अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘एक्सियोस’ ने अपनी खबर में कहा कि मंगलवार (19 मई) को ट्रंप से बातचीत के बाद नेतन्याहू ‘‘बेहद खफा थे’’. खबर में कहा गया कि इजराइली प्रधानमंत्री ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करने के अलावा उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर शासन को कमजोर करने के लिए दोबारा हमले शुरू करने के पक्ष में हैं. ट्रंप ने रविवार (17 मई) को कहा था कि उन्होंने मंगलवार के लिए निर्धारित ईरान पर हमले की योजना को टाल दिया है. उन्होंने कहा कि कतर और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई अरब देशों के अनुरोध के बाद यह फैसला लिया गया.
समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है : ट्रंप
‘एक्सियोस’ की खबर के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद कम करने के उद्देश्य से कतर और पाकिस्तान ने अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों के सुझावों के साथ एक नया शांति प्रस्ताव तैयार किया है. खबर में कहा गया है कि नेतन्याहू को बातचीत की प्रक्रिया को लेकर संशय है. उनका मानना है कि ईरान की सैन्य ताकत को और कमजोर करने के लिए युद्ध फिर से शुरू किया जाना चाहिए. वहीं, ट्रंप लगातार यह कह रहे हैं कि समझौते की संभावना अब भी बनी हुई है, लेकिन यदि कोई सहमति नहीं बनती तो वह युद्ध दोबारा शुरू करने के लिए तैयार हैं.
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स्थिति बिल्कुल निर्णायक मोड़ पर : ट्रंप
ट्रंप ने बुधवार (20 मई) को ‘कोस्ट गार्ड’ अकादमी में कहा कि अमेरिका और ईरान फिलहाल “समझौते और युद्ध के बीच की सीमा” पर खड़े हैं. कनेक्टिकट स्थित कोस्ट गार्ड अकादमी से वाशिंगटन लौटने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि स्थिति बिल्कुल निर्णायक मोड़ पर है. अगर हमें सही जवाब नहीं मिले तो हालात बहुत तेजी से बदल सकते हैं. हम पूरी तरह तैयार हैं. हमें संतोषजनक जवाब चाहिए.
