H1B के बाद ट्रंप सरकार ने दिया एक और झटका, अब इस नियम के खत्म होने से इंडियंंस की नौकरी जाने का खतरा

US Visa News: अमेरिका में एच1बी वीजा का शुल्क एक लाख अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाये जाने के कुछ सप्ताह बाद ही अधिकारिय‍ों ने विदेशी नागरिकों के लिए कार्य परमिट के स्वत: विस्तार की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया. अमेरिका का यह कदम बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासियों और श्रमिकों को प्रभावित कर सकता है.

US Visa News: अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों को लेकर एक और बड़ा बदलाव किया गया है, जो हजारों भारतीय पेशेवरों और प्रवासी श्रमिकों पर असर डाल सकता है. एच-1बी वीजा फीस में हालिया भारी बढ़ोतरी (1 लाख अमेरिकी डॉलर) के कुछ ही सप्ताह बाद, अमेरिकी प्रशासन ने अब विदेशी नागरिकों के वर्क परमिट के स्वत: विस्तार की प्रक्रिया समाप्त करने का निर्णय लिया है. यह फैसला यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने बुधवार को लिया, जिसके तहत अब विदेशी नागरिकों को अपने Employment Authorization Document (EAD) यानी रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज का स्वतः विस्तार नहीं मिलेगा.

नया नियम क्या कहता है?

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने स्पष्ट किया कि जो विदेशी नागरिक 30 अक्टूबर 2025 या उसके बाद अपने रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज का नवीनीकरण कराएंगे, उन्हें अब स्वतः विस्तार का लाभ नहीं मिलेगा. यानी, पहले की तरह जब तक नया वर्क परमिट जारी नहीं होता था, तब तक पुराने दस्तावेज की वैधता अपने आप बढ़ जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. अब, आवेदन करने वालों को सभी आवश्यक दस्तावेजों का उचित सत्यापन और जांच पूरी होने के बाद ही नया प्राधिकरण प्राप्त होगा.

सरकार की ओर से क्या कहा गया है?

विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यूएससीआईएस (U.S. Citizenship and Immigration Services) के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा, “किसी विदेशी नागरिक के रोजगार प्राधिकरण या दस्तावेज की वैधता बढ़ाने से पहले उचित जांच और सत्यापन सुनिश्चित करना एक व्यावहारिक और आवश्यक कदम है. सभी विदेशी नागरिकों को यह याद रखना चाहिए कि अमेरिका में काम करना एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं.” विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि सरकार का उद्देश्य आव्रजन प्रक्रिया को और पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है, ताकि फर्जीवाड़े और गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोका जा सके.

भारतीयों पर सीधा असर

यह फैसला विशेष रूप से उन भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है जो आईटी, हेल्थ, रिसर्च और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अमेरिका में काम कर रहे हैं. भारतीय नागरिक अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों की सबसे बड़ी संख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनमें से बहुत से लोग अपने साथी या परिवार के लिए EAD वर्क परमिट का उपयोग करते हैं. अब स्वत: विस्तार प्रक्रिया खत्म होने के कारण, यदि किसी विदेशी नागरिक के दस्तावेज की वैधता खत्म हो जाती है और नया EAD समय पर जारी नहीं होता, तो उसे अस्थायी रूप से काम बंद करना पड़ सकता है. इससे कर्मचारियों की आय पर तो असर पड़ेगा ही उनके भविष्य को लेकर भी मुश्किल आ सकती है.

क्या करना होगा अब?

‘होमलैंड सिक्योरिटी’ विभाग ने विदेशी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपने EAD दस्तावेज की समाप्ति से 180 दिन पहले ही नवीनीकरण का आवेदन सही ढंग से दाखिल करें. विभाग ने कहा, “जो लोग 30 अक्टूबर 2025 से पहले अपने दस्तावेजों के स्वतः विस्तार के तहत काम कर रहे हैं, उन पर यह नियम लागू नहीं होगा. लेकिन इसके बाद दाखिल किए जाने वाले सभी आवेदन नई प्रक्रिया से गुजरेंगे.”

आव्रजन नीति में कड़ा रुख

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम आव्रजन नियंत्रण को सख्त करने की व्यापक नीति का हिस्सा है. एच-1बी वीजा शुल्क में तेज बढ़ोतरी के बाद यह दूसरा बड़ा फैसला है, जो यह संकेत देता है कि ट्रंप प्रशासन आव्रजन प्रणाली में सख्ती और जवाबदेही बढ़ाना चाहता है.

ये भी पढ़ें:-

ISIS के आतंकी ने पाकिस्तान में ली ट्रेनिंग, बॉर्डर पार करते ही हुआ गिरफ्तार, ऑन कैमरा किया पूरा खुलासा

अफगान बॉर्डर पार करने की कोशिश में मारा गया TTP का डिप्टी चीफ अमजद, शहबाज बोले- ‘दुश्मनों को मिला करारा जवाब’

पुतिन का ‘सुनामी लाने वाला हथियार!’ रूस ने टेस्ट किया Poseidon 2M39, जानें इसकी ताकत

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में उनका मुख्य फोकस राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर है. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं. अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं. अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है. इसके साथ ही वह कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं. उत्तर प्रदेश की कालीन नगरी- भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं. तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >