US Israel Regime Change Iran: ईरान को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजरायल का सैन्य अभियान केवल ईरान के परमाणु और मिसाइल ढांचे को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे ईरान में सत्ता परिवर्तन की बड़ी योजना भी शामिल थी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शुरुआती रणनीति के तहत ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को दोबारा सत्ता में लाने की कोशिश की जानी थी. हालांकि यह योजना शुरुआती चरण में ही बिखर गई.
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह योजना कई स्तरों पर बनाई गई थी. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का मकसद ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करना, देश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना और फिर नई सत्ता व्यवस्था के लिए रास्ता बनाना था. सार्वजनिक तौर पर अमेरिकी प्रशासन लगातार यह कहता रहा कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल ईरान की परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना था. लेकिन, रिपोर्ट में दावा किया गया कि इजरायल ने इससे कहीं बड़ा खाका तैयार किया था और उसमें अहमदीनेजाद को केंद्रीय भूमिका दी गई थी.
खामेनेई की मौत से शुरू हुआ संकट
रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के शुरुआती घंटों में ही बड़ा घटनाक्रम हुआ. 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य नेता अमेरिका और इजरायली हमलों में मारे गए. खामेनेई करीब 37 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे थे. उनकी मौत के बाद ईरान गंभीर राजनीतिक संकट में घिर गया और देशभर में 40 दिनों के शोक की घोषणा की गई.
रिपोर्ट में कहा गया कि इजरायल को उम्मीद थी कि खामेनेई के हटते ही ईरानी सत्ता ढांचा बिखर जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कई वरिष्ठ अधिकारी मारे जरूर गए, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी खत्म हो गए जिनसे अमेरिका को राजनीतिक समझौते की उम्मीद थी.
अहमदीनेजाद को ‘आजाद’ कराने की कोशिश?
रिपोर्ट में दावा किया गया कि इसी दौरान तेहरान के पूर्वी हिस्से में एक और गुप्त अभियान चलाया गया. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इजरायल ने उस इलाके पर हमला किया जहां अहमदीनेजाद नजरबंद थे. हमला सीधे उनके घर पर नहीं बल्कि उस सुरक्षा चौकी पर किया गया, जहां ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान तैनात थे. बाद में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में सुरक्षा चौकी तबाह दिखी, जबकि अहमदीनेजाद का घर सुरक्षित था. रिपोर्ट के मुताबिक हमले में अहमदीनेजाद घायल हुए, लेकिन उनकी जान बच गई.
योजना थी सत्ता परिवर्तन की?
रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका और इजरायल की योजना अहमदीनेजाद को नजरबंदी से मुक्त कर उन्हें खामेनेई के बाद नई सत्ता व्यवस्था अहमदीनेजाद के एक करीबी सहयोगी ने भी ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ से पुष्टि की कि पूर्व राष्ट्रपति ने अपने घर पर हुए हमले को खुद को आजाद कराने की कोशिश के रूप में देखा था. सहयोगी के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि अहमदीनेजाद ईरान का नेतृत्व करने और ‘देश की राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य स्थिति’ को संभालने में सक्षम हैं.
सहयोगी ने कहा कि निकट भविष्य में अहमदीनेजाद ईरान में ‘बहुत महत्वपूर्ण भूमिका’ निभा सकते थे. उसने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका उन्हें उसी तरह स्थापित करना चाहता था जैसे वेनेजुएला में डेल्सी रोड्रिगेज को किया था, जिन्होंने निकोलस मादुरो को हटाए जाने के बाद सत्ता संभाली और बाद में ट्रंप प्रशासन के साथ करीबी सहयोग किया.अहमदीनेजाद के करीबी सहयोगी ने भी कथित तौर पर माना कि हमला उन्हें मुक्त कराने की कोशिश था.
हमले के बाद बदले अहमदीनेजाद
रिपोर्ट के अनुसार, हमले में बाल-बाल बचने के बाद अहमदीनेजाद इस पूरी योजना से निराश हो गए. इसके बाद वह सार्वजनिक जीवन से अचानक गायब हो गए और अब उनका ठिकाना स्पष्ट नहीं है. उनके पीछे हटने से सत्ता परिवर्तन की पूरी रणनीति कमजोर पड़ गई.
लेकिन योजना क्यों फेल हुई?
अमेरिका ईरान में अपने सैनिक नहीं उतारना चाहता. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अंदर से ही लीडरशिप को खड़ा होना पड़ेगा. वहीं इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भी कई बार कहा कि जनता को ही शासन को बदलना पड़ेगा. लेकिन अमेरिका और इजरायल की ईरान में सत्ता परिवर्तन की इच्छा पूरी नहीं हो पाई.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल की कई उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं. ईरान का राजनीतिक ढांचा पूरी तरह नहीं टूटा, बड़े जनविद्रोह नहीं हुए और कुर्द समूहों ने भी वैसी भूमिका नहीं निभाई जैसी उम्मीद थी. सबसे अहम बात यह रही कि अहमदीनेजाद, जिन्हें इस पूरी योजना का अहम चेहरा माना जा रहा था, अचानक सार्वजनिक जीवन से गायब हो गए और सत्ता परिवर्तन की रणनीति अधूरी रह गई.
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क्यों अहम थे अहमदीनेजाद?
महमूद अहमदीनेजाद 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रहे. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने होलोकॉस्ट पर विवादित बयान दिए, विरोध प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई की और ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया. हालांकि, अमेरिका-इजरायल द्वारा अहमदीनेजाद को ईरान का नेता के रूप में चुनना थोड़ा हैरान करता है. क्योंकि अपने कार्यकाल के दौरान ‘इजराइल को नक्शे से मिटा देने’ जैसे बयानों के लिए चर्चित रहे.
हालांकि बाद के वर्षों में उनका टकराव खामेनेई के करीबी नेताओं से बढ़ गया. उन्होंने ईरान के मौजूदा शासकों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना शुरू कर दी थी. इसके बाद उन्हें नजरबंद रखा गया था और चुनाव लड़ने से भी रोका गया था. अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि यही दूरी उन्हें सत्ता परिवर्तन की योजना में उपयोगी बना सकती थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा अहमदीनेजाद को संभावित नए नेता के रूप में देखना इस बात का संकेत है कि फरवरी में शुरू किया गया युद्ध तेहरान में अधिक अनुकूल नेतृत्व स्थापित करने की उम्मीद के साथ शुरू किया गया था.
सिर्फ हवाई हमले नहीं, बड़ी रणनीति भी थी शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल की व्यापक योजना केवल एयरस्ट्राइक तक सीमित नहीं थी. इसमें कुर्द लड़ाकों को सक्रिय करना, प्रभाव अभियान चलाना और अहम बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाकर जनता में यह संदेश देना शामिल था कि ईरानी शासन नियंत्रण खो चुका है. उम्मीद की जा रही थी कि देश में अराजकता फैलने के बाद कोई वैकल्पिक सरकार उभर सकती है.
