भारत पर लिंडसे ग्राहम बिल के तहत संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर पूछे गए सवाल पर व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे को मिलकर सुलझा लेंगे. उनका यह बयान भारत पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की आशंका के बीच आया है.
“अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी रिश्ते हैं. दोनों नेता इस मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे. मैं इसमें दखल नहीं देना चाहता.” व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने यह बात रूस से जुड़े प्रतिबंध विधेयक पर पूछे गए सवाल के जवाब में कही.
इस विधेयक का नाम दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है. इसके तहत रूस से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने वाले टॉप पांच देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है. इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं.
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रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े इस विधेयक को सीनेट में मंजूरी दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के निधन के कुछ दिनों बाद मिली. निधन से एक दिन पहले ग्राहम ने बताया था कि सरकार और बिल के प्रमुख समर्थक सीनेटरों के बीच इसे लेकर सहमति बन गई है. CNN के मुताबिक, ग्राहम के वॉशिंगटन में अंतिम संस्कार के कुछ घंटों बाद सीनेट ने बिल पर पहली प्रोसिजरल वोटिंग की थी.
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अमेरिकी सीनेट से बिल पास होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 फीसदी टैरिफ लग जाएगा. इसे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलनी होगी और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर जरूरी होंगे. इसके बाद भी टैरिफ लागू करने के लिए सरकार को कुछ और कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ सकती हैं.
