राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने रविवार तड़के ईरान पर एक बार फिर हवाई हमले किए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह कार्रवाई जॉर्डन में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के कुछ घंटे बाद की गई. अमेरिका का कहना है कि यह हमला अपने सैनिकों पर हुए हमले का जवाब है और क्षेत्र में बढ़ते खतरों को रोकने के लिए किया गया.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि जॉर्डन में हुए हमले के बाद एक अमेरिकी सैनिक अब भी लापता है. वहीं, चार अन्य सैनिक घायल हुए थे, जिन्हें इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. मारे गए दोनों सैनिकों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है. उनके परिजनों को सूचना देने के बाद ही अमेरिकी सेना उनके नाम जारी करेगी.
IRGC से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया
सेंटकॉम (CENTCOM) ने बताया कि इस सैन्य अभियान का मुख्य मकसद ईरान की उस ताकत को कमजोर करना था, जिससे वह होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है. अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि जॉर्डन में हुए हमले के लिए जिम्मेदार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों और लड़ाकों को भी निशाना बनाया गया.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने क्या कहा ?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि जॉर्डन में ईरानी हमलों में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं. उन्होंने बयान में कहा कि उनका बलिदान हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा. हेगसेथ ने साफ किया कि अमेरिका अपने सैनिकों पर हुए हमले का जवाब देने और क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाता रहेगा.
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ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज के मुताबिक, अमेरिकी सेना के ताजा हवाई हमलों में दक्षिणी बंदरगाह शहर सीरिक (Sirik) के आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया. इसके अलावा हाजीआबाद (Hajiabad) के पास भी हमले किए गए. हालांकि, अब तक इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है. स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है.
