Strait Of Hormuz: इस बैठक में 30 से ज्यादा देशों के मिलिट्री प्लानर्स शामिल होकर इसे फिर से चालू करने का पूरा प्लान तैयार करेंगे. पिछले हफ्ते यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट के लगभग 50 देशों के बीच एक वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई थी, जिसके बाद ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व में इस अंतरराष्ट्रीय मिशन को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी.
सुरक्षा के लिए ब्लूप्रिंट होगा तैयार
ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि लंदन में होने वाली इस मीटिंग का मकसद पिछले हफ्ते हुई बातचीत को आगे बढ़ाना है. ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा है कि आज और कल का मुख्य काम डिप्लोमैटिक सहमति को एक ठोस मिलिट्री प्लान में बदलना है.
इससे समुद्र में जहाजों के आने-जाने की आजादी (Freedom of Navigation) सुरक्षित होगी और लंबे समय तक युद्धविराम (सीजफायर) को सपोर्ट मिलेगा. इस मीटिंग में सेना की क्षमता, कमांड सिस्टम और सैनिकों की तैनाती कैसे होगी, इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी.
ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम का समय
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने का फैसला किया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट लिखकर बताया कि उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अपील पर यह फैसला लिया है.
ट्रंप का मानना है कि ईरान की सरकार अभी अंदरूनी तौर पर काफी बिखरी हुई है, इसलिए उन्हें बातचीत के लिए एक सॉलिड प्रपोजल तैयार करने का मौका दिया जाना चाहिए. हालांकि, ट्रंप ने साफ किया है कि अमेरिकी सेना की घेराबंदी जारी रहेगी और वे किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं.
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ईरान का पलटवार
ईरान ने ट्रंप के इस कदम को महज एक चाल बताया है. ईरान की संसद के अध्यक्ष के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी का कहना है कि ट्रंप की ओर से बढ़ाया गया युद्धविराम उनके लिए कोई मायने नहीं रखता. मोहम्मदी ने कहा कि घेराबंदी जारी रखना बमबारी जैसा ही है और इसका जवाब मिलिट्री एक्शन से दिया जाना चाहिए.
वहीं, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा फिलहाल टल गई है. उन्हें वहां ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत करनी थी, लेकिन ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्तावों पर कोई जवाब नहीं आने के कारण यह फैसला लिया गया है.
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