रूस को अफ्रीका में मिला पहला नौसेना बेस का ऑफर, अमेरिका और सऊदी अरब टेंशन में, यहां उतरेगा पुतिन का जहाज

Russia Naval Base in Africa: रुस को अफ्रीका में अपना पहला नौसैन्य अड्डे का ऑफर मिला है. सूडान ने 25 साल के लिए मॉस्को को लाल सागर के नजदीक यह बेस बनाने का ऑफर दिया है. सूडान द्वारा रूस को अपना पहला नौसैनिक अड्डा देने का प्रस्ताव वैश्विक समुद्री संतुलन, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और महाशक्तियों की अफ्रीका में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है.

Russia Naval Base in Africa: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति रूस को अफ्रीका में सैन्य बेस बनाने का ऑफर मिला है. यह बड़ी रणनीतिक सफलता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से ठीक पहले मिली है. मास्को को अफ्रीकी देश सूडान ने रूस को अफ्रीका में लाल सागर के पास सैन्य ठिकाने स्थापित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है. यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब सूडान लंबे समय से चल रहे गृहयुद्ध से जूझ रहा है. अफ्रीका और लाल सागर क्षेत्र में भू-रणनीतिक बदलाव तेजी से सामने आ रहे हैं. ऐसे समय में सूडान द्वारा रूस को अपना पहला नौसैनिक अड्डा देने का प्रस्ताव वैश्विक समुद्री संतुलन, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और महाशक्तियों की अफ्रीका में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. 

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट ने इस संभावित सौदे को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, सूडान की सरकार रूस को लाल सागर के किनारे एक पोर्ट और अफ्रीका में खनन क्षेत्रों के पास एक सैन्य बेस उपलब्ध कराने को तैयार है. रूस कई महीनों से ऐसे ही किसी रणनीतिक ठिकाने की तलाश में था. रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह समझौता होता है तो यह रूस के लिए बड़ी रणनीतिक जीत होगी. यह अमेरिका के लिए चिंता का विषय भी है, क्योंकि वह नहीं चाहता कि रूस या चीन किसी अफ्रीकी पोर्ट पर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर समुद्री मार्गों पर प्रभाव हासिल करें या युद्धपोतों को दोबारा ईंधन और साजो-सामान उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करें. वैसे भी सूडान के नीचे हॉर्न ऑफ अफ्रीका कहे जाने वाले देश जिबूती में चीन और अमेरिका दोनों के नौसेना बेस हैं

सूडान का प्रस्ताव 25 साल के लिए मान्य

अक्टूबर में सूडान की सैन्य सरकार द्वारा रूस को दिए गए 25 साल के प्रस्ताव के तहत, मॉस्को को 300 सैनिक तैनात करने और चार युद्धपोतों को पोर्ट सूडान या लाल सागर के किसी अन्य निर्दिष्ट स्थान पर तैनात करने की अनुमति मिलेगी. इनमें परमाणु-संचालित जहाज भी शामिल हो सकते हैं. इसके साथ ही रूस को सूडान में खनन से जुड़े लाभदायक ठेकों तक विशेष पहुंच भी दी जाएगी. सूडान अफ्रीका में सोने का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. इसके बदले में रूस सूडानी सरकार को हथियार, खुफिया जानकारी और तकनीकी मदद देगा. गृहयुद्ध से तहस-नहस सूडान की सेना, रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के लड़ाकों से संघर्ष कर रही है, जो नागरिक इलाकों में लगातार हिंसा कर रहे हैं.

हथियारों के बदले पोर्ट देने का सौदा

पोर्ट सूडान से रूस स्वेज नहर से गुजरने वाले समुद्री यातायात की करीबी निगरानी कर सकेगा. 2250 किलोमीटर लंबा यह वही समुद्री मार्ग मार्ग है, जो यूरोप और एशिया के बीच शॉर्टकट का काम करता है. वैश्विक व्यापार के लगभग 12% का आवागमन इसी रास्ते से होता है. इस लंबे समझौते के बदले सूडान को रूस से उन्नत एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और अन्य हथियार रियायती दरों पर मिलेंगे, जिनका इस्तेमाल वह रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के खिलाफ जारी गृहयुद्ध में कर सकेगा. एक सूडानी सैन्य अधिकारी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि उन्हें नए हथियारों की जरूरत है, लेकिन रूस के साथ ऐसा सौदा अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है.

रूस के लिए यह सौदा क्यों मायने रखता है?

सूडान की सरकार और सेना ने इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. लेकिन अगर यह बनता है, तो रूस की नौसैनिक मौजूदगी के लिए बड़ी छलांग होगी. यह रूस का अफ्रीका में पहला प्रत्यक्ष स्थायी नौसैनिक अड्डा होगा. लाल सागर पर रूस की मौजूदगी भी भू-राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होगी. अब तक रूस और ईरान लाल सागर क्षेत्र में यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए प्रभाव रखते थे. यह वही क्षेत्र है जिसके पार सऊदी अरब स्थित है, जहां पहले से कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इस क्षेत्र के नीचे जिबूती और यमन हैं, जबकि ऊपर में इजरायल और फिलिस्तीन. इससे मास्को को महाद्वीप में सीधी रणनीतिक पहुंच मिलेगी, जबकि अमेरिका लंबे समय से अफ्रीका में रूसी प्रभाव को रोकने की कोशिश करता रहा है. वहीं मॉस्को को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर पर एक नई पकड़ मिल सकती है. 

प्रभात खबर पॉडकास्ट में रवि शास्त्री 7 दिसंबर को.

ये भी पढ़ें:-

मदद है या बेशर्मी! पाकिस्तान ने श्रीलंका को भेजी की एक्सपायर्ड राहत सामग्री, फिर फैलाया झूठ, जमकर मिली लताड़  

BLF की महिला फिदायीन ने मचाया कहर, पाकिस्तान आर्मी के कई जवानों की मौत, जानें कैसे की सुसाइड बॉम्बिंग?

औरतों के डर से घर को बनाया जेल, 55 साल से खुद को रखा है कैद, जानें क्या है Gynophobia, जिससे पीड़ित है शख्स?

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >