चीनी दादागिरी के बीच US का बड़ा फैसला, ताइवान के साथ 250 अरब डॉलर की ट्रेड डील, टैरिफ भी घटा, किसका फायदा?
अमेरिका-ताइवान के बीच चीन को काउंटर करने के लिए 250 अरब डॉलर का व्यापार समझौता किया गया है. इसके तहत ताइवान के ऊपर टैरिफ भी घटा दिया गया है. इस डील में ताइवान की कंपनियां अमेरिका में निवेश करेंगी. अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि इससे अमेरिका के सेमीकंडक्टर उद्योग को विशेष रूप से गति मिलेगी.
अमेरिका और ताइवान ने बृहस्पतिवार को एक महत्वपूर्ण और व्यापक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है. इसके तहत ताइवान से अमेरिका आने वाली वस्तुओं पर लगाए जाने वाले शुल्क में और कटौती की जाएगी. वहीं इसके बदले ताइवान अमेरिका में लगभग 250 अरब अमेरिकी डॉलर का नया निवेश करेगा. यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है. ताइवान के संदर्भ में, पहले ट्रंप प्रशासन ने वहां से आयात होने वाले सामान पर 32 प्रतिशत शुल्क लगाने का फैसला किया था, जिसे बाद में घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया. अब नए समझौते के तहत इस शुल्क दर को और कम करके 15 प्रतिशत कर दिया गया है. यह दर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदारों, जैसे जापान और दक्षिण कोरिया पर लागू शुल्क के बराबर है.
अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ताइवान के साथ हुआ यह समझौता एक नई आर्थिक साझेदारी की नींव रखेगा. इसके तहत अमेरिका में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे. इनसे रोजगार सृजन और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा. मंत्रालय ने इस करार को एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता बताते हुए कहा कि इससे अमेरिका के सेमीकंडक्टर उद्योग को विशेष रूप से गति मिलेगी. वहीं, ताइवान सरकार ने भी एक बयान जारी कर समझौते के प्रमुख बिंदुओं की पुष्टि की और कहा कि इस करार से दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और आर्थिक साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी.
यह सौदा उन हालिया ट्रेड डील की सीरीज का हिस्सा है, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी व्यापार नीति के तहत अंजाम दिया है. इससे पहले अमेरिका ने यूरोपीय संघ और जापान के साथ भी इसी तरह के व्यापार समझौते किए थे. ये सभी समझौते ट्रंप द्वारा पिछले साल अप्रैल में व्यापार असंतुलन को दूर करने के उद्देश्य से घोषित व्यापक शुल्क योजना के बाद सामने आए हैं. इसी कड़ी में ट्रंप ने चीन के साथ भी रिश्तों को स्थिर करने के लिए एक साल के व्यापारिक संघर्ष-विराम पर सहमति जताई थी.
निवेश का नेतृत्व करेगी टीएसएमसी
ताइवान के कई निर्यात पर शुल्क कम करने से अमेरिकी तकनीकी उद्योग में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा. वहीं इससे चीन के गुस्से का जोखिम और भी बढ़ गया है. समझौते की घोषणा से एक दिन पहले, ताइवान को चीन का हिस्सा बताने वाले बीजिंग ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे ताइवान पर अमेरिका द्वारा किया गया आर्थिक शोषण करार दिया. यह समझौता ट्रंप प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण समय में ताइपेई के साथ संबंध मजबूत करता है, क्योंकि चीन इस द्वीप को अपना मानता है. हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने बीजिंग के साथ पूर्ण व्यापार युद्ध से बचने की कोशिश की है.
TSMC को हुआ शानदार मुनाफा
यह समझौता ऐसे समय में सामने आया है, जब ताइवान स्थित टीएसएमसी ने पूंजीगत खर्च (कैपिटल स्पेंडिंग) में बढ़ोतरी की घोषणा की है. गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को बताया कि वह इस साल अपने कैपिटल स्पेंडिंग में लगभग 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है. TSMC- दुनिया की सबसे बड़ी कंप्यूटर चिप निर्माता कंपनी है. कंपनी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आई तेजी के कारण ताजा तिमाही में अपने शुद्ध मुनाफे में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है. एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों की प्रमुख आपूर्तिकर्ता ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 506 अरब न्यू ताइवान डॉलर (लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर) का शुद्ध लाभ दर्ज किया. पिछले 12 महीनों में टीएसएमसी के ताइवान स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध शेयरों में भी 59 प्रतिशत की तेजी आई है.
अमेरिका में निवेश बढ़ाएगी TSMC
इसके बाद, टीएसएमसी ने अमेरिका में करीब 165 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है. गुरुवार को उसने कहा कि वह एरिजोना में नए प्लांटों के निर्माण की रफ्तार बढ़ा रही है. इसका उद्देश्य एक फैब्रिकेशन प्लांट क्लस्टर बनाना और ग्राहकों की मजबूत मांग को पूरा करना है. लंबे समय से बातचीत किए जा रहे समझौते के तहत ताइवान के चिप निर्माता जैसे टीएसएमसी (TSMC) अमेरिका में उत्पादन बढ़ाएंगे. उन्हें सेमीकंडक्टर और संबंधित उत्पादों पर कम शुल्क देना होगा और कुछ वस्तुएँ बिना शुल्क के आयात कर सकेंगे.
बदले में ताइवान को क्या मिलेगा?
इसके बदले में ताइवानी कंपनियां अमेरिका में सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में 250 अरब डॉलर का निवेश करेंगी, जिसमें टीएसएमसी ने 2025 में पहले ही 100 अरब डॉलर का निवेश किया है. इसके अलावा ताइवान अतिरिक्त 250 अरब डॉलर का क्रेडिट भी प्रदान करेगा ताकि निवेश को और बढ़ाया जा सके. अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लूटनिक के अनुसार, लक्ष्य यह है कि ताइवान की पूरी चिप आपूर्ति श्रृंखला का 40% अमेरिका में स्थापित किया जाए. यदि अमेरिकी निर्माण नहीं होता तो शुल्क 100% तक हो सकता था.
इससे टीएसएमसी के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं को भी फायदा होगा, जिनमें ASML, Lam Research और Applied Materials जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. वहीं, निवेश बढ़ने से Nvidia जैसी कंपनियों को भी लाभ होगा, जो टीएसएमसी पर अपने चिप निर्माण के लिए निर्भर हैं. अमेरिका को अब विदेशों से, खासकर ताइवान से, कंप्यूटर चिप्स पर अत्यधिक निर्भरता से परेशानी है. सेमीकंडक्टर अमेरिका में विकसित हुए थे और वहीं डिजाइन किए जाते हैं. लेकिन सबसे अत्याधुनिक चिप्स ज्यादातर विदेशों, खासकर ताइवान में बनाए जाते हैं.
समझौते के तहत, अमेरिका में विस्तार करने वाली चिप निर्माता कंपनियां निर्माण की तय समय सीमा के दौरान अपनी नई क्षमता के 2.5 गुना चिप्स और वेफर्स बिना अतिरिक्त शुल्क के आयात कर सकेंगी. इसके अतिरिक्त चिप्स पर प्राथमिकता दी जाएगी. टीएसएमसी ने हाल ही में चौथी फैक्ट्री और पहला उन्नत पैकेजिंग प्लांट अमेरिका में बनाने की अनुमति के लिए आवेदन किया है. नए समझौते के तहत ताइवानी ऑटो पार्ट्स, लकड़ी और अन्य उत्पादों पर अधिकतम 15% शुल्क लगेगा. अमेरिका की सर्वोच्च अदालत जल्द ही राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की मंजूरी के व्यापक शुल्क लगाने के अधिकार पर फैसला करेगी. इस फैसले के बाद यह स्पष्ट होगा कि ताइवान या अन्य व्यापार समझौते पर क्या असर पड़ेगा.
ताइवान को अमेरिकी सैन्य सहायता भी मिल रही
अमेरिका, ताइवान को लगातार मदद भेज रहा है. वहीं, चीन की ओर से ताइवान के ऊपर आक्रामक कदम उठाने की लगातार कोशिश की जा रही है. बीते साल 2025 के आखिरी दिनों में ताइवान के चारों ओर चीन ने जस्टिस मिशन 2025 को अंजाम दिया. इसके तहत चीन की तीनों सेना ने भारी सैन्य साजो सामान के साथ ताइवान स्ट्रेट में पांच जगहों पर अभ्यास किया. वहीं, इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने ताइवान को सैन्य मदद का ऐलान किया था. इसके तहत यूएस प्रशासन ताइवान को 10 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार बेचेगा. इनमें मिसाइल, ड्रोन, सॉफ्टवेयर समेत कई कल पुर्जे शामिल हैं. हालांकि, चीन अब भी ताइवान के ऊपर अपनी दादागिरी से बाज नहीं आ रहा है.
चीन की आक्रामक कार्रवाइयां अब भी जारी हैं
ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि उसने अपने क्षेत्र के आसपास 34 पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) के विमान, 11 चीनी नेवी के जहाज और एक आधिकारिक जहाज की मौजूदगी दर्ज की है. इससे पहले गुरुवार को भी राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने ताइवान के आसपास नौ पीएलए विमानों की उड़ानों और 11 पीएलएएन जहाजों की मौजूदगी दर्ज किए जाने की जानकारी दी थी. मंत्रालय के अनुसार, सभी नौ उड़ानों ने मध्य रेखा पार की और ताइवान के उत्तरी, दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी ADIZ में प्रवेश किया था. इस बीच, फोकस ताइवान की रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने कहा कि वह ताइवान की सुरक्षा करते रहेंगे और चीन को किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देंगे. सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में राष्ट्रपति लाई ने देश की रक्षा करने और नागरिकों के जीवन व संपत्ति की सुरक्षा का संकल्प दोहराया.
राष्ट्रपति लाई ने ताइवान की सुरक्षा का वादा दोहराया
राष्ट्रपति लाई ने कहा, “मैं निश्चित रूप से राष्ट्र की रक्षा करूंगा और किसी भी सूरत में चीनी दबाव या चीन के प्रभाव को ताइवान तक पहुंचने नहीं दूंगा.” उन्होंने गुरुवार को यह भी कहा कि ताइवान के लोगों के खिलाफ चीन का “सीमा-पार दबाव” यह साबित करता है कि बीजिंग का अधिकार क्षेत्र ताइवान तक नहीं फैलता और यह पुष्टि करता है कि ताइवान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) का हिस्सा नहीं है. राष्ट्रपति लाई ने चीन में जन्मे जापानी सांसद हेई सेकी की हालिया ताइवान यात्रा का हवाला दिया. उन्हें चीन ने प्रतिबंधित कर रखा है और मेन लैंड चीन में प्रवेश से रोक दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि रिपब्लिक ऑफ चाइना (ROC- ताइवान का आधिकारिक नामः और पीआरसी एक-दूसरे के अधीन नहीं हैं.
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