पाकिस्तान के SWAT में आत्मघाती हमला, काबल पुलिस स्टेशन के बाहर खुद को उड़ाया, 14 की मौत

Pakistan Swat Suicide Attack: पाकिस्तान की स्वात घाटी एक बार फिर आतंक की चपेट में है. आतंकवाद के खिलाफ आयोजित जनसभा के दौरान काबल पुलिस स्टेशन के बाहर एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. इस हमले में पुलिसकर्मियों समेत 14 लोगों की मौत हो गई.

Pakistan Swat Suicide Attack: उत्तरी पाकिस्तान के स्वात जिले में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस स्टेशन के पास भीड़-भाड़ वाले इलाके में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम से उड़ा दिया. इस फिदायनी हमले में 14 लोगों की मौत हो गई और 18 से ज्यादा लोग घायल हो गए. पाकिस्तानी पेपर डॉन की रिपोर्ट के अनुसार हमला पाकिस्तान के काबल पुलिस स्टेशन को निशाना बनाकर किया गया था.

स्वात जिला पुलिस अधिकारी उमर खान ने बताया-

घटना उस समय हुई जब पुलिसकर्मी पुलिस स्टेशन के प्रवेश द्वार पर एक संदिग्ध आत्मघाती हमलावर को रोककर उसकी तलाशी लेने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान हमलावर ने अपने शरीर पर बंधे विस्फोटकों में विस्फोट कर दिया.

आतंकवाद विरोधी रैली के दौरान हुआ विस्फोट

रविवार को काबल चौक के पास स्वात घाटी में बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों के विरोध में सैकड़ों लोग एक बड़े जन प्रदर्शन में शामिल हुए थे. यह प्रदर्शन क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की विफलता के खिलाफ जनता के बढ़ते आक्रोश का प्रतीक माना जा रहा है.

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया किधमाका उस समय हुआ जब रैली का अंतिम वक्ता मंच से संबोधित कर रहा था. विस्फोट के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और प्रदर्शन में शामिल लोग दहशत में इधर-उधर भागने लगे.

फोरेंसिक जांच शुरू, दो घायलों की हालत गंभीर

स्वात पुलिस के प्रवक्ता नासिर इकबाल करीमी ने डॉन अखबार से बातचीत में 14 लोगों की मौत की पुष्टि की. घटना के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया और फोरेंसिक जांच शुरू कर दी. रेस्क्यू 1122 के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैजी ने बताया कि नौ शवों को सैदु शरीफ केंद्रीय अस्पताल और पांच शवों को काबल अस्पताल भेजा गया. घायलों में से दो की हालत गंभीर बनी हुई है. अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है.

प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

रैली में मौजूद वक्ताओं ने स्वात में एक बार फिर बढ़ रही उग्रवादी हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल करने के लिए सरकार से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आतंकवाद को खत्म करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो बड़े पैमाने पर नागरिक असंतोष पैदा हो सकता है.

आम नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप

रैली में आयोजकों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारी आम नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि सशस्त्र आतंकवादी स्वात के पहाड़ी इलाकों में खुलेआम सक्रिय हैं. प्रदर्शनकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार फैलाने वाले आतंकवादियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है. वक्ताओं ने कहा-

हमारे बच्चों को शिक्षा का अधिकार है और हमारे परिवारों को शांति से रहने का अधिकार है. हमने वर्षों तक रक्तपात देखा है. हमारी माताओं, बहनों और बेटियों ने बहुत कष्ट झेला है और हम विधवाओं तथा अनाथों की एक और पीढ़ी नहीं चाहते.

राष्ट्रपति जरदारी समेत कई नेताओं ने की हमले की निंदा

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख जाहिर किया है. उन्होंने अधिकारियों को घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता देने का निर्देश दिया है.

आतंकवादी शांति, राष्ट्रीय एकता और राज्य के शासन को कमजोर करने के अपने नापाक प्रयासों में कभी सफल नहीं होंगे- राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी

खैबर पख्तूनख्वा के राज्यपाल फैसल करीम कुंडी और मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने भी हमले की कड़ी निंदा की. मुख्यमंत्री अफरीदी ने प्रांतीय पुलिस महानिरीक्षक से घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब की और कहा- शांति के दुश्मनों को उनके नापाक इरादों में कभी सफल नहीं होने दिया जाएगा.

पाकिस्तान में बढ़ती उग्रवादी हिंसा चिंता का विषय

स्वात के पास यह आत्मघाती हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान में उग्रवादी हिंसा लगातार बढ़ रही है. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, इसी दिन पेशावर-इस्लामाबाद मोटरवे के टोल प्लाजा के पास एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) विस्फोट में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. इससे पहले 30 जुलाई को हांगू जिले की एक चेकपोस्ट पर हुए हमले में नौ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी.

जुलाई में आतंकवाद से मौतों में 105 प्रतिशत का इजाफा

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) के आंकड़ों के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में जुलाई महीने के दौरान आतंकवाद से संबंधित 154 लोगों की मौत दर्ज की गई, जबकि जून में यह संख्या 75 थी. यानी केवल एक महीने में आतंकवाद से होने वाली मौतों में करीब 105 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.

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लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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