Violence in Bangladesh: शेख हसीना को किस देश में मिलेगी शरण? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की ब्रिटेन के मंत्री से बात

Violence in Bangladesh: बांग्लादेश में भारी उथल-पुथल के बाद पूर्व पीएम शेख हसीना भारत आ गयी है. ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मांग रही हैं. इसी कड़ी में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिटिश मंत्री के साथ फोन पर बात की.

Violence in Bangladesh: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के राजनीतिक शरण को लेकर असमंजस बरकरार है. भारत से वो किस देश का रुख करेंगी इसकी तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है. सोमवार को बांग्लादेश में भारी उपद्रव के बाद उन्होंने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया था. साथ ही अपना वतन छोड़कर भारत आ गई थीं. यहां उन्हें एक सेफ प्लेस में रखा गया है. इसी कड़ी में कहा जा रहा है कि वो ब्रिटेन से राजनीतिक शरण की मांग कर रही हैं. हालांकि उनका आगे का क्या प्लान है इसपर कुछ भी साफ नहीं है.

एस जयशंकर ने की ब्रिटेन के विदेश मंत्री से बात
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी से फोन पर बात की है. दोनों नेताओं ने हाल के दिनों में घटी बांग्लादेश की घटना पर चर्चा की है. इसके बाद एस जयशंकर ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने और लैमी ने पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम पर भी गंभीर विचार-विमर्श किया है. जयशंकर ने लिखा कि आज ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड लैमी से फोन पर बात हुई. बांग्लादेश और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई.

क्या ब्रिटेन जाएंगी शेख हसीना
एक जयशंकर और ब्रिटिश विदेश मंत्री के बीच यह बातचीत बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की लंदन में शरण लेने की प्रारंभिक योजना के तहत की गई है. हालांकि इससे पहले ब्रिटेन ने संकेत दिया कि शेख हसीना अपने देश में हिंसक विरोध प्रदर्शनों की किसी भी संभावित जांच के खिलाफ कानूनी संरक्षण नहीं मिल सकता है. वहीं अमेरिका की ओर से भी उन्हें शरण देने के इनकार किया गया है.

कहां जा सकती हैं शेख हसीना
बता दें, सरकारी नौकरी में आरक्षण की मांग को लेकर बीते महीने से जारी छात्रों का आंदोलन अचानक से काफी तेज हो गया. पूरे बांग्लादेश में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ शुरू हो गयी. शेख हसीना भारत आ गयी. अब वो किसी देश में सुरक्षित राजनीतिक शरण की तलाश में हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि हसीना शरण लेने के लिए संयुक्त अरब अमीरात, बेलारूस, कतर, सऊदी अरब, रूस और फिनलैंड समेत कई और विकल्पों पर विचार कर रही हैं. भाषा इनपुट से साभार

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Author: Pritish Sahay

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