Sikh Girl Assaulted Pakistan: आईएएनएस और खालसा वॉक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित छात्रा की मां ने बताया कि स्कूल स्टाफ ने उनकी बेटी के पेट में लात-घूंसे मारे. छात्रा को अस्थमा (सांस की बीमारी) है, इसके बावजूद उसे नहीं बख्शा गया. रिपोर्ट के अनुसार, जब छात्रा की बहन उसकी मदद करने के लिए आगे आई, तो टीचर्स ने उसे यह कहकर रोक दिया कि वह सिर्फ नाटक कर रही है. सिख ब्रदरहुड इंटरनेशनल ने इस घटना का विरोध किया है और स्कूल पर सख्त एक्शन की मांग की है.
मदद के लिए भटकता परिवार
छात्रा की मां का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तान के स्थानीय सिख नेताओं से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें कहीं से कोई सपोर्ट नहीं मिला. उन्होंने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि इस महिला को पहले फैसलाबाद में 9 महीने तक कैद में रखा गया था और टॉर्चर किया गया था. उस दौरान महिला के बेटे के बाल भी जबरन काट दिए गए थे. एक पत्रकार के दखल के बाद पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने उन्हें आजाद कराया था.
अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का इतिहास
पाकिस्तान में हिंदू और सिख जैसे अल्पसंख्यकों पर हमले और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं नई नहीं हैं. आंकड़ों के मुताबिक, बंटवारे के वक्त पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी करीब 14-15% थी, जो अब लगातार हो रहे अत्याचारों की वजह से घटकर केवल 2-3% रह गई है. वहां रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अब अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं.
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1971 के नरसंहार पर US में प्रस्ताव
इसी बीच, अमेरिका से भी पाकिस्तान को लेकर खबर है. अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में एक प्रस्ताव पेश किया है. इसमें मांग की गई है कि 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान की सेना और कट्टरपंथी समूहों द्वारा बंगाली हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों को ‘नरसंहार’ (Genocide) और ‘युद्ध अपराध’ घोषित किया जाए. रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के तहत लाखों निर्दोष लोगों और बंगाली हिंदुओं की जान ली गई थी.
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