Sri Ganesha Hindu Temple Germany: जर्मनी की राजधानी बर्लिन में लंबे इंतजार के बाद श्री गणेश हिंदू मंदिर के दरवाजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. कई दिनों तक चले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के बाद रविवार को मंदिर का औपचारिक उद्घाटन हुआ. बर्लिन के न्यूकोल्न इलाके में हाजेनहाइड पार्क के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी 17 मीटर ऊंची भव्य संरचना के कारण दूर से ही आकर्षित करता है. इस मंदिर को बनने में करीब 21 साल का समय लगा.
उद्घाटन समारोह के दौरान मंदिर परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. श्रद्धालु संगीत, नृत्य और भारतीय पारंपरिक खेल मलखंब के प्रदर्शन का आनंद लेते नजर आए. कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की झलक स्पष्ट दिखाई दी.
एक श्रद्धालु ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘आज हमारे बड़े भारतीय गणेश मंदिर का उद्घाटन हो रहा है. इसे देखकर मुझे बहुत गर्व और खुशी महसूस हो रही है. खासकर यहां मलखंब जैसे प्राचीन भारतीय खेल का प्रदर्शन देखकर मेरा उत्साह और बढ़ गया है. यह हमारी प्राचीन विरासत का हिस्सा है.’
वहीं एक अन्य श्रद्धालु ने कहा, ‘यह मंदिर भारत से आने वाले नए छात्रों, आईटी पेशेवरों और प्रवासी भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा. साथ ही यह जर्मन समाज को भी जोड़ने का काम करेगा. यहां सभी लोग मिलकर संगीत, नृत्य और उत्सवों का आनंद ले सकेंगे.’
दान और सेवा से 21 वर्षों में बना मंदिर
श्री गणेश हिंदू मंदिर की स्थापना 24 सितंबर 2005 को की गई थी. इसके बाद मंदिर निर्माण का लंबा सफर शुरू हुआ, जो 7 जून 2026 को प्राण प्रतिष्ठा और औपचारिक उद्घाटन के साथ पूरा हुआ. करीब 21 वर्षों तक चले इस निर्माण कार्य को पूरी तरह श्रद्धालुओं के दान और सेवा भाव के सहयोग से पूरा किया गया.
गंगा और बर्लिन के जल से हुआ विशेष अभिषेक
मंदिर के उद्घाटन से पहले 3 जून से 7 जून 2026 तक पांच दिवसीय धार्मिक महोत्सव आयोजित किया गया. इस आयोजन का सबसे विशेष क्षण 7 जून को देखने को मिला, जब गंगा नदी और बर्लिन से लाए गए जल को क्रेन की सहायता से मंदिर के 17 मीटर ऊंचे विमानम (शिखर) पर चढ़ाकर अभिषेक किया गया.
ये भी पढ़ें:- भारत के घटते प्रजनन दर पर एलन मस्क चिंतित, कहा- रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे गई, सबसे ज्यादा पढ़े लिखे लोगों में…
ये भी पढ़ें:- मोरक्को की रानी लल्ला सलमा: लाल बालों वाली वो हुस्न परी, जो अचानक बनी ‘घोस्ट प्रिंसेस’
आज यह मंदिर यूरोप के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में गिना जाता है. मंदिर का संचालन 10 स्वयंसेवी बोर्ड सदस्यों और तीन पुजारियों द्वारा किया जाता है. जर्मनी के कर विभाग ‘फिनांजआम्ट फ्यूर कॉर्परशाफ्टेन’ ने इसे आधिकारिक रूप से एक पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्था के रूप में मान्यता दी हुई है.
सभी हिंदू परंपराओं और समाज के लिए खुले हैं मंदिर के द्वार
मंदिर बर्लिन के हाजेनहाइड 106 पते पर स्थित है और प्रतिदिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है. यहां सुबह और शाम नियमित आरती आयोजित की जाती है. मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह केवल किसी एक परंपरा तक सीमित नहीं है. वैष्णव, शैव, शाक्त और स्मार्ट सहित सभी हिंदू परंपराओं के लोग यहां पूजा-अर्चना कर सकते हैं. इसके अलावा बर्लिन के स्थानीय परिवार, छात्र, विभिन्न धर्मों के दंपति, आसपास काम करने वाले लोग और शैक्षणिक समूह भी मंदिर में स्वागत योग्य हैं.
तमिलनाडु से आया काला ग्रेनाइट, भारतीय शिल्पकारों ने गढ़ी पहचान
मंदिर निर्माण की दिशा में बड़ा कदम वर्ष 2015 में उठा, जब इसका गोपुरम टावर आकार लेने लगा. तमिलनाडु से लाए गए काले ग्रेनाइट पत्थरों को भारतीय शिल्पकारों ने हाथों से तराशकर मंदिर की संरचना को अंतिम रूप दिया. हाजेनहाइड के आसमान के बीच यह भव्य गोपुरम अब बर्लिन की पहचान का हिस्सा बन चुका है. इस मंदिर के उद्घाटन से पहले वर्ष 2014 में ब्रिट्ज क्षेत्र में श्री मयूरपथी मुरुगन मंदिर की स्थापना हुई थी, जिसे बर्लिन का पहला हिंदू मंदिर माना जाता है.
