UAE Etihad Airways: इन कर्मचारियों को तुरंत यूएई छोड़ने का आदेश दिया गया है. यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के रिश्तों में तनाव है और यूएई ने पाकिस्तान से अपना 3 अरब डॉलर (करीब 28,000 करोड़ रुपये) का कर्ज वापस मांगा है.
बिना नोटिस और एचआर प्रक्रिया के कार्रवाई
सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, एतिहाद एयरवेज ने इन कर्मचारियों को निकालने में काफी जल्दबाजी दिखाई और किसी भी कॉर्पोरेट नियम का पालन नहीं किया गया. आमतौर पर किसी बड़ी कंपनी से कर्मचारी को निकालते समय जो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है, उसे यहाँ नजरअंदाज किया गया. इस अचानक हुई कार्रवाई ने वहां रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों और पाकिस्तानी समुदाय के बीच डर का माहौल बना दिया है.
इमिग्रेशन ऑफिस बुलाकर थमाया देश छोड़ने का फरमान
सीएनएन-न्यूज18 के सूत्रों ने बताया कि इन कर्मचारियों को कंपनी के एचआर (HR) विभाग ने कोई जानकारी नहीं दी थी. इसके बजाय, उन्हें सीधे इमिग्रेशन ऑफिस बुलाया गया और अगले 48 घंटों के भीतर यूएई छोड़ने का लिखित आदेश दे दिया गया. निकाले गए लोगों में कई सीनियर प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं, जिनमें से एक व्यक्ति तो पिछले 20 सालों से इस एयरलाइन में अपनी सेवाएं दे रहा था. केवल 2 दिन का समय मिलने की वजह से ये लोग अपने पैसे और परिवार की शिफ्टिंग को लेकर परेशान हैं.
एतिहाद एयरवेज ने साधी चुप्पी
फिलहाल एतिहाद एयरवेज ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. हालांकि एयरलाइन सेक्टर में छंटनी होना आम बात है, लेकिन जिस तरह से इमिग्रेशन अथॉरिटी को शामिल कर तुरंत देश से बाहर जाने का आदेश दिया गया है, उससे एक्सपर्ट्स इसे केवल कंपनी का फैसला नहीं मान रहे हैं. पारदर्शिता की कमी की वजह से इस मामले में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
बिगड़ते कूटनीतिक रिश्तों का असर
सीएनएन-न्यूज18 के विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल लेबर या नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान और यूएई के बीच ठंडे होते रिश्तों का बड़ा संकेत है. अबू धाबी का यह कड़ा रुख पाकिस्तान के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक विदेशों में काम करने वाले अपने नागरिकों द्वारा भेजे गए पैसों पर टिकी है.
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पाकिस्तान की बढ़ती आर्थिक मुश्किलें
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और उसे बार-बार बाहरी देशों से मदद लेनी पड़ रही है. जानकारों के अनुसार, इस तरह की घटनाएं दिखाती हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति कमजोर हो रही है. अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर होने की वजह से पाकिस्तान अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी पिछड़ता जा रहा है, जिसका सीधा नुकसान वहां के आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है.
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