सीरिया में शरा सरकार का ऐतिहासिक फैसला, 1946 के बाद पहली बार कुर्द अधिकारों को दी मान्यता, इससे क्या बदलेगा?

सीरिया में असद सरकार गिरने के एक साल बाद, कुर्द अधिकारों के लिए बड़ा कदम उठाया गया है. 1946 में सीरिया की आजादी के बाद पहली बार कुर्द अधिकारों की औपचारिक मान्यता दी जा रही है. इसके तहत उनकी संस्कृति, भाषा को मान्यता दी जाएगी और उनकी नागरिकता भी बहाल की जाएगी.

सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने एक ऐतिहासिक राष्ट्रपति आदेश जारी किया है. इसके तहत पहली बार औपचारिक रूप से देश के कुर्द अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को मान्यता दी गई है. अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस आदेश में कुर्द भाषा को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा देने और पहले से नागरिकता से वंचित कुर्द सीरियाइयों को नागरिकता बहाल करने का प्रावधान किया गया है. सीरिया के उत्तरी-पूर्वी हिस्सों में कुर्द रहते हैं और इसी क्षेत्र में तनाव भी काफी ज्यादा है. फिर भी शुक्रवार को ऐसा फैसला लिया गया है, जो काफी अच्छा और चौंकाने वाला है. सीरियाई अधिकारियों और कुर्द प्रतिनिधियों दोनों ने इस आदेश को ऐतिहासिक बताया है. यह 1946 में सीरिया की आजादी के बाद पहली बार कुर्द अधिकारों की औपचारिक मान्यता है.

सीरियाई अधिकारियों ने कहा कि इससे देश के सामाजिक तानेबाने के हाशिए पर खड़े कुर्द समाज से दूरी को कम किया जा सकेगा. उन्होंने कुर्द समुदाय को सीरिया की राष्ट्रीय संरचना में पूरी तरह शामिल करने की दिशा में इसे एक बड़ा कदम बताया है. 2026 का डिक्री नंबर 13 कुर्द मूल के सीरियाइयों को सीरियाई जनता का ‘आवश्यक और अभिन्न हिस्सा’ घोषित करता है. यह पुष्टि करता है कि उनकी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान देश की राष्ट्रीय पहचान का न बांटा जा सकने वाला हिस्सा है. इस आदेश के तहत कुर्द भाषा को अरबी के साथ राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है. अब जिन क्षेत्रों में कुर्द आबादी पर्याप्त है, वहां सरकारी और निजी स्कूलों में कुर्द भाषा पढ़ाई जा सकेगी.

त्योहार को भी दी मान्यता

एक सांकेतिक कदम के तौर पर, आदेश में 21 मार्च को मनाए जाने वाले कुर्द नववर्ष ‘नवरोज़’ को पूरे देश में वेतन सहित आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है. इसे वसंत और भाईचारे के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में वर्णित किया गया है. सरकार ने सांस्कृतिक (कल्चरल) और भाषाई विविधता (डाइवर्सिटी) की रक्षा करने की बात कही है. इसके साथ कुर्दों को अपनी विरासत, कला और मातृभाषा के बचाव और विकास का अधिकार देने की बात भी सरकार ने कही है. यह सीरिया की संप्रभुता के ढांचे के भीतर होगा.

नागरिकता भी दी जाएगी

इस आदेश का एक अन्य अहम पहलू 1962 में हसाका प्रांत में कराई गई विवादास्पद जनगणना से जुड़े भेदभावपूर्ण कानूनों और उपायों को समाप्त करना भी है. इसके कारण बड़ी संख्या में कुर्दों से सीरियाई नागरिकता छीन ली गई थी. नए आदेश के तहत सभी कुर्द सीरियाइयों को पूर्ण नागरिकता और समान अधिकार दिए जाएंगे. इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो पहले नागरिकता विहीन के रूप में दर्ज थे.

भेदभाव फैलाने वालों को दिया जाएगा दंड

डिक्री में जातीय या भाषाई भेदभाव पर रोक लगाई गई है. सरकारी संस्थानों व मीडिया को सबको साथ लेकर चलने वाले समावेशी राष्ट्रीय विमर्श (इनक्लूसिव नेशनल डिसकोर्स) अपनाने का निर्देश दिया गया है. जातीय तनाव भड़काने वालों के लिए दंड का भी प्रावधान किया गया है. यह एक दस साल से भी अधिक समय के बाद संघर्ष के बाद राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की सरकारी कोशिश है.

जमीन पर स्थिति अब भी कठिन

यह आदेश उम्मीद जताते हैं. हालांकि, जमीन पर हालात अब भी तनावपूर्ण हैं. हाल ही में उत्तरी अलेप्पो में सरकारी बलों और कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) के बीच हुई भीषण झड़पों में कम से कम 23 लोगों की मौत हुई और लाखों लोग विस्थापित हुए. इससे समाज में अविश्वास और टकराव साफ पता चलता है. दमिश्क और कुर्द प्रशासन के बीच सीरियाई राज्य में एक करने को लेकर बातचीत में अब तक सीमित प्रगति ही हुई है. इसमें कुर्द नागरिक और सैन्य ढांचे को एक करना सबसे बड़ी कठिनाई है. इसलिए, कई पर्यवेक्षक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या यह आदेश वास्तव में स्थायी शांति या जमीनी स्तर पर ठोस बदलाव ला पाएगा.

असद को हटाकर बनी थी शरा सरकार

सीरिया में 8 दिसंबर 2024 के बशर अल असद की सरकार गिरी. इसके बाद देश पर कई गुटों का कब्जा रहा. हालांकि, अमेरिका ने एक ऐसे नेता को सपोर्ट किया, जिसका इतिहास भी आतंकी तंजीमों से रहा था. यूएस प्रशासन ने उसके ऊपर मिलियन डॉलर का ईनाम भी रखा था. उस लीडर का नाम है अहमद अल शरा. 29 जनवरी 2025 को अल जुलानी के नाम से भी फेमस शरा देश के राष्ट्रपति बने. उन्होंने आते ही संविधान को भी बदला. तब से लेकर सीरिया पर उनका ही नियंत्रण है. उन्होंने बीते साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की. उन्होंने शरा को पूरा सपोर्ट दिया है. उनके ही शासन काल में दो समुदायों के बीच की खाई पाटने की यह सुखद कोशिश सामने आई है. 

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