Teen Contraceptive Law: रवांडा की संसद ने सोमवार को हेल्थकेयर सेवा विधेयक में संशोधन करते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. अब 15 साल या उससे अधिक उम्र की किशोरियां बिना माता-पिता की अनुमति के गर्भनिरोधक साधनों का उपयोग कर सकेंगी. यह फैसला देश में बढ़ती किशोरावस्था में गर्भधारण की दर को रोकने के लिए लिया गया है, लेकिन यह निर्णय देश में सामाजिक और राजनीतिक बहस की वजह बन गया है.
Teen Contraceptive Law: 40% आबादी 15 साल से कम उम्र की
करीब 13 मिलियन की आबादी वाले रवांडा में 40 प्रतिशत से ज्यादा लोग 15 वर्ष से कम उम्र के हैं. किशोर प्रेग्नेंसी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पहले की 18 वर्ष की आयु सीमा के कारण हजारों किशोरियों को अनचाहे गर्भ का सामना करना पड़ा. अकेले पिछले साल ऐसे 22,000 मामले सामने आए.
Teen Contraceptive Law in Hindi: संसद में पेश आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
संसद में पेश एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में लगभग 1 लाख किशोरियों को अनचाहे गर्भधारण का सामना करना पड़ा, जिससे बड़ी संख्या में लड़कियों ने स्कूल छोड़ दिए. यह शिक्षा और सामाजिक विकास के लिहाज से एक गंभीर चुनौती बन चुका है. ‘ग्रेट लेक्स इनिशिएटिव फॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेवलपमेंट’ के प्रोग्राम डायरेक्टर जॉन स्कैरियस ने कहा है कि यह साबित हो चुका है कि रवांडाई किशोरियां 15 वर्ष से पहले ही यौन रूप से सक्रिय हो जाती हैं. ऐसे में यह फैसला व्यावहारिक और प्रगतिशील है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कानून से अनचाही प्रेग्नेंसी में कमी आएगी, स्कूल ड्रॉपआउट्स घटेंगे और गर्भपात से होने वाली मौतों में भी कमी आएगी.
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पहले इम्प्लांट्स और पिल्स
शुरुआत में संसद ने किशोरियों को गर्भनिरोधक गोलियां और इम्प्लांट्स की सुविधा देने की बात कही थी, लेकिन बाद में कंडोम को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी. हालांकि, रवांडा में गर्भपात अब भी अवैध है. केवल बलात्कार, अनाचार या जबरन विवाह की स्थिति में इसकी अनुमति दी जाती है.
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