Protests in PoJK : पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने आर्थिक मुद्दों से शुरू हुए आंदोलन को अब राजनीतिक अधिकारों, स्वशासन और संस्थागत सुधारों की मांग से जोड़ दिया है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, संगठन ने चुनावों के बहिष्कार का भी ऐलान कर दिया है, जिससे पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
महंगाई के विरोध से स्वशासन की मांग तक
JAAC की शुरुआत वर्ष 2023 में बढ़े हुए बिजली बिलों, गेहूं की कीमतों और आर्थिक संकट के खिलाफ हुई थी. धीरे-धीरे आंदोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया और संगठन ने 38 सूत्रीय मांगपत्र पेश किया. इनमें सबसे प्रमुख मांग विधानसभा में आरक्षित 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की है, जिसे लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव बढ़ गया है.
सरकारी कार्रवाई और सुरक्षा बलों की तैनाती
पाकिस्तान प्रशासन ने जून में प्रस्तावित 'लॉन्ग मार्च' से पहले 5 जून 2026 को जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर सख्त शिकंजा कसते हुए उसे आतंकवाद-रोधी कानूनों (Anti-Terrorism Act) के तहत एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था. इसके बाद धारा 144 लागू की गई, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं तथा करीब 14 हजार अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई. JAAC का आरोप है कि उसके नेता उमर नजीर कश्मीरी को निशाना बनाया गया, जिसमें उनके सहयोगी शहजैब हबीब की मौत हो गई.
प्रतिबंध के बावजूद जारी है आंदोलन
पाकिस्तान सरकार की सख्ती के बावजूद भिंबर, मीरपुर और कोटली समेत कई जिलों से हजारों लोग मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करते रहे. रावलाकोट जिले में आज भी कई स्थायी धरना स्थल चल रहे हैं, जहां महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की बड़ी भागीदारी देखी जा रही है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें खाद्य सामग्री, दवाइयों और संचार सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है.
चुनाव बहिष्कार से बढ़ी सरकार की चिंता
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का कहना है कि मौजूदा हालात में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं. संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर अमल नहीं होता, वे चुनाव प्रक्रिया से दूर रहेंग. इससे 27 जुलाई के चुनावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
विदेशों में भी गूंजा PoJK का मुद्दा
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में चल रहे आंदोलन को ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क और अमेरिका में बसे कश्मीरी प्रवासियों का भी समर्थन मिल रहा है. लंदन सहित कई शहरों में पाकिस्तान के दूतावासों और उच्चायोगों के बाहर प्रदर्शन हुए. 5 जुलाई को आयोजित “लंदन लॉन्ग मार्च” में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और पाकिस्तान सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई.
पाकिस्तान के दावों पर उठे सवाल
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने पाक के उन दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें वह खुद को कश्मीरियों का हितैषी बताता है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि उनकी लोकतांत्रिक मांगों को दबाने के लिए बल प्रयोग किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में असंतोष और गहरा होता जा रहा है.
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