Syria Crisis: सीरिया के दोस्त अब क्यों नहीं दे रहे साथ? जानें 3 बड़ी वजह, देखें वीडियो

Syria Crisis: सीरिया में बिगड़ती स्थिति से भारत सरकार चिंतित है. भारतीयों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है. इस बीच जानें सीरिया के दोस्त उसका साथ क्यों नहीं दे पा रहे हैं?

Syria Crisis: दुनिया के एक और देश में हलचल तेज है. जी हां…इस देश का नाम सीरिया है, जहां विद्रोहियों के हमले तेज हो चुके हैं. विद्रोहियों ने गुरुवार को हमा पर कब्जा कर लिया था. इससे पहले एलेप्पो पर भी उन्होंने अपना राज कायम कर लिया. देश के तीसरे बड़े शहर होम्स पर अब उनकी नजर है, जहां से लोगों का पलायन जारी है. इस बीच एक सवाल आ रहा है कि आखिर राष्ट्रपति बशर अल-असद के पुराने दोस्त उसका साथ क्यों नहीं दे रहे? तो आइए आपको इसकी वजह बताते हैं.

दरअसल, 2011 से सीरिया में एक दशक के युद्ध के बाद भी बशर अल-असद का शासन कायम रहा. उनको अपनी सत्ता बचाने में कामयाबी इसलिए भी मिली थी, क्योंकि उन्हें ताकतवर सहयोगी ईरान, रूस के अलावा लेबनानी हिजबुल्लाह से मदद मिली थी. तो अब सवाल उठता है कि ये तीनों मदद के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे. तो जानिए

  1. अभी इसराइल की वजह से ईरान की हालत ठीक नहीं है. इसराइल के साथ अमेरिका भी खड़ा नजर आ रहा है.
  2. ईरान का सहयोगी हिजबुल्लाह भी बशर अल-असद को बचाता आया है. वह अपने लड़ाकों को भेजता था, लेकिन इसराइली हमले में उसकी भी ताकत करीब खत्म हो चुकी है.
  3. रूस भी बशर अल-असद के समर्थन में सीरिया में विद्रोही गुटों के खिलाफ हवाई हमले करता था, लेकिन रूस की भी यूक्रेन से जंग के कारण सैन्य क्षमता पहले की तरह बहुत अच्छी नहीं है.

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भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी

इस बीच, सीरिया में बिगड़ती स्थिति से चिंतित भारत सरकार ने सभी भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि वे अगली सूचना तक सीरिया की यात्रा करने से पूरी तरह बचें. एडवाइजरी में एक इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर और एक ईमेल आईडी दी गई है. विदेश मंत्रालय ने सीरिया में वर्तमान में सभी भारतीयों से दमिश्क में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने की अपील की.

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By Amitabh kumar

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अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

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