अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की एक बड़ी नौसैनिक फौज ईरान की तरफ बढ़ रही है. ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ईरान की एक्टिविटी पर कड़ी नजर रख रहा है, लेकिन उन्होंने अभी सीधे हमला करने की बात नहीं कही. ये बयान उन्होंने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लौटते समय एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिए.
अमेरिकी नौसैनिक फौज ईरान की ओर
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोत खाड़ी की तरफ बढ़ रहे हैं, ये सिर्फ एक चेतावनी और तैयारी का कदम है. उन्होंने कहा कि हम ईरान पर नजर रख रहे हैं. आप जानते हैं कि हमारी कई नौकाएं वहां जा रही हैं, सिर्फ तैयारी के लिए, हमारे पास ईरान की तरफ एक बड़ी फौज जा रही है.
ट्रंप ने इसे आर्माडा और भारी बेड़ा (बड़ा फोर्स) बताया, लेकिन जोर देकर कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि बल का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी इस डायरेक्शन में भेजा जा रहा है.
ट्रंप ने सीधे हमला करने से किया इनकार
राष्ट्रपति ट्रंप ने सीधे ईरान पर हमला करने की योजना की पुष्टि नहीं की. ट्रंप ने कहा कि यह केवल डिटेरेंस यानी रोकने का कदम है. शायद हमें इसका इस्तेमाल करना न पड़े. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वे ईरान से बातचीत के लिए खुले हैं.
हालांकि, ट्रंप बार-बार कह चुके हैं कि सभी ऑप्शन खुले हैं. हाल ही में अमेरिका ने इजराइल के 12-दिन के सैन्य अभियान का समर्थन किया था, जो ईरान के न्यूक्लियर और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को कमजोर करने के लिए था. इस कदम ने रिजनल टेंशन को और बढ़ा दिया है.
ईरान में विरोध और बढ़ता मौत का आंकड़ा
ईरान में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं. स्वतंत्र समूहों के मुताबिक, अब तक इस विरोध प्रदर्शन में 5,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सरकारी आंकड़े कम हैं, लेकिन इंटरनेट बंद और इंडिपेंडेंट रिपोर्टिंग की कमी के कारण सही नंबर्स जानना मुश्किल है. ये विरोध दिसंबर में इकोनॉमिक डिफिकल्टीइस की वजह से शुरू हुए, लेकिन जल्दी ही यह राजनीतिक असंतोष और सरकार की पावर को चुनौती देने वाला आंदोलन बन गया.
ट्रंप का दावा- प्रदर्शनकारियों की फांसी रुकी
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी दबाव की वजह से ईरानी सरकार ने 837 प्रदर्शनकारियों की फांसी रोक दी. हालांकि इंडिपेंडेंट रूप से इसकी पुष्टि मुश्किल है, लेकिन ट्रंप ने इसे ईरान पर सतर्क रहने और चेतावनी देने का कारण बताया.
ईरान पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया
भले ही अमेरिका फौज भेज रहा है, दोनों देशों ने संकेत दिया है कि बातचीत अभी भी संभव है. एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि वे संकट पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन गलत कदम उठाने पर स्थिति और बिगड़ सकती है. यूरोप के कुछ देशों ने ईरान में सुधारवादी आंदोलनों का समर्थन करने की अपील की और कुछ ईरानी सैन्य समूहों को आतंकवादी घोषित करने की बात कही, जिससे ईरान पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया.
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