ईरान के नए सुप्रीम लीडर चुने गए मोजतबा खामेनेई, एसेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का फैसला

Iran Supreme Leader Mojtaba Khamenei: ईरान में नए सर्वोच्च नेता का चुनाव कर लिया गया है. दिवंगत अयातोल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को एसेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने चुना है. माना जा रहा है कि उनका चुनाव आईआरजीसी के दबाव में लिया गया है.

Iran Supreme Leader Mojtaba Khamenei: ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने मोजतबा खामेनेई को अगला सुप्रीम लीडर चुना है. यूके स्थित ईरान इंटरनेशनल के सूत्रों के अनुसार, ईरान की धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का अगला सुप्रीम लीडर चुना है. उनकी नियुक्ति 3 मार्च 2026 को हुए चुनाव में किया गया. 56 वर्षीय मोजतबा को देश की कमान संभालने के लिए चुना गया है. वे दिवंगत नेता के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं और लंबे समय से संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाते रहे हैं.

माना जा रहा है कि यह चयन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के तीव्र दबाव के बीच किया गया. यानी अब ईरान की सत्ता संरचना में गार्ड्स के बढ़ता प्रभाव साफ दिख रहा है. हालांकि, सरकारी मीडिया ने अभी तक इस नियुक्ति की पुष्टि नहीं की है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में अली खामेनेई की उनके ऑफिस कंपाउंड में मौत हो गई. इस हमले में उनकी बेटी, दामाद और पोती की भी जान चली गई. ईरान इंटरनेशनल ने सूत्रों के हवाले से कहा, ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अली खामेनेई के बेटे मोजतबा को अगला सुप्रीम लीडर चुना.’ 

मोजतबा के रिवोल्यूशनरी गार्ड से करीबी संबंध हैं और माना जाता है कि वे पर्दे के पीछे काफी प्रभाव रखते हैं. माना जाता है कि वे व्यवहारिक रूप से सुप्रीम लीडर के कार्यालय का प्रबंधन संभालते थे और कई विश्लेषकों की नजर में व्यवस्था के भीतर एक प्रमुख शक्ति केंद्र रहे हैं. मोजतबा को एक मध्यम-स्तरीय धर्मगुरु बताया जाता है, जिन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों में सेवा दी थी. लंबे समय से उन्हें आईआरजीसी और ‘बासिज फोर्स’ के साथ मजबूत संबंध रखने वाला माना जाता रहा है.

सुप्रीम लीडर की केंद्रीय भूमिका

सुप्रीम लीडर ईरान की जटिल सत्ता-साझाकरण वाली शिया धर्मतांत्रिक व्यवस्था के केंद्र में होता है और राज्य के सभी मामलों पर अंतिम अधिकार रखता है. यह पद सशस्त्र बलों और शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड के सर्वोच्च कमांडर की भूमिका भी निभाता है. अमेरिका ने 2019 में इस अर्धसैनिक बल को आतंकवादी संगठन घोषित किया था. अली खामेनेई के कार्यकाल के दौरान गार्ड ने ईरान की राजनीति, सैन्य और आर्थिक क्षेत्रों में अपना प्रभाव काफी बढ़ाया.

विवाद भी हो सकता है!

मोजतबा की कथित नियुक्ति राजनीतिक रूप से संवेदनशील साबित हो सकती है. इस्लामिक रिपब्लिक लगातार वंशानुगत शासन की आलोचना करती रही है और खुद को राजशाही के मुकाबले अधिक न्यायसंगत व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करती है. ऐसे में पिता से बेटे को सत्ता हस्तांतरण उस सिद्धांत पर सवाल खड़े कर सकता है. ईरान इंटरनेशनल ने यह भी दावा किया है कि आईआरजीसी ने धार्मिक निकाय पर मोजतबा के समर्थन के लिए भारी दबाव डाला. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पिता से बेटे को सत्ता सौंपने की परंपरा संगठन और व्यवस्था के भीतर असंतोष और मतभेद को जन्म दे सकती है.

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आईआरजीसी की बड़ी सफलता

इसे ईरान के कट्टरपंथी धड़े की अहम सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, मोजतबा के पास पिता की तरह अयातोल्लाह जैसा धार्मिक दर्जा नहीं है. ऐसे में उन्हें आईआरजीसी पर ही डिपेंड रहना पड़ सकता है. आईआरजीसी ने ही धर्मगुरुओं की परिषद पर स्पष्ट दबाव डाला कि नेतृत्व की कमान मोजतबा को ही सौंपी जाए. सूत्रों के अनुसार, उनके अनुसार, मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों में व्यवस्था की निरंतरता और सख्त नीतियों को कायम रखने के लिए यही सबसे उपयुक्त विकल्प है.

कैसे होता है सुप्रीम लीडर का चुनाव?

ईरान की शासन प्रणाली को विलायत-ए-फकीह कहा जाता है, जिसका अर्थ है- इस्लामी न्यायविद का संरक्षण या नेतृत्व. यह व्यवस्था 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद रोहुल्ला खुमैनी द्वारा विकसित की गई थी. इसके तहत एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु, जिसे सर्वोच्च नेता या रहबर कहा जाता है, देश की सबसे बड़ी सत्ता का केंद्र होता है. उसके पास सेना, न्यायपालिका और अहम सरकारी संस्थाओं पर अंतिम नियंत्रण रहता है. ईरान का संविधान भी इसी सिद्धांत पर आधारित है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि देश के सभी फैसले इस्लामी कानून (शरिया) के अनुरूप हों.

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इस व्यवस्था में सर्वोच्च नेता सशस्त्र बलों के प्रमुख होते हैं और विदेश नीति, न्यायपालिका के प्रमुखों की नियुक्ति तथा बड़े रणनीतिक फैसलों पर अंतिम निर्णय लेते हैं. बारहवें इमाम (इमाम महदी) की अनुपस्थिति में एक योग्य इस्लामी विद्वान को नेतृत्व सौंपने का शिया सिद्धांत इसका आधार है. 12 सदस्यीय गार्जियन काउंसिल संसद के कानूनों की समीक्षा करती है, जबकि 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (मजलिस-ए-खोब्रेगान-ए-रहबरी) सर्वोच्च नेता का चयन और निगरानी करती है. राष्ट्रपति जनता द्वारा चुना जाता है, लेकिन वह भी सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन और नियंत्रण में काम करता है.

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