US Iran Conflict: अमेरिका कर सकता है ईरान पर हमला, इजराइल हाई अलर्ट पर, प्रदर्शन जारी

US Iran Conflict: ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका और इजराइल की सख्त निगरानी जारी है. राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को आजादी दिलाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जबकि तेहरान ने अमेरिका और इजराइल को कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है. प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा में 116 लोगों की मौत और 2,600 से ज्यादा गिरफ्तारी हुई है. महंगाई और आर्थिक संकट से भड़के ईरानियों का गुस्सा तेज, इंटरनेट बंद और सड़कें बंद है. पूरा मध्य पूर्व ट्रंप के अगले कदम पर नजर रखे हुए है.

By Govind Jee | January 11, 2026 3:28 PM

US Iran Conflict: ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं. सड़कों पर गुस्सा है, सरकार के खिलाफ नारे हैं और जवाब में सख्ती. इसी बीच अमेरिका और इजराइल की हलचल ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका ईरान में कोई बड़ा सैन्य कदम उठाने वाला है? और क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसका आदेश दे सकते हैं?

US Iran Conflict in Hindi: इजराइल हाई अलर्ट पर

न्यूज एजेंसी राउटर्स के मुताबिक, ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच इजराइल ने खुद को हाई अलर्ट पर रखा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन ईरानी सूत्र, जो हाल ही में हुई इजराइली सुरक्षा बैठकों में मौजूद थे, उन्होंने इसकी पुष्टि की है. हालांकि यह साफ नहीं किया गया कि हाई अलर्ट का मतलब जमीनी स्तर पर क्या है. इजराइल को डर है कि अगर अमेरिका ने ईरान में दखल दिया, तो इसका सीधा असर पूरे इलाके की सुरक्षा पर पड़ेगा.

ट्रंप का खुला संदेश- ईरान आजादी की ओर देख रहा है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त और साफ संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को मौजूदा सरकार से आजादी दिलाने में मदद करने को तैयार है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा कि ईरान शायद पहली बार इतनी करीब से आजादी को देख रहा है. अमेरिका मदद के लिए तैयार है! ट्रंप ने ईरानी सरकार को चेतावनी भी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलती रही, तो अमेरिका जवाब देगा.

यह बयान ऐसे समय आया है, जब वॉशिंगटन में ईरान की कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है. राउटर्स के अनुसार, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच शनिवार को फोन पर बात हुई. इस बातचीत में ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावना पर चर्चा की गई. इसके अलावा, सप्ताहांत में हुई इजराइली सुरक्षा बैठकों में भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया.

US Iran Conflict in Hindi: ट्रंप के सामने कई विकल्प 

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को ईरान को लेकर कई सैन्य विकल्प बताए गए हैं. इनमें तेहरान के कुछ गैर-सैन्य ठिकानों पर हमला करने का विकल्प भी शामिल है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि कुछ योजनाएं सीधे उन ईरानी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने से जुड़ी हैं, जो प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

पहले भी ईरान पर हमला कर चुका है अमेरिका

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने ईरान की जमीन पर हमला किया हो. जून महीने में अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन ठिकानों पर कम से कम छह बंकर-बस्टर बम गिराए थे. इनमें फोर्डो का न्यूक्लियर ठिकाना भी शामिल था, जो पहाड़ के नीचे करीब 300 फीट गहराई में बना है. ये हमले ईरान की ओर से इजराइल को परमाणु धमकी देने के बाद हुए थे और इन्हें इज़राइली सैन्य हमलों के साथ मिलकर अंजाम दिया गया था.

खामेनेई का पलटवार- ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने हैं

ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने अमेरिका और ट्रंप पर कड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने हैं और उन्हें अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए. खामेनेई ने यह भी दावा किया कि ईरान में हो रहे प्रदर्शन अमेरिका को खुश करने के लिए किए जा रहे हैं. ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इजराइल वैध लक्ष्य होंगे.

संसद में सांसद डेथ टू अमेरिका के नारे लगाते दिखे. कालीबाफ ने कहा कि ईरान सिर्फ हमले के बाद ही नहीं, बल्कि किसी भी खतरे के संकेत पर पहले ही कार्रवाई कर सकता है. कालीबाफ ने यह भी कहा कि ईरान की जनता को पता होना चाहिए कि गिरफ्तार किए गए लोगों के साथ बेहद सख्ती से निपटा जाएगा और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी.

116 मौतें, 2600 से ज्यादा गिरफ्तार- हालात बेकाबू

एसोसिएटेड प्रेस एपी के अनुसार, ईरान में जारी प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. ये प्रदर्शन पिछले दो हफ्तों से लगातार चल रहे हैं और 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं. तब महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशभर में आंदोलन हुआ था. ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जब ईरानी मुद्रा रियाल बुरी तरह गिर गई.

महंगाई आसमान छूने लगी और आम लोग परेशान हो गए. व्यापारी, छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए. तेहरान के पूनक इलाके से आए वीडियो जो संभवतः स्टारलिंक के जरिए भेजे गए में दिखा कि लोग मोबाइल की लाइट जलाकर विरोध कर रहे हैं. कहीं बर्तन पीटे गए, कहीं पटाखे फोड़े गए. सरकार ने हालात काबू में करने के लिए इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद कर दी हैं.

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