मैदान-ए-जंग में दौड़ रहा था रूसी घुड़सवार, यूक्रेनी ड्रोन ने दौड़ाकर मारा, धमाके से उड़ा सैनिक, देखें Video
Ukrainian drone targets Russian soldier on horseback: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि यूक्रेन के ड्रोन ने रूसी घुड़सवार सैनिक को निशाना बनाया. इसमें दिखता है कि एक ड्रोन ऊपर से उसकी चाल पर नजर रखता है. कुछ ही समय बाद, जैसे ही वह भागने की कोशिश करता है, ड्रोन हमला कर देता है.
Ukrainian drone targets Russian soldier on horseback: नए जमाने के हथियार अब मैदान ए जंग में नए करतब दिखा रहे हैं. इस साल युद्ध मैदान में यह हथियार हैं ड्रोन. एक बेहद अहम हथियार के रूप में उभरे हैं ड्रोन यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी राहत लेकर आए हैं. अपने लाखों सैनिकों को गंवाने के बाद पैदल सैनिकों की कमी को यूक्रेन ड्रोन से पूरा कर रहा है. ड्रोन के व्यापक इस्तेमाल ने कीव को रूसी सेनाओं के खिलाफ अपनी पकड़ बनाए रखने में मदद की है. यूक्रेनी सेना द्वारा एक नया वीडियो साझा किया है. इस फुटेज में कथित तौर पर रूसी सैनिकों को घोड़ों पर चलते हुए दिखाया गया है, लेकिन अगले ही पहल वह सैनिक के ऊपर हमला करता है और एक धमाके के साथ वह उड़ जाता है.
यह बिना तारीख वाला वीडियो यूक्रेन की 92वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की 5वीं असॉल्ट बटालियन ने टेलीग्राम पर पोस्ट किया है. वीडियो में एक सैनिक खुले इलाके में घोड़े पर सवार होकर आगे बढ़ता दिखाई देता है और एक ड्रोन ऊपर से उसकी चाल पर नजर रखता है. कुछ ही समय बाद, जैसे ही वह भागने की कोशिश करता है, ड्रोन हमला कर देता है. इसके थोड़ी देर बाद एक दूसरा घुड़सवार सैनिक भी नजर आता है, तभी एक और विस्फोट होता है, जिससे घोड़ा जमीन पर गिर पड़ता है और सवार उससे नीचे जा गिरता है. बाद में घोड़ा फिर खड़ा होता है और भाग जाता है, जबकि सैनिक वहीं पीछे छूट जाता है.
रूसी सेना घोड़े का उपयोग करने के लिए मजबूर
हालांकि प्रभात खबर इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकते. वीडियो के साथ जारी बयान में यूक्रेनी यूनिट ने कहा कि भारी नुकसान के बाद रूसी सेनाएं अब तेजी से घोड़ों का सहारा लेने पर मजबूर हो रही हैं. कीव पोस्ट ने भी इसी तरह की बार रखी है. उसका कहना है कि रूस अपने ‘मीट असॉल्ट’ के दौरान इतनी तेजी से उपकरण खो रहे हैं कि उन्हें घोड़ों और रसद के लिए गधों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. वीडियो के साथ यूक्रेनी ब्रिगेड ने टेलीग्राम पर लिखा कि 92वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की 5वीं असॉल्ट बटालियन के ड्रोन ऑपरेटर जैसे ही दुश्मन को देखते हैं, उसे ‘माइनस’ कर देते हैं.
युद्ध में घोड़े नई बात नहीं, लेकिन आज खतरनाक
युद्ध में घोड़ों का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है. इतिहास में गश्त और तेज आवाजाही के लिए घुड़सवार इकाइयों का इस्तेमाल होता रहा है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी, खासकर 1941 में जर्मन और सोवियत सेनाओं के बीच हुई लड़ाइयों में, इसका उदाहरण देखने को मिला था. हाल के महीनों में रूसी सेनाओं ने ड्रोन हमलों से बचने के लिए अन्य कम-तकनीकी उपाय भी आजमाए हैं, जिनमें मोटरसाइकिल यूनिट्स शामिल हैं. रूस और यूक्रेन इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव पर चर्चा करन रहे हैं. इसके बावजूगद फरवरी 2022 से चल रहा यह युद्ध अब धीरे-धीरे चौथे साल में एंट्री करने वाला है. अब तक इस युद्ध में लाखों लोग मारे जा चुके हैं. हालांकि अभी तक पूरी तरह से इस संख्या का अनुमान लगाना मुश्किल है.
ड्रोन पर यूक्रेन की भारी निर्भरता
हालांकि ड्रोन के जमाने में घुड़सवार आक्रमण का खुला न्यौता हैं. यह फुटेज साफ दिखाती है कि यूक्रेन के लिए ड्रोन कितने जरूरी बन चुके हैं. सीमित पैदल सैनिकों की वजह से कीव ने रूसी ठिकानों की निगरानी और हमले के लिए बड़े पैमाने पर इस तरह की ड्रोन प्रणालियों पर भरोसा किया है. यूक्रेन की लगभग 600 मील लंबी फ्रंट लाइन पर निगरानी ड्रोन तैनात हैं. निगरानी ड्रोन अब उस टोही भूमिका को निभा रहे हैं. जब रूसी सैनिक आगे बढ़ते हैं, तो सबसे पहले विस्फोटक फर्स्ट-पर्सन-व्यू (FPV) ड्रोन भेजे जाते हैं, जबकि बड़े ड्रोन ऊपर से बम और गोला-बारूद गिराते हैं. आमतौर पर पैदल सैनिकों की गोलीबारी तभी होती है, जब कोई दुश्मन सैनिक इस हवाई जाल को पार कर लेता है.
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