हम तस्वीरें ले रहे थे और बोट पलट गया, हम सब मदद के लिए चिल्ला रहे थे; वियतनाम दुर्घटना में जिंदा बचे टूरिस्ट ने बताया

Vietnam Boat Incident : हनोई स्थित भारतीय दूतावास के मुताबिक फु क्वोक आइलैंड के पास नाव पलटने से शनिवार को 15 भारतीय टूरिस्ट की मौत हुई. इन टूरिस्ट में तमिलनाडु के दस, आंध्र प्रदेश के तीन और केरल के दो लोग थे. इन लोगों को लावा मोबाइल कंपनी की ओर से सेल्स टारगेट पूरा करने पर एक टूर पैकेज के तहत वहां ले जाया गया था. लावा कंपनी ने कहा कि वह वियतनाम में भारतीय दूतावास और स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और शव को जल्द से जल्द वापस लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

Vietnam Boat Incident : वियतनाम बोट दुर्घटना में जिंदा बचे तमिलनाडु के एक टूरिस्ट मुरुगराज ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि कि शनिवार सुबह हम नाव से मस्ती के लिए निकले थे. नाव समुद्र में करीब दो किलोमीटर ही चली थी, तभी एक बड़ी लहर उससे टकरा गई, जिससे वह दाईं ओर झुक गई और यात्री एक-दूसरे पर गिरने लगे. जिसकी वजह से जहाज पलटने लगा और हम प्रेशर नहीं झेल पाए. किसी तरह मैं खिड़की से बाहर निकला और रेलिंग पकड़ ली. बचाव दल हमारे पास 5 मिनट में ही पहुंच गया, बावजूद इसके कई लोगों को बचाया नहीं जा सका.

स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1:30 पर हुई दुर्घटना

आंध्र प्रदेश के एक पर्यटक आशीष कुमार ने बताया कि हमें ग्रुप में आइलैंड पर ले जाया गया था. हमारा यह टूर कंपनी ट्रिप का हिस्सा था. दुर्घटना लोकल टाइम के हिसाब से दोपहर करीब 1:30 बजे हुई. नाव समु्द्र में मुश्किल से 300 से 400 मीटर ही गई थी कि पलट गई. उस वक्त हम तस्वीरें ले रहे थे. हम समझ ही नहीं पाए कि क्या और कैसे हो गया. हम सब मदद के लिए चिल्ला रहे थे. एक अन्य टूरिस्ट ने बताया कि संभवत: ओवरलोडिंग की वजह से बोट पलट गई.

शनिवार को हुई थी दुर्घटना

वियतनाम के फु क्वोक आइलैंड के पास हुई इस दुर्घटना में शनिवार को 15 भारतीय टूरिस्ट की जान गई. फु क्वोक आइलैंड अपनी सफेद रेत और खूबसूरत शी बीच के लिए प्रसिद्ध है. यहां प्राकृतिक मोती की खेती होती है. शनिवार को हुई दुर्घटना तेज लहरों की वजह से हुई थी.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

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रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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