‘शील्ड ऑफ जूडा’ क्या है? इजरायल का मिशन, जिसके तहत ईरान पर हुआ हमला

इजरायल ने शनिवार को ईरान के ऊपर हमला कर दिया. अमेरिकी सेना के साथ मिलकर किए गए इस हमले में कम से कम 30 ठिकानों को निशाना बनाया गया. इजरायल ने इस मिशन को शील्ड ऑफ जूडा (Shield of Judah) नाम दिया है. आखिर इसका मतलब क्या है?

Shield of Judah: इजरायल ने महीनों से सुलग रही चिंगारी को शनिवार को हवा दे दी. इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर दिया. इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने दावा किया इस अटैक में ईरान के 30 ठिकानों को निशाना बनाया गया. इजरायल ने इसे एहतियाती हमला बताया, ताकि ईरान से होने वाले संभावित हमले को टाला जा सके. इजरायल ने इस सैन्य अभियान को ‘शील्ड ऑफ जूडा’ नाम दिया है. इसका क्या अर्थ है? आइए जानते हैं. 

‘शील्ड ऑफ जूडा’ नाम यहूदी परंपरा के प्राचीन प्रतीकों से जुड़ा है, जो सुरक्षा, प्रभुत्व और नेतृत्व का संकेत देता है. इसका संबंध बाइबिल में वर्णित यहूदा के कबीले से माना जाता है, जिसे पारंपरिक रूप से शेर के प्रतीक से जोड़ा जाता है और जो शक्ति व रक्षा का प्रतीक है. ‘शील्ड ऑफ जूडा’ शब्द सुरक्षा और बचाव की छवि पेश करता है. जहां ‘शील्ड’ रक्षा का प्रतीक है और ‘जूडा’ यहूदी लोगों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र की ओर इशारा करता है. 

इस नाम के जरिए इजरायल यह संदेश देना चाहता है कि यह अभियान ईरान से बताए जा रहे तात्कालिक सुरक्षा खतरे से अपने देश और नागरिकों की रक्षा के लिए किया जा रहा है. हालांकि ‘मागेन डेविड’ यानी ‘शिल्ड ऑफ डेविड’ यहूदी समुदाय का सबसे जाना-पहचाना प्रतीक है, लेकिन ‘शील्ड ऑफ जूडा’ विशेष रूप से राजसी वंश परंपरा और संरक्षक की भूमिका को दर्शाता है. इसकी जड़ें उत्पत्ति ग्रंथ में मिलती हैं, जहां यहूदा को ‘युवा शेर’ के रूप में वर्णित किया गया है. यानी इसे रोर ऑफ लायन यानी शेर की दहाड़ भी कहा जा सकता है. 

नाम के जरिए इजरायल क्या सिद्ध करना चाहता है?

इस नाम के जरिए इजरायल यह पेश करना चाहता है कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए ढाल बनाकर हमला करना जानता है. वह और उसके सहयोगी अब इंतजार नहीं करेंगे. इसके जरिए वह अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक जड़ों को भी पेश कर रहा है. इजरायल ने हमले और नाम के जरिए यह पेश किया है कि अपनी सुरक्षा के लिए अब वह किसी भी हद तक जा सकता है. शील्ड ऑफ जूडा के तहत यह इजरायल का यह आक्रामक बचाव है.

इंडिया टुडे से बात करते हुए इजरायली रक्षा बल (IDF) के स्पेशल फोर्सेज सैनिक स्टाव कोहेन ने इसकी व्याख्या अपने शब्दों में की. उन्होंने कहा, ‘यहां मध्य पूर्व में हम सिर्फ ताकत, गरिमा और शक्ति की भाषा समझते और बोलते हैं. बातचीत कभी काम नहीं कर सकती. ईरान के मामले में कूटनीति कभी कारगर नहीं हो सकती, जब तक उसके साथ बल का इस्तेमाल न किया जाए.’

‘राइजिंग लायन’ नाम से पहले भी हमला हो चुका है

टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले का नाम ‘लायंस रोर’ रखा है. इससे पहले इजरायली रक्षा बल (IDF) ने इन हमलों के लिए कोई दूसरा नाम रखा था. इससे पहले जून 2025 में ईरान को निशाना बनाकर की गई IDF की कार्रवाई का नाम ‘राइजिंग लायन’ था. उस 12 दिन की कार्रवाई में ईरान के न्यूक्लियर साइट पर हमले किए गए. इस अमेरिकी हमले में इस्फहान, फोर्दो और नतांज में न्यूक्लियर इनरिचमेंट को तबाह करने का दावा किया गया था.

अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट में बंपर मात्रा में

इजरायली हमले का यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक बातचीत चलने की खबरें थीं. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह साझा हमला है. उन्होंने ईरानी लोगों से कहा कि वे घरों से बाहर न निकलें, क्योंकि आने वाले समय में बम हर जगह गिरेंगे. इससे अब बड़े सैन्य टकराव की आशंका और गहरा गई है. अमेरिकी सेना की भारी भरकम साजो-सामान, यथा- एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट और मिसाइल बम के साथ कई सारे बेसेज पर तैनात लगभग 40,000-50,000 सैनिक मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. ईरान के ऊपर इजरायल और अमेरिका का संयुक्त हमला ईरान के लिए काफी मुश्किल खड़ी कर सकता है.

तेहरान में हुए कई धमाके

स्थानीय मीडिया की कई रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान के मध्य और पूर्वी हिस्सों में कई जगहों पर मिसाइलें गिरीं. राजधानी के कुछ इलाकों में धुएं के घने गुबार उठते देखे गए. रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रपति भवन परिसर को भी निशाना बनाया गया. ईरानी सूत्रों ने बताया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के आवास पर भी हमला हुआ, हालांकि उनको सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है. इसके साथ ही न्यूक्लियर साइट्स को भी निशाना बनाया गया. 

हमले के बाद ईरान ने सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है और अपना एयरस्पेस पूरी तरह बंद कर दिया है. उधर, इजरायल में भी सायरन बज रहे हैं. संवेदनशील इलाकों को खाली कराया जा रहा है और लोगों से घरों के अंदर रहने की अपील की गई है.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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