क्यूबा में 150 साल बाद आया सबसे शक्तिशाली भूकंप, ईरान में भी देर रात कांपी धरती, अचानक क्यों मच रहा तांडव?

Earthquake in Cuba and Iran: क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास 6.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके झटके कैरेबियन, फ्लोरिडा और मेक्सिको तक महसूस किए गए. वहीं ईरान के दक्षिणी हिस्से में भी 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया.

Earthquake in Cuba and Iran: धरती अचानक बहुत ज्यादा डोलने लगी है. एक दिन पहले ही फिलीपींस में 7.8 की तीव्रता का भूकंप आया था. इसके कुछ ही घंटों को बाद क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास सोमवार को आए शक्तिशाली भूकंप ने कैरेबियन क्षेत्र, मैक्सिको की खाड़ी और अमेरिका के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों तक लोगों को हिला दिया. विशेषज्ञों के अनुसार यह इस क्षेत्र में पिछले लगभग 150 वर्षों के दौरान दर्ज सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है. वहीं कुछ ही घंटों के अंतराल के बाद ईरान में भी धरती हिली. हालांकि, जहां फिलीपींस में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, वहीं क्यूबा और ईरान में किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर नुकसान की सूचना नहीं मिली.

समुद्र के भीतर आया 6.1 तीव्रता का भूकंप

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक, क्यूबा के पास आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.1 मापी गई. इसका केंद्र जमीन से करीब 26 किलोमीटर की उथली गहराई में था. यूएसजीएस के अनुसार, भूकंप का केंद्र पश्चिमी क्यूबा के मांतुआ शहर से लगभग 104 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित था. यह स्थान राजधानी हवाना से कई घंटे की दूरी पर है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह मैक्सिको की खाड़ी में उपकरणों के जरिए दर्ज किए गए सबसे महत्वपूर्ण भूकंपों में से एक है.

वैज्ञानिकों ने बताया असामान्य घटना

भूकंप वैज्ञानिकों ने इस घटना को असामान्य बताया है. उनका कहना है कि आम तौर पर बड़े भूकंप दो टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर आते हैं, जबकि यह भूकंप एक प्लेट के भीतर उत्पन्न हुआ. यूएसजीएस के विशेषज्ञों के अनुसार, 1880 में सैन क्रिस्टोबल के पास लगभग 6.0 की तीव्रता का भूकंप आया था. इसके बाद लगभग 320 किलोमीटर दायरे में अब, इतनी ताकत का झटका महसूस किया गया है.

मैक्सिको और अमेरिका तक महसूस किए गए झटके

भूकंप के झटके पश्चिमी क्यूबा के कई इलाकों में महसूस किए गए. इसके साथ ही यह झटके कैरिबियन इलाके में, मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप (जिसमें कैनकन, प्लाया डेल कारमेन और तुलुम) और अमेरिका के फ्लोरिडा जैसे राज्यों तक भी पहुँचे, जहाँ लोगों ने कुछ देर के लिए लेकिन साफ तौर पर झटके महसूस किए. 

क्यूबा की राजधानी हवाना और पिनार डेल रियो में लोगों ने बताया कि इमारतें हिलने लगीं, जिससे लोग घबराकर घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए. कई स्थानीय निवासियों का कहना था कि उन्होंने पहले कभी इतनी तेज कंपन महसूस नहीं की थी. क्यूबा में आर्थिक चुनौतियों के कारण कई इमारतें पहले से कमजोर स्थिति में हैं, इसलिए लोगों की चिंता और बढ़ गई.

नुकसान का आकलन जारी, सुनामी की चेतावनी नहीं

शुरुआती जांच में किसी बड़े संरचनात्मक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि प्रभावित क्षेत्रों में निरीक्षण का काम जारी है और आपदा प्रबंधन एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं. विशेषज्ञों ने कहा कि पश्चिमी क्यूबा में आफ्टरशॉक्स यानी भूकंप के बाद के झटके महसूस हो सकते हैं, लेकिन उनकी तीव्रता काफी कम रहने की संभावना है. भूकंप के बाद किसी तरह की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई.

ईरान में भी आया 5.0 तीव्रता का भूकंप

मंगलवार की सुबह दक्षिणी ईरान में उस समय धरती कांप उठी जब होर्मोजगान प्रांत के सरगाज क्षेत्र के पास भूकंप दर्ज किया गया. सरकारी मीडिया के अनुसार भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई. झटके आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए, चूंकि झटके रात के समय आए, इसलिए कई लोग नींद से जाग गए और एहतियातन खुले स्थानों की ओर चले गए. शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

अमेरिकी और ईरानी एजेंसियों के आंकड़ों में मामूली अंतर

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने इस भूकंप की तीव्रता 4.9 दर्ज की है. यूएसजीएस के मुताबिक भूकंप का केंद्र मिनाब शहर से लगभग 101 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित था. यूएसजीएस के आंकड़ों के अनुसार, यह भूकंप 8 जून को रात 21:08:42 यूटीसी पर आया. इसका केंद्र 28.029 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 56.908 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था.

गहराई को लेकर भी अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं. यूएसजीएस ने भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर बताई है, जबकि ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे 22 किलोमीटर गहराई पर दर्ज किया है.

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क्यों बार-बार भूकंप की चपेट में आता है ईरान?

दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में ईरान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह देश के नीचे मौजूद जटिल भूगर्भीय संरचना और सक्रिय भ्रंश रेखाएं (फॉल्ट लाइनें) हैं. ईरानी पठार कई तरह की भूवैज्ञानिक गतिविधियों का केंद्र है. यहां सक्रिय फॉल्ट सिस्टम, धरती की परतों में बदलाव, पर्वत निर्माण और ज्वालामुखीय गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं. यही कारण है कि देश में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं.

टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से बढ़ता है खतरा

वैज्ञानिकों का कहना है कि ईरान की भूकंप संवेदनशीलता का सबसे बड़ा कारण उसकी भौगोलिक स्थिति है. ईरानी प्लेट कई प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम क्षेत्र में स्थित है. इसके दक्षिण-पूर्व में भारतीय प्लेट, उत्तर में यूरेशियन प्लेट और दक्षिण व पश्चिम दिशा में अरबियन प्लेट मौजूद हैं. इन प्लेटों के लगातार दबाव और टकराव से क्षेत्र में भूगर्भीय तनाव पैदा होता रहता है.

जाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र भी बढ़ाता है भूकंपीय गतिविधि

विशेषज्ञों के मुताबिक अरबियन और यूरेशियन प्लेटों की लंबे समय से जारी टक्कर के कारण ज़ाग्रोस फोल्ड एंड थ्रस्ट बेल्ट का निर्माण हुआ है. यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय इलाकों में गिना जाता है. इन्हीं प्लेटों की लगातार गतिविधियों के कारण ईरान में छोटे और बड़े भूकंप नियमित रूप से आते रहते हैं. मंगलवार को सरगाज़ के पास आया भूकंप भी इसी भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम माना जा रहा है.

100 साल में 1.26 लाख से ज्यादा लोगों की जा चुकी है जान

ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 1900 के बाद से ईरान में आए विभिन्न भूकंपों में कम से कम 1 लाख 26 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. देश की कई सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाएं शक्तिशाली भूकंपों से जुड़ी रही हैं. खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आए भूकंपों ने भारी जनहानि और आर्थिक नुकसान पहुंचाया है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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