शबनम और शोला! कौन है शायनाज बलोच? BLA ने पहली बार कैमरे पर दिखाई महिला कमांडर, पाक आर्मी को दी चुनौती

Shaynaz Baloch BLA Commander: बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पहली बार अपनी महिला ब्रिगेड का वीडियो जारी किया है, जिसमें कमांडर शायनाज बलोच नजर आईं. केच जिले की रहने वाली शायनाज छात्र राजनीति से जुड़ी रहीं और अब हथियारों के साथ बलोच उग्रवादी आंदोलन में प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं.

Shaynaz Baloch BLA Commander: बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी संगठन बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) की एक महिला कमांडर इन दिनों अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं. संगठन की ओर से जारी एक वीडियो में एक महिला को दिखाया गया, जो लड़कियों को आर्म्स ट्रेनिंग देती दिख रही है. बीएलए ने कैमरे के सामने पहली बार अपनी किसी महिला कमांडर को दिखाया है. इसका नाम शायनाज बलोच बताया गया, जिसका कोड नेम या गुप्त नाम सादो है. 

करीब 11 मिनट लंबे इस वीडियो को BLA के प्रचार मंच ‘हक्काल’ के जरिए जारी किया गया. इसमें शायनाज बलोच को हथियारबंद महिला लड़ाकों के बीच देखा गया. वीडियो में कभी पहाड़ी इलाकों में ट्रेनिंग चलती दिखाई देती है तो कभी हथियारों के साथ चलती गाड़ियां नजर आती हैं. इसी दौरान शायनाज सीधे कैमरे के सामने आकर अपना संदेश देती हैं. वीडियो में शायनाज बलोच ने मीडिया और बलूचिस्तान की जनता को संबोधित किया. 

शायनाज ने कहा कि मेरी प्यारी बहनों और भाइयों, आज संगठन ने यह जिम्मेदारी मेरे कंधों पर रखी है. मैं इसे केवल एक पद नहीं, बल्कि अपना कर्तव्य मानती हूं और हमेशा इसी भावना के साथ देखती हूं. क्योंकि मेरी इज्जत, मेरी पहचान और मेरा आत्मसम्मान एक आजाद बलूचिस्तान से जुड़ा हुआ है. जिस दिन तक हमारी मातृभूमि आजाद नहीं हो जाती, तब तक सम्मान और पहचान जैसे शब्दों का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है. गुलामी की जिंदगी में हमारी हैसियत सिर्फ उत्पीड़ित लोगों जैसी रह जाती है। यही वह सच है, जिसे मैंने बहुत गहराई से महसूस और समझा है.

शायनाज ने और क्या कहा?

अपने लंबे संदेश में शायनाज बलोच ने कहा कि इतिहास गवाह है कि बलोच समाज में महिलाओं को हमेशा सम्मान और अहम स्थान मिला है. उन्होंने मीर चकार खान रिंद की बहन बनादी बलोच का जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि महिलाएं हमेशा सामाजिक और राजनीतिक जीवन में पुरुषों के साथ खड़ी रही हैं. उन्होंने बनादी बलोच का जिक्र करते हुए कहा कि सदियों पहले भी बलोच महिलाएं युद्ध और नेतृत्व में हिस्सा लेती थीं. हालांकि उनके मुताबिक ब्रिटिश दौर की सैंडमैन व्यवस्था और बाद में पाकिस्तानी शासन ने बलोच समाज को राजनीतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से बांट दिया.

शायनाज ने कहा कि वह सात साल से ज्यादा समय से BLA से जुड़ी हैं और इस दौरान एक साधारण लड़ाके से नेतृत्व की भूमिका तक पहुंचीं. उन्होंने यह भी दावा किया कि संगठन में उन्हें कभी लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. उन्होंने बलोच लोगों से चुप न रहने की अपील की और कहा कि अन्याय के सामने खामोशी बलोच सम्मान के खिलाफ है. साथ ही महिलाओं से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें केवल भावनात्मक रूप से नहीं, बल्कि समझ और जागरूकता के साथ आगे आना चाहिए.

कौन है कमांडर शायनाज बलोच?

बलूचिस्तान पोस्ट की खबर के मुताबिक,  शायनाज बलोच बलूचिस्तान के केच जिले के टंप इलाके की रहने वाली हैं. शायनाज ने अपनी शुरुआती पढ़ाई The Oasis स्कूल से की थी. इसके बाद उन्होंने टंप डिग्री कॉलेज से एफएससी की पढ़ाई पूरी की. छात्र जीवन के दौरान वह बलोच स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन-आजाद यानी BSO-Azad से जुड़ी रहीं. यह छात्र संगठन लंबे समय से बलोच राष्ट्रवादी राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा है.

कमांडर शायनाज बलोच का सामने आना एक बड़ा बदलाव 

विश्लेषकों का मानना है कि शायनाज बलोच का उग्रवादी संगठन में कमांडर के तौर पर सामने आना केवल एक व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि एक बड़ा प्रतीकात्मक बदलाव भी है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि वह एक महिला होते हुए ऐसे संगठन में वरिष्ठ भूमिका निभा रही हैं, जहां पहले नेतृत्व लगभग पूरी तरह पुरुषों के हाथ में रहता था. 

शायनाज खुद को खुले तौर पर पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ खड़ा दिखाती हैं. खास बात यह भी है कि वह ऐसे सैन्य ढांचे को चुनौती देती नजर आती हैं, जिसे दक्षिण एशिया की सबसे शक्तिशाली और बड़ी सैन्य संस्थाओं में गिना जाता है. बीएलए में महिला लड़ाकों का पहले भी जिक्र होता रहा है, लेकिन किसी महिला को खुले तौर पर ‘कमांडर’ के रूप में सामने लाना अलग और बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है.

क्षेत्रीय मामलों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि शायनाज की सार्वजनिक मौजूदगी यह दिखाती है कि बलूच उग्रवादी आंदोलन के कुछ हिस्सों में अब महिलाओं को भी नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में लाने का आत्मविश्वास बढ़ रहा है. पहले जहां महिलाओं की भूमिका सीमित मानी जाती थी, वहीं अब उन्हें संगठन के सार्वजनिक और रणनीतिक चेहरों के रूप में पेश किया जा रहा है. 

शायनाज को प्रमुख चेहरा बनाकर पेश करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि बीएलए समाज के कुछ वर्गों में अपना समर्थन बढ़ाने और अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रहा है. वहीं, शायनाज जैसी महिलाओं की सार्वजनिक मौजूदगी को पाकिस्तानी सरकार और सेना के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर भी देखा जा रहा है. 

शारी बलोच के बाद बदली तस्वीर

बलोच आंदोलन में महिलाओं की सक्रिय मौजूदगी को लेकर सबसे बड़ा मोड़ अप्रैल 2022 में आया था. उस समय शारी बलोच ने कराची यूनिवर्सिटी के कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट के पास आत्मघाती हमला किया था. इस हमले में तीन चीनी शिक्षकों और उनके पाकिस्तानी ड्राइवर की मौत हुई थी. शायनाज भी शारी बलोच के इलाके से आते हैं. 

शारी बलोच को BLA की पहली महिला फिदायीन माना गया और उसी घटना के बाद बलोच महिलाओं की उग्रवादी संगठनों में भूमिका को लेकर पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया में बहस शुरू हुई. इसके बाद सुमैया कलंदरान महल बलोच, द्रोशम बलोच, पिछले साल आसिफा मेंगल और हाल ही में ऑपरेशन हेरॉफ के दौरान चर्चा में आई हवा बलोच जैसे कई नाम भी सामने आए. रिपोर्टों के मुताबिक इन महिलाओं ने सीधे लड़ाई में हिस्सा लेने के साथ-साथ फिदायीन हमलों में भी भूमिका निभाई.

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बलोच महिलाओं में बढ़ रहा गुस्सा

पिछले कुछ वर्षों में बलोचिस्तान में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है.  डॉ महरंग बलोच जैसी हस्तियां लापता लोगों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन का बड़ा चेहरा बनकर उभरी हैं. हालांकि कई बलोच समूहों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली महिलाओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने सख्त रवैया अपनाया. 

यही वजह है कि कुछ महिलाओं में हथियार उठाने की सोच मजबूत हुई. इसके साथ ही पाकिस्तान के इस अशांत इलाके- बलूचिस्तान में फोर्स्ड डिस्अपियरेंस (जबरन गायब करने) की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. बलोच संगठनों ने पिछले सालों में हजारों की तादाद में लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है, लेकिन पाकिस्तान सरकार पर ध्यान नहीं देती. इनमें इन्हीं महिलाओं के भाई, पिता और चाचा होते हैं. 

तेज हो रहे हैं बीएलए के अटैक 

वीडियो ऐसे समय जारी किया गया है जब बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा और सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है. पिछले कुछ वर्षों में प्रांत में हमले, सैन्य अभियान और तनाव लगातार बढ़े हैं. बीते रविवार 23 मई को बीएलए ने क्वेटा में एक ट्रेन को निशाना बनाकर फिदायीन हमला किया. बीएलए ने दावा किया कि इसमें 82 पाकिस्तानी सेना के अधिकारी और कई जवान मारे गए, जबकि 131 लोग घायल हुए.  इस हमले में बिलाल शाहवानी उर्फ सईन को फिदायीन के रूप में इस्तेमाल किया गया.  

इससे पहले ऑपरेशन हेरॉफ-2 के दौरान बलोच विद्रोहियों ने पाकिस्तान सेना को एक बड़ी चोट पहुंचाई थी. इसमें 200 से ज्यादा जवान एक ही दिन में मारे गए थे. बीएलए ने वह ऑपरेशन बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों में किया था. 

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लेखक के बारे में

Published by: Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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