ईरान को मिलिट्री इंटेलिजेंस दे रहा है रूस? US-इजरायल के ठिकानों का पता दे रहे पुतिन! रिपोर्ट

Iran War: इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की मदद कौन दे रहा है? उनके ठिकानों का पता कौन बता रहा है? ईरान इतनी सटीकता से हमला कैसे कर रहा है? एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस अपने सैटेलाइट के जरिए ईरान की इसमें मदद कर रहा है.

Iran War: ईरान युद्ध में अब रूस की एंट्री हो चुकी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस अपने रणनीतिक सहयोगी ईरान को खुफिया जानकारी मुहैया करा रहा है. अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले हफ्ते तेहरान पर हमले शुरू करने के बाद ईरानी सेना की खुद अमेरिकी सैन्य ठिकानों का पता लगाने की क्षमता काफी कमजोर हो गई थी. वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस यह खुफिया जानकारी इसलिए दे रहा, ताकि ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वॉरशिप और लड़ाकू जहाजों और अन्य ठिकानों पर हमले कर सके.

युद्ध की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया. उसका अंदेशा था कि इससे ईरान कमजोर हो जाएगा, लेकिन ईरान ने पलटवार करते हुए अमेरिका के कई मजबूत लोकेशंस को निशाना बनाया. उसने मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से प्रिसिजन हिट (सटीक हमला) किया है. पिछले रविवार को कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 18 घायल हो गए. यह ड्रोन अमेरिका के क्षेत्रीय एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देते हुए पोर्ट शुआइबा में स्थित एक कमांड सेंटर से टकराया.

ईरान के पास नहीं है कोई बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट ने  कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में रूसी सेना की विशेषज्ञ दारा मैसिकॉट हवाला देते हुए कहा कि कहा कि ईरान बहुत सटीक तरीके से हमले कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘ईरान शुरुआती चेतावनी रडार और ओवर-द-होराइजन रडार पर बेहद सटीक हमले कर रहा है. ये हमले सटीक टार्गेटेड हैं और कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को निशाना बना रहे हैं.’ मैसिकॉट के मुताबिक ईरान के पास केवल कुछ सैन्य-स्तर के उपग्रह हैं और उसका अपना कोई बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क नहीं है.

हालांकि, वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान को रूस से मिल रही मदद की सीमा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन जिस तरह से ईरान हमला कर रहा है, उससे अंदेश हो रहा है रूस सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध करवा रहा है. सीएनएन की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है. उसके अनुसार, रूस द्वारा ईरान को दी जा रही खुफिया जानकारी का बड़ा हिस्सा मॉस्को के उन्नत उपग्रह नेटवर्क से प्राप्त इमेजरी है.

पुतिन और ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर. फोटो- एक्स.

रूस और ईरान के बीच हैं दोस्ताना संबंध

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस मदद के बदले रूस को ईरान से क्या मिल रहा है. रूस और ईरान पिछले कम से कम तीन वर्षों से मिसाइल और ड्रोन तकनीक पर सहयोग कर रहे हैं. ईरान ने रूस को यूक्रेन में इस्तेमाल के लिए शाहेद ड्रोन और कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें उपलब्ध कराई थीं और रूस के भीतर ईरानी डिजाइन वाले ड्रोन बनाने के लिए एक बड़े कारखाने की स्थापना में भी मदद की थी. सीएनएन के अनुसार, इसके बदले में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए रूस से सहायता मांगी है.

वहीं, हार्वर्ड केनेडी स्कूल के बेल्फर सेंटर में ईरान-रूस सहयोग पर शोध करने वाली निकोल ग्राजेवस्की ने कहा कि ईरान के हमले अब पहले से बेहतर हो गए हैं. उन्होंने कहा कि वे एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने में कामयाब हो रहे हैं. उनके अनुसार, पिछले साल अमेरिका और इजरायल के साथ हुए 12 दिन के युद्ध के बाद ईरान की हमलावर क्षमता में सुधार हुआ है.

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रूस को हो रहा ईरान युद्ध से फायदा

रूस और ईरान के बीच लंबे समय से कूटनीतिक, व्यापारिक और सैन्य संबंध रहे हैं. रूस ने अमेरिका-इजरायल के हमलों की आलोचना की है. उसने कहा कि उन्हें इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर रहा था. वहीं, क्रेमलिन ने शुक्रवार को कहा कि रूस ईरानी नेतृत्व के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में है. हालांकि जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या मॉस्को तेहरान की मदद कर रहा है, तो उसने इस पर कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया. इस संघर्ष से रूस को बहुत फायदा मिला है. तेल और गैस की मांग बढ़ने से उसके निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, जो यूक्रेन युद्ध के कारण लगे सैंक्शन से प्रभावित हुए थे.

चीन भी कर रहा ईरान की मदद

सीएनएन की ही रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका के पास ऐसी खुफिया जानकारी भी है जिससे संकेत मिलता है कि चीन भी ईरान को वित्तीय सहायता, स्पेयर पार्ट्स और मिसाइल से जुड़े उपकरण देने की तैयारी कर सकता है. चीन ईरान के तेल पर काफी निर्भर है. रिपोर्ट के अनुसार वह तेहरान पर दबाव बना रहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता दे. हालांकि, चीन अपनी सहायता को लेकर ज्यादा सावधानी बरत रहा है. वह चाहता है कि यह युद्ध खत्म हो, क्योंकि इससे उसकी ऊर्जा आपूर्ति खतरे में पड़ सकती है.

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अमेरिका का दावा दबाव में है ईरानी शासन

हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्री ने बुधवार को कहा कि ईरान युद्ध में रूस और चीन कोई बड़ा कारक नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरा उनके लिए कोई संदेश नहीं है. वे वास्तव में इस संघर्ष में कोई बड़ा कारक नहीं हैं और हमारा मुद्दा उनसे नहीं है.’ वहीं, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने दावा किया कि ईरानी शासन पूरी तरह दबाव में है. उनकी बैलिस्टिक मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई हर दिन घट रही है, उनकी नौसेना तबाह हो रही है और उनकी उत्पादन क्षमता भी नष्ट की जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपनी बात दोहराते हुए कहा कि शुक्रवार को कहा कि संघर्ष खत्म करने के लिए ईरान को ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ करना होगा.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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